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    49 हजार करोड़ का घोटालेबाज पंजाब से पकड़ा गया, UP समेत 10 राज्यों में 5 करोड़ निवेशकों को ठगा

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 09:10 PM (IST)

    UP Crime | UP News | 49 हजार करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने वाली पर्ल्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के एक और फरार निदेशक गुरजंत सिंह गिल को मोहाली से गिरफ्तार किया गया है। ईओडब्ल्यू उसे जालौन लाएगी। कंपनी ने उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में लगभग पांच करोड़ निवेशकों को अपना शिकार बनाया था। निवेशकों को लुभावनी योजनाओं का लालच दिया गया था।

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    49 हजार करोड़ के घोटाले में गुरजंत सिंह गिल मोहाली से गिरफ्तार।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। निवेशकों को लुभावनी योजनाओं का झांसा देकर 49 हजार करोड़ रुपये की ठगी करने वाली पल्र्स एग्रोटेक कारपोरेशन लिमिटेड (पीएसीएल) के एक और फरार निदेशक गुरजंत सिंह गिल को मोहाली (पंजाब) से गिरफ्तार किया है।

    ईओडब्ल्यू उसे ट्रांजिट रिमांड पर जालौन लाकर आगे की कार्रवाई करेगी। ईओडब्ल्यू ने निवेशकों की ओर से जालौन में दर्ज कराए गए मुकदमे के तहत गुरजंत सिंह को पकड़ा है। इसी मामले में दो माह पूर्व पीएसीएल के एक अन्य निदेशक गुरनाम सिंह को रोपड़ (पंजाब) से गिरफ्तार किया गया था।

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    मामले की जांच सीबीअाइ भी कर रही है। पोंजी स्कीम के माध्यम से देश के इस सबसे बड़े आर्थिक अपराध में गुरनाम सिंह को पहले सीबीआई ने दिल्ली में दर्ज मुकदमे में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।

    पीएसीएल ने उत्तर प्रदेश समेत 10 राज्यों में लगभग पांच करोड़ निवेशकों को अपना शिकार बनाया था। कंपनी ने उप्र के अलावा पंजाब, असम, राजस्थान, दिल्ली, मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, केरल, बिहार व छत्तीसगढ़ में भी अपनी शाखाएं खोली थीं।

    ठगों ने प्रदेश में महोबा, सुलतानपुर, फर्रुखाबाद, जालौन व अन्य जिलों में पीएसीएल की शाखाएं खोलकर लोगों को आकर्षक योजनाओं के तहत भूखंड देने के नाम पर तथा आरडी व एफडी के रूप में निवेश कराया था। मामले में जालौन में निवेशकों की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे की जांच शासन ने ईओडब्ल्यू को सौंपी थी।

    ईओडब्ल्यू ने जांच के बाद कानपुर सेक्टर में वर्ष 2018 में कंपनी संचालकों के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। पीएसीएल का नाम पहले गुरुवंत एग्रोटेक लिमिटेड था, जिसका पंजीकरण राजस्थान में वर्ष 1996 में कराया गया था।

    बाद में पीएसीएल का पंजीकरण राजस्थान में वर्ष 2011 में कराया गया था। कंपनी का मुख्यालय नई दिल्ली में था। कंपनी ने रिजर्व बैंक में पंजीकरण कराए बिना ही बैंकिंग कार्य शुरू कर दिया था और निवेशकों की रकम हड़पकर भाग निकले थे।