जागरण संवाददाता, लखनऊ: कभी खुद के खर्चे के लिए तंगी का सामना करने वाली तृप्ता अब न केवल खुद अपने पैरों पर खड़ी हो गई हैं, बल्कि 50 से अधिक महिलाओं को समृद्धि का पाठ भी पढ़ा रही हैं। आधी आबादी को हुनर सिखाने के साथ ही उन्हें स्वरोजगार से जोड़ रही हैं। उनकी कोशिश है कि महिलाएं
आत्मनिर्भर बनें और परिवार की तरक्की में योगदान दें।

आलमबाग के चंदर नगर निवासी तृप्ता शर्मा बचपन से ही हुनरमंद थी। वह पढ़ाई के साथ घरेलू ट्रीटमेंट प्रोडक्ट्स बनाती थीं। शादी के बाद बेरोजगार होने
के कारण खुद की आर्थिक जरूरतें पूरी करने के लिए उन्हें पति के सामने हाथ फैलाना पड़ता था। एक दिन उन्होंने अपने हुनर को ही व्यवसाय बनाने की पहल
की। परिवार ने साथ दिया तो नतीजे बेहतर मिले।

अपने उत्पादों पर प्रयोग कर खुद संतुष्ट हुईं तो उसे बेचने के लिए बाजारों में भेजा। बिक्री के साथ कमाई बढ़ने पर उनका हौसला बढ़ता गया। आज वह झाई पैक, नीम पैक, ब्राइडल उबटन, फेयर ग्लो पैक, मिक्स्ड फ्रूटपैक, पपाया पैक, ऑरेंज पैक, मोइस्चराइजर, क्लीनजर, केश हिना के साथ ही मसाला चाय जैसे उत्पादों को तैयार कर रही हैं।

अपने पति विनोद शर्मा के सहयोग से उन्होंने मां लक्ष्मी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। आज वह अपने समूह में 50 से अधिक महिलाओं को जोड़ चुकी हैं। इन महिलाओं को हुनर सिखाने के साथ ही रोजगार भी दे रही हैं।

लखनऊ महोत्सव में कमाया नाम
तृप्ता व उनके समूह की महिलाओं के हुनर जो देखता वही कायल हो जाता। एक बार आजीविका मिशन के अधिकारियों ने घरेलू ट्रीटमेंट प्रोडक्ट का परीक्षण
किया। उत्पादों की गुणवत्ता और महिलाओं के हुनर से अधिकारी भी प्रभावित हुए तो विभागीय कार्यक्रमों में स्टाल लगाने के लिए आमंत्रित किया। इस पर
तृप्ता आजीविका मिशन के साथ ही विकास विभाग के कार्यक्रमों में अपने उत्पादों का स्टाल लगाकर प्रदर्शन करने लगीं। वहां उनसे हुनर सीख कई समूह
की महिलाओं ने यह कार्य शुरू किया।

जनवरी में शिल्प ग्राम में आयोजित लखनऊ महोत्सव में तृप्ता ने महिलाओं के समूह का प्रतिनिधित्व किया। वहां प्रदेश भर से आए लोगों को घरेलू उत्पादों की जानकारी संग हुनर साझा किया। महिलाओं को स्वावलंबन व समृद्धि का पाठ पढ़ाने के लिए विभाग की ओर उन्हें सम्मानित भी किया जा चुका है।

महिलाओं को प्रशिक्षित करने के साथ देती हैं काम
- तृप्ता महिलाओं को घरेलू उत्पाद बनाने के लिए प्रशिक्षित करती हैं। जो महिलाएं उनके साथ काम करना चाहती हैं उन्हें अपने समूह से जोड़ती हैं। कुछ महिलाएं सीख कर अपना स्वरोजगार शुरू करती हैं। ऐसी महिलाओं को हुनर की तालीम देने के साथ ही उन्हें विभागों से सहयोग भी दिलाती हैं।

By Nandlal Sharma