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    3.5 घंटे का होगा चंद्र ग्रहण, सूतक काल में बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट; गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें ध्यान

    Updated: Sun, 31 Aug 2025 04:33 PM (IST)

    Chandra Grahan 2025 | लखनऊ में 7 सितंबर को चंद्र ग्रहण होगा जिसका सूतक काल नौ घंटे पहले शुरू हो जाएगा। यह ग्रहण रात 957 से 127 तक रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और शुभ कार्य वर्जित होंगे। ग्रहण के दौरान खाने-पीने से बचना चाहिए और गरीबों को दान करना चाहिए। चंद्र ग्रहण भारत समेत कई देशों में दिखाई देगा।

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    चंद्र ग्रहण सात को, नौ घंटे पहले शुरू होगा सूतक काल।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। चंद्र ग्रहण सात सितंबर को है। नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाएगा। रात 9:57 बजे ग्रहण शुरू होगा और देर रात 1:27 बजे तक रहेगा। ग्रहण का समय तीन घंटे 30 मिनट है। देश के साथ ही यह ग्रहण एशिया, यूरोप, अंटार्कटिका, आस्ट्रेलिया और प्रशांत व अटलांटिक महासागर में भी दिखाई देगा।

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    आचार्य शक्तिधर त्रिपाठी ने बताया कि चंद्र ग्रहण का सूतक काल ग्रहण के नौ घंटे पहले लग जाएगा और मंदिरों के कपाट भी बंद कर दिए जाएंगे। मनकामेश्वर मंदिर की महंत देव्या गिरी ने बताया कि सभी के कल्याण की प्रार्थना के साथ मंदिर के कपाट बंद होंगे।

    दोपहर 12:57 बजे मंदिर के कपाट बंद हो जाएंगे। महाकाल मंदिर के व्यवस्थापक अतुल मिश्रा ने बताया कि मध्याह्न में महाकाल की आरती के साथ कपाट बंद हो जाएंगे। आठ सितंबर को भोर में मंदिर के कपाट खोले जाएंगे।

    हनुमान सेतु मंदिर के आचार्य चंद्रकांत ने बताया कि सात सितंबर की रात 9:57 बजे ग्रहण का स्पर्श काल होगा। रात 11:41 बजे मध्यकाल और रात 1:27 बजे मोक्ष काल होगा। मंदिर आठ को सुबह पांच बजे मंदिर के शुद्धिकरण के साथ दर्शन शुरू होंगे। ग्रहण के दौरान श्रद्धालुओं का प्रवेश नहीं होगा।

    आचार्य एसएस नागपाल ने बताया कि चंद्र ग्रहण के दिन सूतक काल में हमें कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। घर में रखे खाने के सामान पर कुश या तुलसी के पत्ते डालने चाहिए, जिससे खाने की सामग्री अशुद्ध न हो जाए। गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।

    इनका रखें ध्यान

    आचार्य आनंद दुबे ने बताया कि चंद्र ग्रहण में किसी भी धार्मिक या शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। चंद्र ग्रहण के दौरान देवता या पेड़-पौधों को छूने से बचना चाहिए। यात्रा से बचना चाहिए। चंद्र ग्रहण के दौरान कैंची, चाकू, सुई का प्रयोग करने से बचें।

    गर्भवती को गाय के गोबर या गेरू से पेट को गोठना चाहिए। ग्रहण देखने से बचना चाहिए। ग्रहण काल में भोजन या पानी का सेवन न करें। ग्रहण बाद स्नान करना चाहिए।