लखनऊ, जेएनएन। भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर लगातार अपना जातीय समीकरण दुरुस्त करने में लगी है। योगी आदित्यनाथ मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार के बाद मनोनीत विधान परिषद सदस्यों का नाम फाइनल करने में भी भाजपा ने बेहद सधा कदम रखा है।

करीब तीन माह से चल रहा अटकलों का सिलसिला आखिरकार थम गया। सियासी गलियारों में तमाम नाम इतने समय तक तैरने के बाद भाजपा संगठन और सरकार ने चार ऐसे कार्यकर्ताओं के नाम विधान परिषद सदस्य के लिए चुने, जिनके सहारे विधानसभा चुनाव की रणनीति को चौतरफा साधने में मदद मिले। अलग-अलग समीकरणों में माफिक बैठ रहे चौधरी वीरेंद्र सिंह गुर्जर, गोपाल अंदाज भुर्जी, जितिन प्रसाद और संजय निषाद को एमएलसी मनोनीत करने के लिए सरकार ने राज्यपाल को प्रस्ताव भेजा था। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को नए मंत्रियों के शपथग्रहण समारोह से पहले एमएलसी मनोनयन के प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उसे सरकार को भेज दिया था। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मनोनीत चारों विधान परिषद सदस्यों को बधाई देने के साथ विश्वास जताया है कि वे अपने लोकतांत्रिक आचरण और जनपक्षीय कार्यों से उच्च सदन की गरिमा बढ़ाएंगे।

उत्तर प्रदेश विधान परिषद के चार मनोनीत सदस्यों का कार्यकाल पांच जुलाई, 2021 को खत्म हो गया था। उसी दिन से संभावित नामों को लेकर चर्चा और अटकलें शुरू हो गई थीं। यह तय था कि भाजपा ऐसे ही चेहरों को विधान परिषद में भेजेगी, जो जातीय-क्षेत्रीय समीकरणों का संतुलन पूरा करते हुए आगामी विधानसभा चुनाव में भी पार्टी के लिए मददगार साबित हों। इनमें कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का नाम शुरू से ही तय माना जा रहा था। यह संभावना भी मजबूत बनी रही कि इस ब्राह्मण चेहरे को एमएलसी बनाकर योगी मंत्रिमंडल में भी जगह दी जाएगी। अंतत: दिल्ली से लखनऊ तक उनके नाम पर सहमति बन गई।

भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गोरखपुर निवासी डॉ. संजय निषाद को लेकर कई बार परिस्थितियां बनती-बिगड़ती दिखीं। पहले वह अपने पुत्र सांसद प्रवीण निषाद को मोदी मंत्रिमंडल में जगह दिलाना चाहते थे। पिछले दिनों हुए मंत्रिमंडल विस्तार में उन्हें जगह न मिलने पर संजय निषाद ने नाराजगी जाहिर की। बागी तेवर देख पहले लगा भाजपा और निषाद पार्टी के सियासी रिश्ते बिगड़ सकते हैं, लेकिन किसी भी वर्ग को नाराज न करने की रणनीति पर चल रही भाजपा ने निषादों को थामे रखने के लिए संजय से बातचीत का सिलसिला जारी रखा।

दिल्ली में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई दौर की हुई बैठकों ने संभावना बनाई कि निषाद पार्टी अध्यक्ष को एमएलसी बनाकर योगी सरकार में मंत्री भी बनाया जा सकता है। पिछले दिनों केंद्रीय शिक्षा मंत्री और प्रदेश के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ मंच साझा कर उन्होंने विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा से गठबंधन की औपचारिक घोषणा कर दी। इससे फिर माना जा रहा था कि निषाद का मंत्री बनना तय है, लेकिन अंतत: समझौता एमएलसी पर ही तय हुआ।

विपक्षी दल किसानों के मुद्दे पर भाजपा को घेरना चाहते हैं। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में जाट और गुर्जर बिरादरी पर भाजपा की नजर थी। इससे कयास लगाए जा रहे थे कि इस वर्ग को साधने के लिए पश्चिम से किसी प्रभावशाली नेता को पार्टी एमएलसी बनाया जा सकता है। मार्च, 2019 में सपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए छह बार के विधायक वीरेंद्र सिंह गुर्जर पर पार्टी ने भरोसा जताया है। मूल रूप से शामली के कैराना निवासी गुर्जर का जाट बेल्ट में अच्छा प्रभाव माना जाता है। जहां आंदोलन की ताप है, वहां इन्हें पसीना बहाकर ठंडक बढ़ाने के लिए लगाया जाएगा।

इसी तरह पिछड़ों को अपनी चुनावी रणनीति में आगे लेकर चल रहे भगवा दल ने उत्तर प्रदेश खादी ग्रामोद्योग बोर्ड के उपाध्यक्ष गोपाल अंजान भुर्जी को भी विधान परिषद भेजने का निर्णय लिया है। मुरादाबाद निवासी गोपाल सहित पिछड़ा वर्ग से संजय निषाद और वीरेंद्र गुर्जर लिए गए हैं।

Edited By: Dharmendra Pandey