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    'हर घर नल की तरह... हर घर तक पहुंचाएंगे सड़क', डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का बड़ा एलान

    Updated: Fri, 29 Aug 2025 07:14 PM (IST)

    उत्तर प्रदेश सरकार ग्रामीण सड़क नेटवर्क को और बेहतर बनाने के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) पर जोर दे रही है। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सड़कों के जुड़ने से किसानों और ग्रामीण उद्यमों को फायदा हो रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि हर गांव को सड़क से जोड़ा जाए जैसे हर घर में नल का पानी पहुंचाया जा रहा है।

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    हर घर नल की तरह हर घर तक पहुंचाएंगे सड़क: केशव प्रसाद मौर्य।

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) में ग्रामीण सड़क नेटवर्क को और सघन किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए सबसे बड़ी जरूरत रोड कनेक्टिविटी है।

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    पीएमजीएसवाई में बनी सड़कें ग्रामीणों के लिए हाईवे सिद्ध हो रही हैं। सड़कों के जुड़ने के चलते किसानों को फायदा हो रहा है और ग्रामीण उद्यम भी बढ़े हैं। विकास की गति तेज हुई है। फुल डेप्थ रिक्लेमेशन (एफडीआर) तकनीक से कम लागत में पर्यावरण संतुलन के साथ अधिक टिकाऊ सड़कों का निर्माण किया जा रहा है।

    अब हमें हर घर नल की तरह हर घर-गांव को सड़क से जोड़ना है। उप मुख्यमंत्री ने इंडियन रोड कांग्रेस का नाम बदलकर भारतीय सड़क संघ करने का भी सुझाव दिया।

    इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में उप्र ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण (यूपीआरआरडीए) और इंडियन रोड कांग्रेस (आइआरसी) द्वारा ‘सड़क निर्माण में एफडीआर तकनीक व ग्रीन टेक्नोलाजी का उपयोग’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय सेमिनार में पहले दिन उपमुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा पीएमजीएसवाई की शुरुआत की गई थी।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कार्यकाल में इस योजना में नए आयाम स्थापित किए हैं। राज्य में ग्रामीण क्षेत्रों में 250 या उससे अधिक जनसंख्या वाली बस्तियों को टिकाऊ और सभी मौसमों के अनुकूल सड़कों से जोड़ा जा रहा है। सड़क निर्माण में एफडीआर तकनीक सफलता से अपनाई जा रही है और इस माडल को अन्य राज्य भी अपना रहे हैं।

    इस तकनीक से बनी सड़कें अधिक टिकाऊ होती हैं और उनकी औसत आयु लगभग 15 वर्ष अनुमानित है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम हो रहा है। सड़कों के नवीनीकरण में एफडीआर के अलावा वेस्ट प्लास्टिक का भी उपयोग किया जा रहा है।

    उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इंडियन रोड कांग्रेस का गठन 1934 में अंग्रेजों के समय हुआ था। इसको और बेहतर बनाने के लिए सुधार की आवश्यकता है। मेरा सुझाव है कि अंग्रेजों के समय बनाई गई संस्था के नाम में सुधार किए जाने पर विचार किया जाए।

    उन्होंने विशेषज्ञों से सड़कों की लागत और कम करने के लिए शोध करने का आह्वान किया। इस दौरान ग्राम्य विकास आयुक्त जीएस प्रियदर्शी, नेशनल रूरल इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट एजेंसी के संयुक्त सचिव अमित शुक्ला, मुख्य कार्यपालक अधिकारी यूपीआरआरडीए अखंड प्रताप सिंह, अध्यक्ष आइआरसी मनोरंजन परिदा आदि उपस्थित रहे।