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    यूपी के इस एक्सप्रेसवे पर जरा संभलकर चलिए, NHAI की ढिलाई से जगह-जगह गड्ढे, कभी भी हो सकता है हादसा

    Updated: Thu, 29 May 2025 05:01 PM (IST)

    लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर एनएचएआइ की लापरवाही से लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं। हाल ही में एक कार गड्ढे में गिर गई जिसे ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर ने बचाया। पीएनसी कंपनी की लापरवाही के बावजूद एनएचएआइ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है जिससे राहगीरों की जान खतरे में है। गड्ढों को भरने और प्रकाश व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की जा रही है।

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    एनएचएआइ की ढिलाई से निर्माणाधीन एक्सप्रेस वे पर कार गड्ढे में घुसी, बाल-बाल बचे।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआइ) की कार्यदायी संस्था लखनऊ कानपुर एक्सप्रेस वे के निर्माणाधीन रूट पर लगातार लापरवाही कर रही है। पिछले डेढ़ साल में आधा दर्जन से अधिक घटनाएं हो चुकी हैं। कभी गर्डर से कोई सामान कार पर गिर रहा है तो कभी भारी गर्डर कार पर गिर रहा है। कई लोग पीएनसी कंपनी की लापरवाही से घायल तक हो चुके हैं।

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    इसके बाद भी एनएचएआइ अपनी कार्यदायी संस्था के कार्यों में सुधार नहीं कर पा रही है। बुधवार देर रात 12 बजे के आसपास कानपुर से बंथरा पहुंच चुके भऊ सिंह की कार गड्ढ़े में उस वक्त चली गई, जब वह अपने घर पहुंचने वाले थे।

    पीछे से आ रहे ट्रैफिक सब इंस्पेक्टर देश दीपक की सजगता मनोज व भऊ की जान बचा सकी। देश दीपक ने गड्ढे में घुसी कार को न सिर्फ निकलवाया, दोनों लोगों को कार से निकालने में मदद भी की। वहीं एनएचएआइ के अधिकारी इस संबंध में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस संबंध में जब एनएचएआइ के परियोजना निदेशक कर्नल शरद चंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।

    टीएसएआई देश दीपक ने बताया कि वह ड्यूटी पर थे। तभी छह सीटर कार यूपी 32 इपी 5288 अचानक सड़क से लगे हुए गड्ढे में घुस गई। यहां कार्यदायी संस्था द्वारा न तो गड्ढे को पाटा गया था और न ही कोई मार्ग प्रकाश की व्यवस्था थी। इसकी शिकायत भी स्थानीय लोगों द्वारा पीएनसी कंपनी से की जा चुकी थी, इसके बाद भी काेई सुधार नहीं हुआ।

    यही नहीं एनएचएआइ के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा भी निर्माणाधीन एक्सप्रेस वे के ऐसे जान लेवा गड्ढों को बंद कराने के लिए दिए गए निर्देश कार्यदायी संस्था पर असर नहीं कर रहे हैं, जो राहगीरों के लिए दुर्घटना का कारण बन रहे हैं। बता दें कि अभी कम से कम 31 जुलाई 2025 तक कम होना है। अगर कार्यदायी संस्था अभी भी जाग जाए तो दुर्घटनओं पर अंकुश लगाया जा सकता है।