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    गदर : एक प्रेम कथा दो की शूटिंग पूरी, निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा कि लखनऊ का कोई विकल्‍प ही नहीं

    By Vrinda SrivastavaEdited By:
    Updated: Sat, 23 Apr 2022 09:30 AM (IST)

    लखनऊ में गदर एक प्रेम कथा के सीक्वल की शूटिंग लखनऊ में पूरी हो गई। अब इंदौर में गदर दो की शूटिंग की जाएगी। करीब 55 दिन लखनऊ में शूटिंग चली है। निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा कि लखनऊ के प्यार ने ही शूटिंग आसान की।

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    फिल्म गदर-2 के निर्देशक अनिल शर्मा से खास बातचीत।

    लखनऊ, जागरण संवाददाता। करीब 22 साल बाद फिल्म गदर : एक प्रेम कथा के सीक्वल की लखनऊ में शूटिंग पूरी हुई। एक लंबे अंतराल के बावजूद फिल्म को लेकर लखनऊ वालों का लगाव कुछ कम नहीं हुआ। निर्देशक अनिल शर्मा ने कहा कि लखनऊ के प्यार ने ही शूटिंग आसान की। लखनऊ के बाद अब इंदौर में गदर दो की शूटिंग के लिए जाने से पहले निर्देशक अनिल शर्मा से दुर्गा शर्मा की विस्तृत बातचीत के कुछ अंश-

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    प्रश्न : गदर दो में कितना लखनऊ नजर आएगा?

    उत्तर : करीब 55 दिन हमने लखनऊ में शूटिंग की है। शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में भी शूट हुआ है। लखनऊ के 100 से ज्यादा कलाकार इसका हिस्सा हैं। 60 से अधिक तो सिर्फ कथक कलाकार ही लिए हैं। लखनऊ की इमारतें, संगीत, खान-पान समेत बहुत कुछ फिल्म में देखने को मिलेगा।

    प्रश्न : उत्तर प्रदेश में शूटिंग सुविधाओं पर क्या कहेंगे?

    उत्तर : उत्तर प्रदेश में सिनेमा को लेकर बहुत प्रोत्साहन है। उत्तर प्रदेश में शूटिंग सुविधाओं में इतनी तरक्की हुई है कि लगता है मुंबई में ही शूट हो रहा है।

    प्रश्न : शूटिंग के दौरान लखनऊ वालों का सहयोग कैसा रहा?

    उत्तर : प्रशासन और फिल्म बंधु के साथ ही लोगों का भी खूब सहयोग मिला। हमने शूटिंग के लिए छोटा इमामबाड़ा और घंटाघर समेत कई जगहों को पूरे दिन ब्लाक किया, मंदिरों से लेकर मस्जिदों के पास भी फिल्मांकन किया, कहीं कोई विवाद नहीं हुआ। लखनऊ में शूटिंग का हमेशा एक आनंददायी अनुभव रहा है।

    प्रश्न : क्या लखनऊ के बिना गदर-2 पूरी होती?

    उत्तर : लखनऊ के बिना गदर-2 संभव नहीं होती। हमने सोचा भी कि लखनऊ में बहुत शूट कर लिया, अब कोई नई जगह जाया जाए। राजस्थान का नाम भी दिमाग में आ रहा था कि वहां अच्छे लोकेशन मिलेंगे, पर अंत में  समझ आया कि लखनऊ का कोई विकल्प नहीं। गदर की कहानी लखनऊ को पुकारती है। हम जब लखनऊ आए तो लगा लोग जैसे गदर का इंतजार ही कर रहे थे।

    प्रश्न : अब सिनेमा में क्या बदलाव देखते हैं?

    उत्तर : आज सिनेमा चार हिस्सों में बंटा है। पहला- शार्ट फिल्म, जो सीमित संसाधनों में तैयार हो रही। दो से 25 मिनट और आधे घंटे की यह शार्ट फिल्में आस्कर तक भी पहुंच रहीं। दूसरा सिनेमा, जो टीवी के लिए बन रहा, इसके दर्शक अलग हैं। तीसरा ओटीटी है, जहां हम थोड़ा वास्तविकता की ओर जाना चाहते हैं। चौथा है- थियेटर, यह सपनों की दुनिया है। यहां लोगों को 20-20 क्रिकेट मैच की तरह रोमांच चाहिए, दर्शकों को चौके छक्के चाहिए। यही कारण है कि साउथ की फिल्में इतनी हिट हो रहीं, क्योंकि दर्शकों को वह सिनेमा मिल रहा, जिसे वह देखना चाह रहे। सिनेमा फंतासी जोन है, यह वास्तविकता के जाेन से बाहर निकल रहा।