पर्यावरण को नुकसान तो नहीं? कुकरैल नाइट सफारी पर उठे सवाल; SC ने CEC से चार हफ्ते में मांगी रिपोर्ट
लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी निर्माण से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों की जांच अब सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस समिति को चार सप्ताह में रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। कुकरैल नाइट सफारी परियोजना 900 एकड़ में फैली है जिसमें 72% क्षेत्र में हरियाली रहेगी। इस परियोजना पर कुल 1510 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। कुकरैल वन क्षेत्र में नाइट सफारी का निर्माण से पर्यावरण को कितना नुकसान होगा इसकी जांच अब सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (सीईसी) करेगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह कमेटी चार हफ्ते में अपनी रिपोर्ट देगी। यह कमेटी पर्यावरण के मामले में सुप्रीम कोर्ट को सलाह देती है।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली तीन जजों की खंडपीठ ने मामले कुकरैल नाइट सफारी बनाने के निर्णय को सीईसी के पास भेज दिया है। समिति चार सप्ताह में पर्यावरणीय दृष्टिकोण से अपनी रिपोर्ट देगी।
दरअसल, कुकरैल नाइट सफारी को भले ही केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण, नई दिल्ली की अनुमति मिल गई हो, किंतु उसे सुप्रीम कोर्ट की अनुमति भी लेनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने 19 फरवरी 2024 के आदेश के तहत वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत वनों की पुरानी परिभाषा को बहाल करते हुए सभी प्रकार की वन भूमि का संरक्षित करने का निर्णय लिया था। वन भूमि में बुनियादी ढांचे के विकास को सीमित करने के निर्देश दिए थे।
कुकरैल नाइट सफारी के निदेशक राम कुमार ने बताया कि हम लोगों ने कुकरैल नाइट सफारी के निर्माण के लिए पहले ही सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम आवेदन कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए सीईसी को चार सप्ताह में जांच कर रिपोर्ट देने के लिए कहा है।
इस मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को होनी है। कुकरैल नाइट सफारी व चिड़ियाघर करीब 900 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाना है। पहले चरण में नाइट सफारी के साथ ही इको टूरिज्म जोन तैयार किया जाएगा जबकि दूसरे चरण में चिड़ियाघर का विकास होगा। इसमें कुल 1510 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुकरैल नाइट सफारी में करीब 72 प्रतिशत क्षेत्र में हरियाली रहेगी।
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