जागरण संवाददाता, लखनऊ। पुरुष प्रधान समाज में नारी उत्पीड़न के मामले बढ़ते जा रहे हैं। सभ्य समुदाय में भी घरेलू हिंसा कम नहीं हो रही है। विडंबना है कि आधी आबादी को प्रताड़ित करने में महिलाएं भी पीछे नहीं हैं। अब तो कामकाजी महिलाएं भी हिंसा की शिकार हो रही हैं। इसके पीछे कई कारण हैं। इन्हीं कारणों को बेहतर ढंग से समझने के साथ ही पारिवारिक प्रकरणों का निस्तारण कराने में सुरक्षा संस्था योगदान दे रही है। संस्था की कोशिश है कि महिलाएं अपना अधिकार पाएं और बेहतर समाज बनाने में सहभागी बनें।

सुरक्षा संस्था की ओर से वर्ष 1985 में विकास नगर में परिवार परामर्श केंद्र स्थापित किया गया। शुरुआत में केंद्र में हर वर्ष घरेलू हिंसा के गिने-चुने प्रकरण आते थे, लेकिन अब हजारों मामले आ रहे हैं। संस्था की सचिव शालिनी माथुर बताती हैं कि पहले की अपेक्षा आज के दौर में घरेलू हिंसा के साथ ही महिलाओं के यौन शोषण के मामले बढ़ गए हैं। प्रति वर्ष परिवार परामर्श केंद्र में पांच-छह हजार ऐसे केस आ रहे हैं। इसमें सर्वाधिक मामले घरेलू हिंसा के होते हैं। इन मामलों में संस्था दोनों पक्षों के लोगों की काउंसिलिंग करती है और विवादों का निपटारा कराती है।

मुहल्ला मीटिंग संग जागरूकता अभियान
सुरक्षा संस्था हर सप्ताह किसी मुहल्ले का चयन करती है। वहां कम से कम 50 महिलाओं के साथ मीटिंग की जाती है। संस्था की सदस्य डॉ. स्वर्णिमा सिंह, छवि जैन, डॉ. कविता उपाध्याय आदि के सहयोग से बैठक में आधी आबादी को शिक्षा, सुरक्षा जैसे मुद्दों पर जागरूक करने के साथ ही घरेलू मामलों से पार पाने के सुझाव देती हैं। काउंसिलिंग के जरिए महिलाओं को मानसिक रूप से सशक्त भी बनाया जाता है। बालिकाओं को घरेलू हिंसा का कैसे सामना करना पड़ सकता है, इसके लिए संस्था की ओर से कस्तूरबा गांधी विद्यालय की शिक्षिकाओं को प्रशिक्षित किया जा रहा है। साथ ही स्कूल व कॉलेजों में कार्यशालाएं आयोजित कर छात्राओं को उनके अधिकारों की जानकारी दी जाती है।

जेंडर रिसोर्स सेंटर में समझें महिलाओं की दशा
सुरक्षा संस्था की ओर से विकासनगर में नव कल्याणी जेंडर रिसोर्स सेंटर स्थापित किया गया है। यहां इंजीनियरिंग, सोशल वर्क समेत विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों को महिलाओं की दशा की ट्रेनिंग दी जाती है। कहानी, पोस्टर आदि के जरिए आधी आबादी की स्थितियों का अध्ययन भी कराया जाता है। इसके साथ ही लिंग समकक्षता अभियान चलाया जाता है। इस अभियान के जरिए लिंग भेद को दूर करने के लिए लोगों को जागरूक किया जाता है।

संस्था के अन्य प्रमुख कार्य

  •  स्कूलों में जिन बच्चों के माता-पिता अनपढ़ हैं, उनकी प्रोग्रेस रिपोर्ट परखने के लिए मदर मीटिंग की जाती है।
  •  जगजीवन राम पुलिस अकादमी राजाजीपुरम में रेलवे के अधिकारियों को महिलाओं की दशा के बारे में प्रशिक्षित किया जाता है।
  •  संस्था के सदस्य हफ्ते में दो दिन एसएसपी ऑफिस में महिला उत्पीड़न के केस को निपटाने में पुलिस की मदद करते हैं।

By Krishan Kumar