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    Lucknow Metro: मेट्रो का विस्तार नहीं पकड़ रहा रफ्तार, चारबाग-बसंतकुंज प्रोजेक्ट की हर साल बढ़ रही है लागत

    लखनऊ के चारबाग से बसंतकुंज के बीच जो डीपीआर तैयार हुआ था वह धूल फांक रहा है। करीब चार हजार चार सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट को समय से न शुरू करने के कारण हर साल दस से पंद्रह फीसद लागत कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ रही है।

    By Rafiya NazEdited By: Updated: Sun, 07 Feb 2021 09:18 AM (IST)
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    लखनऊ के चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो की लागत हर साल दस फीसद बढ़ रही है। (प्रतीकात्‍मक फोटो)

    लखनऊ, जेएनएन। मेट्रो का विस्तार राजधानी में जितना होगा, उतना प्रदूषण का ग्राफ और ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार आएगा। इसको लेकर फिलहाल कोई सक्रियता शासन स्तर से नहीं दिखाई जा रही है। ऐसे में नार्थ साउथ कॉरिडोर के बीच चलने वाली मेट्रो में यात्रियों का ग्राफ 40 हजार तक ही पहुंच सका है। कोरोना काल में अपने वाहनों से चलने का प्रचलन जहां बढ़ा है, वहीं मेट्रो का विस्तार न होने से पुराने लखनऊ के लोग मेट्रो सेवा से सालों बाद भी अछूते हैं। ऐसे में सवा साल पहले चारबाग से बसंतकुंज के बीच जो डीपीआर तैयार हुआ था वह धूल फांक रहा है। करीब चार हजार चार सौ करोड़ के इस प्रोजेक्ट को समय से न शुरू करने के कारण हर साल दस से पंद्रह फीसद लागत कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ रही है। 

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    चारबाग से बसंतकुंज के बीच नई कालोनियों की संख्या हर साल बढ़ रही है। हरदोई रोड पर पिछले तीन सालों में आबादी का ग्राफ बढ़ा है। पुराने लखनऊ की तरफ दो व चार पहिया से जाने वालों का अधिकांश समय ट्रैफिक व्यवस्था व बढ़ते वाहनों की संख्या के कारण खराब करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीएमआरसी) ने पांच साल पहले ही चौधरी चरण सिंह से मुंशी पुलिया और दूसरा कॉरिडोर चारबाग से बसंतकुंज के बीच तैयार किया था। अभी तक दूसरे कॉरिडोर के डीपीआर को जरूरत संशोधित किया जा चुका है, लेकिन शासन ने डीपीआर को मंजूर करके केंद्र को नहीं भेजा है। इसके कारण मेट्रो की कनेक्टिविटी नहीं बढ़ पा रही है। 

    लविप्रा की योजना बसंत कुंज दोबारा शुरू हो गई, मेट्रो नहीं आई 

    यूपीएमआरसी ने बसंत कुंज तक मेट्रो का खाका तैयार किया था। उद्देश्य था कि लखनऊ विकास प्राधिकरण की नई टाउनशिप में बसने वाले लाखों लोगों को इससे राहत मिलेगी। यहां हजारों लोग अभी सेक्टर ए व जागर्स पार्क के पास रहते भी हैं। वहीं लविप्रा ने अपने अन्य सेक्टरों पर काम भी शुरू कर दिया है लेकिन मेट्रो का सपना अभी बरकरार है।

    यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने बताया कि शासन स्तर से जैसे ही हरी झंडी मिलेगी, काम को गति देने का काम शुरू कर दिया जाएगा। उम्मीद बरकरार है। जल्द ही सकारात्मक रिजल्ट आएगा।