अब यूपी में पांव जमाना आसान नहीं! दिल्ली चुनाव का उत्तर प्रदेश पर असर; साफ हो गई सियासी तस्वीर
दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) की हार से यूपी में पार्टी के विस्तार की योजना को झटका लगा है। मुफ्त बिजली शिक्षा और स्वास्थ्य के केजरीवाल मॉडल का प्रचार कर AAP प्रदेश में जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही थी लेकिन अब कार्यकर्ताओं का मनोबल कमजोर हुआ है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में AAP ने 349 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। आम आदमी पार्टी (आप) केजरीवाल की जिन गारंटियों को लेकर यूपी में अपना जनाधार बढ़ाने की जुगत में जुटी हुई थी, उसे करारा झटका लगा है। दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार से प्रदेश के भी कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा है।
अभी तक दिल्ली में मुफ्त बिजली के साथ ही शिक्षा व चिकित्सा का केजरीवाल माडल पेश का प्रचार-प्रसार कर यहां भी अपने पांव जमाने की जुगत में जुटी हुई थी। अब इस हार से संगठन खड़ा करने और उसे मजबूती देने के लिए पसीना बहाना होगा।
आइएनडीआइए का घटक होने के बावजूद वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव पार्टी प्रदेश में नहीं लड़ी। यहां आइएनडीआइए से सपा व कांग्रेस पार्टी के प्रत्याशियों में से आप के नेता ज्यादा सक्रिय सपा प्रत्याशियों के पक्ष में रहे।
वर्ष 2022 जब्त हो गई थी जमानत
वहीं वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में आप ने 349 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे और सभी की जमानत जब्त हो गई थी। पार्टी को कुल 3,47,147 वोट मिले थे। यानी 0.38 प्रतिशत वोट ही मिले थे। वहीं वर्ष 2023 में हुए नगर निकाय चुनावों में पार्टी को कुछ राहत मिली थी।
तीन नगर पालिका परिषद अध्यक्ष, छह नगर पंचायत अध्यक्ष, आठ पार्षद, 30 नगर पालिका परिषद सदस्य व 61 नगर पंचायत सदस्य जीते। अध्यक्ष पद पर विधानसभा चुनाव के बाद किसी की तैनाती नहीं हुई है। पार्टी को आठ प्रांतों में बांटकर चलाया जा रहा है। हालांकि, पार्टी के मुख्य प्रवक्ता वंशराज दुबे कहते हैं कि दिल्ली की हार का यूपी में कोई असर नहीं पड़ेगा। हम वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में मजबूती से उतरेंगे।
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