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    2014 के चुनाव में अतीक के संपर्क में आने के बाद बहुरे छांगुर के दिन, माफिया गठजोड़ का बड़ा खुलासा!

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 07:33 PM (IST)

    बलरामपुर में मतांतरण कराने वाले जलालुद्दीन उर्फ छांगुर का दिवंगत माफिया अतीक अहमद से गहरा संबंध सामने आया है। वह अतीक के साथ चुनावी मंच साझा करता था। अतीक से नजदीकी के बाद छांगुर की संपत्ति में इजाफा हुआ। उसने नीतू उर्फ नसरीन के साथ मतांतरण की फैक्ट्री चलाई और विदेशी फंडिंग से मदरसे बनवाए। छांगुर ने एक बार नामांकन के दौरान भाजपा खेमे में घोड़ा दौड़ा दिया था।

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    अतीक के संपर्क में आने के बाद बहुरे छांगुर के दिन।

    अम्बिका वाजपेयी, बलरामपुर। हजारों हिंदू युवतियों को फंसाकर मतांतरण कराने वाले जलालुद्दीन उर्फ छांगुर का दिवंगत माफिया अतीक अहमद से भी गहरा कनेक्शन सामने आया है। दिवंगत माफिया मुख्तार से उसके संबंधों की बात पहले ही सामने आ चुकी है।

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    अतीक अहमद ने 2014 का लोकसभा चुनाव सपा के टिकट पर श्रावस्ती से लड़ा था। उतरौला विधानसभा सीट इसी लोकसभा क्षेत्र में आती है, जहां छांगुर की कोठी बनी थी। छांगुर मुस्लिम बाहुल्य इलाकों, खासकर अपने गांव रेहरा माफी में अतीक अहमद के साथ खुली जीप में बैठकर जाता था और चुनावी मंच भी साझा करता था।

    श्रावस्ती के पूर्व सांसद और वर्तमान में जिला पंचायत अध्यक्ष दद्दन मिश्र बताते हैं कि अखबार में छांगुर का चेहरा देखा तो याद आया कि यह तो वही शख्स है जो अतीक के साथ दिन-रात मेरे खिलाफ चुनाव में लगा था। गांव में चर्चा है कि इसी इलेक्शन के बाद छांगुर पूरी तरह से अतीक के संपर्क में आया।

    अतीक के जीवित रहते वह कई बार प्रयागराज भी गया और उसके गुर्गों ने छांगुर के लिए मुंबई की राह आसान की। कभी साइकिल पर अंगूठियों के नग बेचने वाला छांगुर वहीं से करोड़ों में खेलने लगा। पहली बार जब वह मुंबई से लौटा तो सेकेंड हैंड क्वालिस गाड़ी लेकर आया था।

    इसके बाद वह जमीनें खरीदने और नीतू उर्फ नसरीन के साथ मतांतरण की फैक्ट्री चलाने लगा। नीतू रोहरा उर्फ नसरीन उन शुरुआती लोगों में थी जिसका छांगुर ने मतांतरण कराया। वही उसके फंडिंग का पूरा हिसाब किताब रखती है। छांगुर और उससे जुड़े लोगों के खातों में सौ करोड़ से ज्यादा के विदेशी लेनदेन का ब्योरा मिला है।

    अतीक के संपर्क में आने के बाद छांगुर का यह प्रभाव हो गया था कि वह मुस्लिमों के बीच खुद को सूफी संत और उनके रहनुमा के रूप में स्थापित करने में जुट गया। इसी के बूते वह अपनी पत्नी को प्रधानी का चुनाव जिताने में भी सफल रहा।

    अतीक की तरह उसने भी जमीनों पर कब्जा किया लेकिन उसका तरीका अलग था। छांगुर ने विदेशी फंडिंग से नेपाल सीमा से सटे जिलों में सरकारी जमीनों पर मदरसे बनाकर जनसंख्या संतुलन बिगाड़ने का प्रयास किया। अभी एटीएस मदरसों को फंड की जांच कर रही है।

    नामांकन कराने जाते समय भाजपा खेमे में दौड़ा दिया था घोड़ा श्रावस्ती लोकसभा सीट के लिए बलरामपुर कलेक्ट्रेट में नामांकन पत्र जमा किया जा रहा था। एक ही दिन सपा व भाजपा दोनों प्रत्याशियों को नामांकन पत्र जमा करना था, लेकिन प्रशासन ने दोनों को अलग-अलग समय दिया था।

    पहले सपा प्रत्याशी अतीक अहमद को समय मिला था तो वहीं सड़क किनारे एक बाग में अपने समर्थकों को एकत्र करने के लिए भाजपा प्रत्याशी को स्थान दिया गया था।

    छांगुर ने अतीक को नामांकन के लिए घोड़ा दिया था। वह बलरामपुर नगर की ओर से कलेक्ट्रेट जा रहा था। जब वह भाजपा खेमे के निकट पहुंचा तो घोड़ा सड़क पर चलाने के बजाए उसने भाजपा खेमे की ओर दौड़ा दिया था, जिससे कुछ देर तक वहां अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो गई थी।