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    लिवर की दिक्कत से हो सकता है पोर्टल हाईपरटेंशन

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 15 Feb 2018 08:51 PM (IST)

    - केजीएमयू के सर्जरी विभाग में आयोजित कांफ्रेंस - जनरल सर्जरी विभाग में मनाया जा रहा है 63

    लिवर की दिक्कत से हो सकता है पोर्टल हाईपरटेंशन

    - केजीएमयू के सर्जरी विभाग में आयोजित कांफ्रेंस

    - जनरल सर्जरी विभाग में मनाया जा रहा है 63वां स्थापना दिवस

    जागरण संवाददाता, लखनऊ : लिवर की बीमारी आगे चलकर जानलेवा हो साबित हो सकती है। हेपेटाइटिस ए, बी और सी के अलावा लिवर सिरोसिस आदि बीमारियों में लापरवाही करने से लिवर में पोर्टल वेन में हाईपरटेंशन से जान भी जा सकती है। इसमें लिवर फेलीयर की आशंका भी बढ़ जाती है और मरीज की मौत भी हो सकती है। यह जानकारी गैस्ट्रो सर्जरी विभाग डॉ. लव कक्कड़ ने केजीएमयू के सर्जरी विभाग में आयोजित कांफ्रेंस में दी।

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    डॉ. कक्कड़ ने बताया कि पोर्टल वेन आंतो में मौजूद खून को इकठ्ठा करके लिवर तक ले जाती है। अगर लिवर में कुछ खराबी हो या पोर्टल वीन के रास्ते में गांठ या खून का थक्का आदि बन जाए तो इसमें रुकावट आने लगती है। इसकी वजह से पोर्टल वेन में ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है जिससे पेट में पानी भरने लगता है। अगर ज्यादा समय तक इसमें लापरवाही की जाए तो लिवर फेलीयर हो सकता है। डॉ.कक्कड़ ने बताया कि इस बीमारी में मरीज को खून की उल्टियां व स्टूल के जरिए खून आने लगता है। उन्होंने बताया कि इसमें अगर मरीज समय पर आ जाए तो जान बचाना मुमकिन होता है। उन्होंने बताया कि यह समस्या अकसर उन मरीजों को अधिक होती है जिन्हे लिवर संबंधित समस्या होती है। लिवर ठीक रहे इसलिए तली-भुनी, फैटी, ऑयली व मसालेदार चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

    संट से होती है सर्जरी

    डॉ.कक्कड़ ने बताया कि इसका इलाज संट सर्जरी से किया जाता है। इसमें पेट की अन्य नसों को पोर्टल वेन से जोड़कर उसका रास्ता साफ किया जाता है, जिससे पोर्टल वेन का रास्ता साफ हो जाता है।

    मसालेदार खाने से करें परहेज

    पीजीआइ के गैस्ट्रोसर्जरी विभाग के प्रो.अशोक कुमार ने बताया कि अगर ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगे, पेट में सूजन की शिकायत रहे, पेट साफ न रहे या स्टूल सफेद रंग का हो या उसमें खून आने लगे तो इसे सामान्य बीमारी समझ कर हलके में न लें। यह लक्षण आंतों के कैंसर के हो सकते है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे खाने में जंक फूड, तेल व मसाले का अधिक सेवन बढ़ रहा है वैसे-वैसे आंतों का कैंसर भी बढ़ रहा है। पहले यह बीमारी अन्य देशों के मुकाबले भारत में कम पाई जाती थी, लेकिन अब यह बीमारी भी बढ़ रही है। इसकी जांच कोलोनोस्कोपी और सीटी स्कैन से की जाती है।

    पोस्टीरियर रेक्टोपेक्सी है नई तकनीक

    डॉ. अभिजीत चंद्रा ने बताया कि रेक्टल प्रोलैपस (मलाशय के रास्ते का बाहर आ जाना) की सर्जरी नई और कारगर तकनीक से होने लगी है। रेक्टल प्रोल्प्स की समस्या पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अधिक होती है। कमजोरी या बार-बार प्रेग्नेंसी के कारण मांसपेशियां कमजोर होने से पेशाब का रास्ता बाहर आ जाता है। ऐसे में सर्जरी ही एकमात्र विकल्प होती है। डॉ. अभिजीत ने बताया कि पहले इसकी सर्जरी चीरा लगाकर की जाती थी अब इस सर्जरी के लिए दूरबीन विधि सबसे ज्यादा असरदार है। उन्होंने बताया कि पोस्टीरियर रेक्टोपेक्सी के जरिए पेट में जाकर रेक्टम को जाली लगाकर फिक्स कर दिया जाता है। पहले इसे पीछे से फिक्स किया जाता था, इस विधि में कई दिक्कतें आती थी। वहीं नई तकनीक से इस जाली को पीछे के बजाए अंदर की ओर से फिक्स करते है इससे रिकवरी भी जल्दी होती है।