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    Lucknow News: बेगम नूरजहां ने 200 वर्ष पहले शुरू की थी कुश्‍ती की परंपरा, मह‍िलाएं आज भी द‍िखा रहीं दम

    By Anurag GuptaEdited By:
    Updated: Wed, 03 Aug 2022 11:20 PM (IST)

    Naga Panchami 2022 नाग पंचमी के दूसरे दिन सुल्तानपुर रोड स्थित गोसाईगंज के अहिमामऊ में अयोज‍ित महिला कुश्ती यानी हापा में महिलाओं ने अपनी ताकत और हुनर का प्रदर्शन किया। महिलाएं पहलवानों की तरह दांव लगाकर एकदूसरे को पटखनी दे रही थीं।

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    Naga Panchami 2022: अहिमामऊ में नाग पंचमी के दूसरे दिन हापा में मह‍िलाओं ने द‍िखाया दमखम।

    लखनऊ, जागरण संवाददाता। ढोलक की थाप पर महिलाओं ने जब देवी गीत गाना शुरू किया तो अखाड़े में विनय कुमारी ने राजरानी को पटखनी दे मारी। इनके अलावा रामकली और सियारानी, कमला और गीता, उर्मिला और विनय कुमारी, रामरति और कमला और मालती और कमला के बीच भी जमकर दंगल का दौर चला।

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    मौका था, नाग पंचमी के दूसरे दिन सुल्तानपुर रोड स्थित गोसाईगंज के अहिमामऊ में आयोजित होने वाली महिला कुश्ती यानी हापा का। यहां महिलाओं ने अपनी ताकत और हुनर का प्रदर्शन कुश्ती से किया। महिलाओं के बीच होने वाली इस कुश्ती को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग जुटे रहे। अपनी पसंदीदा पहलवान को जीताने के लिए हौसला अफजाई करते नजर आए।

    अहिमामऊ में बुधवार हुए दांवपेच के इस खेल में महिलाएं शिक्षित पहलवानों की तरह सामने वाली महिला पर दांव लगाकर पटखनी दे रही थीं। गीता और कमला के बीच में दंगल में गीता ने जीत हासिल की तो वहीं, विनय कुमारी ने कमला, सियारानी और राजरानी के साथ हाथ आजमाते हुए तीन बार जीत हासिल की।

    कमला भी गीता और रामरति के साथ हापा में दांवपेच से तीन बार जीतीं। मालती और उर्मिला ने एक-एक बार अपनी जीत दर्ज करवाई। रामरति और सियारानी को कुश्ती के इस खेल में हार मिली।

    यहां की पूर्व प्रधान और आयोजक विनय कुमारी बताती है कि गांव में हापा वर्षों से चली आ रही परंपरा है। इसमें महिलाएं ढोलक और मंजीरा के साथ देवी गीत गाते हुए अखाड़े की ओर आती हैं। हापा की शुरुआत रीछ देवी, गूंगे देवी और दुर्गा पूजा के साथ भुइयां देवी को जय बोल कर की जाती है। जोर आजमाइश के साथ पूरे जोश और उत्साह से महिलाएं प्रतिभाग करती हैं।

    अहिमामऊ में इस अनूठे आयोजन की शुरुआत लगभग 200 वर्ष पूर्व अहिमामऊ के नवाब की बेगम नूरजहां और कमर जहां ने नाग पंचमी के अगले दिन महिला दंगल की परंपरा से शुरू की थी। तब से अब तक ढोल मंजीरे के साथ जोर शोर से इसका आयोजन होता आ रहा है। उस वक्त दंगल में जीत पर अशर्फी और हार पर चांदी का सिक्का दिया जाता था। अब जीतने वाली महिलाओं को साड़ी और नकदी दी जाती है। हापा में अखाड़े के पास जहां महिलाओं की भीड़ दिखती है वहीं, आयोजन स्थल पर पुरुषों का आना मना होता है।