यूपी की 75 सूखी नदियों में लौटी जीवनधारा, सरकार की बड़ी पहल से बदला परिदृश्य
उत्तर प्रदेश में राज्य सरकार 75 सूखी नदियों को पुनर्जीवित करने की दिशा में काम कर रही है। इस पहल में IIT संस्थानों से तकनीकी मदद ली जा रही है और 10 प्रमुख विभाग निगरानी कर रहे हैं। मनरेगा के तहत शुरू हुई इस योजना में जलधारा को बहाल करने के साथ-साथ पूरे नदी पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्जीवित करने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रदेश की सूखी और उपेक्षित 75 नदियों में फिर से जीवनधारा बहने लगी है। राज्य सरकार नदियों के पुनर्जीवन को लेकर बड़ी पहल कर रही है। तकनीकी सहयोग के लिए आइआइटी संस्थानों को जोड़ा गया है, जबकि 10 प्रमुख विभागों की निगरानी में यह अभियान जमीन पर गति पकड़ रहा है। हर मंडल में गठित अनुश्रवण समितियां इस कार्य को प्रभावी और पारदर्शी बना रही हैं।
प्रदेश की नदियों को फिर से जीवित करने की पहल की शुरुआत 2018 में मनरेगा के तहत हुई थी। अब इसे तकनीकी और संगठित रूप देकर अधिक प्रभावी बनाया गया है। सरकार का फोकस केवल जलधारा बहाल करने तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे नदी पारितंत्र को पुनर्जीवित करने पर है।
इस अभियान में आइआइटी कानपुर, आइआइटी बीएचयू, बीबीएयू लखनऊ और आइआइटी रुड़की जैसे संस्थानों की मदद ली जा रही है। ये संस्थान नदियों की पारिस्थितिकी, जलधारा का इतिहास, जलग्रहण क्षेत्र और आसपास के सामाजिक व पर्यावरणीय कारकों का अध्ययन कर वैज्ञानिक समाधान दे रहे हैं। राज्य सरकार ने नदी पुनर्जीवन के लिए एक विस्तृत मास्टर प्लान तैयार किया है।
इसके तहत नदियों की सफाई, प्राकृतिक बहाव की पुनर्बहाली, जल संचयन, चैनलिंग, पौधरोपण और जनसहभागिता जैसे तत्वों को जोड़ा गया है। इस अभियान को धरातल पर उतारने के लिए सिंचाई, पंचायती राज, वन, उद्यान, मत्स्य, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, राजस्व व अन्य विभागों की साझेदारी भी की गई है।
योजना के सतत क्रियान्वयन के लिए हर मंडल में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति गठित की गई है। यह समिति समय-समय पर कार्यों की समीक्षा कर रही है। यह सुनिश्चित करती है कि पुनरुद्धार योजनाएं तय समय और गुणवत्ता के साथ पूरी हों। जल प्रबंधन को प्राथमिकता में रखने वाली योगी सरकार ने जिला गंगा समितियों को भी इस अभियान से जोड़ा है।
ये समितियां न केवल निगरानी करती हैं, बल्कि स्थानीय लोगों को भी जोड़कर इस कार्य को एक जन आंदोलन का रूप दे रही हैं। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि नदियों का पुनर्जीवन एक बार की परियोजना न बनकर दीर्घकालिक और टिकाऊ मॉडल बने।
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