महाकुंभ के लिए तैयार हो रही 'खास पुस्तक', इतिहास से लेकर प्रयागराज के धार्मिक स्थलों की मिलेगी जानकारी
महाकुंभ 2025 की तैयारियां जोंरों पर हैं और पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग एक विशेष पुस्तक तैयार कर रहा है। इस पुस्तक में महाकुंभ के इतिहास से लेकर आयोजन स्थलों और कारणों तक की विस्तृत जानकारी होगी। प्रयागराज के आस-पास के पर्यटन स्थलों की जानकारी भी इसमें शामिल होगी। प्रयागराज के आस-पास पर्यटकों के घूमने के स्थानों के बारे में भी पुस्तक में सारी सूचनाएं दी जाएंगी।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। महाकुंभ 2025 की तैयारियां जोरों-शोरों पर चल रही हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए पर्यटन विभाग महाकुंभ को लेकर विशेष पुस्तक तैयार कर रहा है। पुस्तक में महाकुंभ के इतिहास से लेकर इसका आयोजन कहां-कहां पर और क्यों किया जाता है, इसके बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई है। साथ ही प्रयागराज के आस-पास पर्यटकों के घूमने के स्थानों के बारे में भी पुस्तक में सारी सूचनाएं दी जाएंगी।
महाकुंभ के आयोजन को लेकर राज्य सरकार के निर्देश पर पर्यटन विभाग ने छह माह पहले ही अपनी तैयारियां शुरू कर दी थीं। पर्यटकों की सुुविधा के लिए गाइडों, नाविकों, टैक्सी व रिक्शा चालकों को प्रशिक्षण देने के साथ-साथ विभाग की तरफ से ट्रैक सूट उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
स्थानीय दुकानदारों से लेकर ढाबा संचालकों को दिया जा रहा प्रशिक्षण
टैक्सी, रिक्शा चालकों व नाविकों को एक रंग के ट्रैक सूट दिए जाएंगे। इसके अलावा गाइडों को अलग रंग के ट्रैक सूट दिए जाएंगे। विभाग ने स्थानीय दुकानदारों से लेकर रेस्टोरेंट व ढाबा संचालकों को पर्यटकों के साथ अच्छा व्यवहार करने का प्रशिक्षण दिया है।
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महाकुंभ की पुस्तक में मिलेगी सारी जानकारी
महाकुंभ की तैयारियों में पर्यटन विभाग कोई कमी नहीं छोड़ना चाहता है, इसलिए विभाग की तरफ से महाकुंभ को लेकर तैयार की जा रही विशेष पुस्तक में हेरीटेज वॉक, कल्पवृक्ष (परिजात), त्रिवेणी संगम, नागवासुकि मंदिर, छतनाग मुंशी बगीचा, द्रौपदी घाट, कल्याणी देवी मंदिर, ललिता देवी मंदिर, गुरुद्वारा पक्की संगत, चक्र माधव मंदिर, स्वराज भवन, चित्रगुप्त मंदिर, दक्षिणामुखी हनुमान मंदिर, रूप गौड़ीय मठ, नवग्रह मंदिर, भारद्वाज आश्रम, भीष्म पितामह मंदिर, वेणी माधव मंदिर, दशाश्वमेघ मंदिर, अलोपी देवी मंदिर, संकट मोचन हनुमान मंदिर, पातालपुरी मंदिर, दक्षिण भारतीय शैली में निर्मित शंकर विमान मंडपम सहित तमाम धार्मिक स्थलों की जानकारी दी जाएगी।
राज्य सरकार 5 हजार करोड़ से ज्यादा खर्च कर रही
पुस्तक में कुंभ की कथा व कुंभ काल के बारे में भी जानकारी दी जा रही है। बता दें कि राज्य सरकार महाकुंभ के आयोजन पर 5435.68 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। इसके अलावा केंद्र सरकार 2100 रुपये खर्च कर रही है।
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