लखनऊ, जागरण संवाददाता। उत्तराखंड सहित देश भर में अक्सर होने वाली प्राकृतिक आपदा में बड़े पैमाने पर होने वाली जानमाल की हानि को कम करने के लिए एनडीआरएफ शोध करेगा। इस शोध के लिए एनडीआरएफ इंटरनेट मीडिया पर एक सर्वे कर रहा है। इस सर्वे में लोगों से प्राकृतिक आपदा को लेकर कुल 25 सवाल और उनके कमेंट हासिल किए जाएंगे। उनसे बनी रिसर्च रिपोर्ट को इस साल अक्टूबर से नवंबर के बीच आइआइटी दिल्ली में वर्ल्ड कांग्रेस ऑन डिजास्टर मैनेजमेंट (डब्ल्यूसीडीएम) में एनडीआरएफ के गाजियाबाद में तैनात डिप्टी कमांडेंट आदित्य प्रताप सिंह प्रस्तुत करेंगे। 

डिप्टी कमांडेंट आदित्य प्रताप सिंह ने सात फरवरी को उत्तराखंड के चमोली में आयी प्राकृतिक आपदा के समय एनडीआरएफ की पांच टीमों का नेतृत्व किया था। यह एक बड़ी आपदा थी, जिसमें 206 लोग लापता हो गए थे। एनडीआरएफ ने भविष्य में ऐसी आपदा के समय संपत्ति व जान के नुकसान को बहुत कम करने के लिए आदित्य प्रताप सिंह को इस पर शोध करने की जिम्मेदारी दी है। वह अपने शोध में आम जन में प्राकृतिक आपदा को लेकर जागरूकता की जानकारी भी जुटा रहे हैं। जिसमें यह पता चलेगा कि किस शहर के कितने शिक्षित लोग प्राकृतिक आपदा के बारे में जानकारी रखते हैं। यह एक महत्वपूर्ण विषय है। इसके लिए अलग से एक टीम गठित की गई है। 

विशेष तौर पर ग्लेशियर की झीलों और भूस्खलन के कारण बनी झीलों के फटने पर होने वाले नुकसान के बारे में आंकलन किया जाएगा। इस सर्वे में हिस्सा लेने के लिए लोगों को अपना नाम, शैक्षिक योग्यता, व्यवसाय, निवास स्थान की जानकारी देनी होगी। साथ ही उनसे केदारनाथ प्राकृतिक आपदा के कारणों, तपोवन आपदा, ग्लेशियर झील के फटने (जीएलओएफ), भूस्खलन के झीलों के फटने (एलएलओएफ) से जुड़े, आपात स्थिति में मौजूद उपकरणों, समय से पहले जानकारी देने वाला वार्निंग सिस्टम की मौजूदगी जैसे कई सवाल होंगे। यह सवाल गूगल पर मौजूद होंगे।

Edited By: Vikas Mishra