Navratri 2022: लखनऊ, जागरण संवाददाता। मॉडल हाउस में श्रीराम मंदिर के स्वरूप में बनाए जा रहे पंडाल में मां की स्थापना होगी तो दूसरी ओर शहर की सबसे पुरानी बंगाली क्लब में लकड़ी के आधार पर प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है। 107 साल पुरानी पूजा की शुरुआत 30 सितंबर को आनंदोत्सव मेला से होगी। चुनाव के दौरान बुलडोजर को लेकर चली हवा का असर रहा कि हर गरीब के दिमाग में बुलडोजर न्याय का प्रतीक बन गया।

निर्बलों की आशा का प्रतीक बुलडोजर को लेकर कैंट पूजा समिति भी मंथन कर रही है। मां की प्रतिमा के साथ बुलडोजर का स्वरूप श्रद्धालुओं को सुरक्षा का एहसास कराएगा। देवी मां बलुडोजर पर सवार होकर आएंगी। हालांकि, अभी इसे लेकर अंतिम निर्णय होना बाकी है। प्रतिमाओं का निर्माण शुरू हो गया है। एक अक्टूबर से पंडाल में मां की आराधना शुरू हो जाएगी। 

कमेटी के प्रवक्ता निहार डे ने बताया कि अभी मंथन चल रहा है। बुलडोजर को थीम बनाने के पीछे मंशा है कि प्रदेश सरकार के इस प्रयास से भूमाफिया परेशान हैं तो बेघर गरीबों के अंदर छत पाने की आशा भी जगी है। आजादी के 75 साल पूरे होने पर पंडाल देशभक्ति के रंग में सराबोर होगा। पंडाल में लगने वाले परदों को तिरंगे के रंग में लगाया जाएगा। आधुनिक हथियारों के जरिए तरक्की की ओर बढ़ते भारत के कदमों को सजावट के माध्यम से दिखाया जाएगा।

जिसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। मुख्यद्वार से लेकर पंडाल को बनाने का काम शुरू हो गया है। साथ ही सजावट के लिए तैयारी की जा रही है। इसके अलावा सुरक्षा के इंतजाम को देखते हुए लोकल पुलिस व मिलेट्री पुलिस की व्यवस्था रहेगी। साथ ही महिलाओं के लिए अलग लाइन व पंडाल की व्यवस्था भी की जा रही है। समिति की ओर से प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है।

Edited By: Vikas Mishra

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