लखनऊ[जागरण संवाददाता]। जीवन में मा का क्या मोल होता है, यह कोई सपूत ही समझ सकता है। रामजी की माता का वर्षो पहले निधन हो गया था। इस दौरान वह अलग-थलग पड़ गए। जीवन के रहस्यों को समझने के लिए उन्होंने तीन बार श्रीमद्भागवत गीता पढ़ी तो मन-मस्तिष्क पर गहरा असर पड़ा। उनका नीरस जीवन अब सरस दिखने लगा था। बस उन्होंने लोगों को मुफ्त में गीता पढ़ाने को ध्येय बना लिया। अब वह एक कॉल, एसएमएस या ई-मेल पर मुफ्त में गीता लोगों के पते पर पहुंचा रहे हैं। राजधानी दिल्ली के विवेक विहार के निवासी नंद किशोर रामजी के नाम से जाने जाते हैं। यमुनापार में उनकी फोटो कॉपी की दुकान है। इसी की आय से वह जीविकोपार्जन करते हैं। काम-काज से वक्त निकाल कर वह धर्म ग्रंथों का अध्ययन करते हैं। रामजी कहते हैं कि भगवान की प्रेरणा से उन्हें श्रीमद् भागवत गीता पढ़ने का अवसर मिला। इस ग्रंथ के अध्ययन से जीवन का उद्देश्य समझ में आया। इस ग्रंथ के अध्ययन से जीवन का उद्देश्य समझ में आया। खुद धर्म-कर्म करने के साथ ही दूसरों को भी इसके लिए नि:शुल्क गीता भेज कर प्रेरित कर रहे हैं। खुद धर्म-कर्म करने के साथ ही दूसरों को भी इसके लिए नि:शुल्क गीता भेज कर प्रेरित कर रहे हैं। वह गत दस वर्षो इसे इस मिशन में लगे हैं। अब तक 50 हजार लोगों का श्रीमद् भागवत गीता मुफ्त में भेज चुके हैं।

गीता मंगवाने को इन नंबरों पर करें कॉल या एसएमएस

यह है मोबाइल नंबर - 9873052666 व 9873557727

Posted By: Jagran