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    Vinay Pathak Corruption Case: विश्वविद्यालय से लेकर संस्थान तक पाठक के कृपा पात्र हैं कई फर्जी डिग्री धारक

    By Pulak TripathiEdited By: Vikas Mishra
    Updated: Fri, 18 Nov 2022 08:14 AM (IST)

    Vinay Pathak Corruption Case विनय पाठक के कई ऐसे कृपा पात्र हैं जो फर्जी डिग्री लेकर विश्वविद्यालय और सरकारी संस्थानों में अहम पदों पर बैठे हैं। एसटीएफ ऐसे लोगों की पहचान कर अगर आगे बढ़ती है तो कई चेहरे बेनकाब होंगे।

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    Vinay Pathak Corruption Case: विनय पाठक के मामले में निष्पक्ष जांच हुई तो कई विश्वविद्यालयों के कुलपति लपेटे में आएंगे।

    Vinay Pathak Corruption Case: लखनऊ, [पुलक त्रिपाठी]। डा एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय (एकेटीयू) के पूर्व और कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति रहे प्रो विनय पाठक के मामले में निष्पक्ष जांच हुई तो कई विश्वविद्यालयों के कुलपति भी लपेटे में आएंगे। विश्वविद्यालय से जुड़े लोगाें का कहना है कि प्रो विनय पाठक का नाम एफआइआर के बाद कमीशन खोरी में सामने आया, मगर प्रदेश के कई ऐसे नटवरलाल हैं, जिन्होंने संबंधित विश्वविद्यालय के कुलपति, निदेशक, डिप्टी रजिस्ट्रार, असिस्टेंट रजिस्ट्रार की कुर्सी पाने के लिए प्रो पाठक को रास्ता बनाया। इनमें अधिकांश वे हैं जो योग्यता, शैक्षिक पात्रता और अनुभवों में पूरी तरह अपात्र हैं।

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    मगर जिसने भी प्रो पाठक के दरबार में हाजिरी लगाई, उसके दिन बदल गए। यही कारण रहा कि पाठक को उच्च शिक्षा के क्षेत्र में वीसी नहीं, वीसी मेकर के नाम से जाना जाने लगा था। कई तो हाल ही में डेपुटेशन का रास्ता ढूढ़ दूसरे संस्थान खिसक लिए। एसटीएफ ऐसे लोगों की पहचान कर आगे बढ़ती है तो कई चेहरे बेनकाब होंगे। रोजाना उजागर किए जाएंगे ऐसे नाम, जिसपर एसटीएफ करे काम। ये हैं पाठक के कृपा पात्र डिप्टी रजिस्ट्रार राजीव मिश्र: इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग में कार्यरत डिप्टी रजिस्ट्रार उन्हीं में से एक हैं।

    इस पद पर राजीव 29 अगस्त 2017 से कार्यरत हैं। संस्थान के प्रपत्रों के अनुसार इन्होंने चयन के दौरान बीए अंतिम वर्ष की फजी मार्कशीट लगाई। राजीव ने बीए फाइनल में 469 पाए जबकि आवेदन के दौरान इन्होने उसे 499 दिखाया। इस बात का खुलासा इनके द्वारा चार संस्थानों में अलग दस्तावेजों के आधार पर किए गए आवेदन के दौरान हुआ।

    संदेह हुआ तो संस्थान द्वारा पुष्टि के लिए अंक तालिका की छायाप्रति बुंदेलखंड विश्वविद्यालय झांसी भेजी गई। विश्वविद्यालय ने दिसंबर 2021 ने 469 अंक होने की ही पुष्टि की। 2019 में प्रोवेशन काल में ही इन्हें वित्तीय अनियमित्ता के आरोप में निलंबित कर दिया गया। बाद में इन पर लगे आरोप सही पाए और दो वर्ष के लिए इनकी प्रोवेशन दो वर्ष के लिए बढ़ा दी गई।

    बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने दोबारा पत्र जारी किया है। उसमें लिपिकीय त्रुटि की बात कही गई है। वित्तीय अनियमित्ता के आरोप को मैंने निदेशक व कुलपति के समक्ष चुनौती दी है। -राजीव मिश्रा, डिप्टी रजिस्ट्रार, इंस्टीट्यूट आफ इंजीनियरिंग