राहुल गांधी मानहानि केस में लखनऊ कोर्ट का अहम फैसला, याचिकाकर्ता की मांग ठुकराई
लखनऊ की एक अदालत ने राहुल गांधी और पांच अन्य के खिलाफ मानहानि मामले में वादी नृपेंद्र पांडे की अभियोजन स्वीकृति संबंधी अर्जी खारिज कर दी।
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पांडे ने सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, के सी वेणु गोपालन, प्रियंका वाड्रा और जयराम रमेश के खिलाफ नौ सितंबर 2025 को वाद दाखिल किया था।
HighLights
राहुल गांधी मानहानि मामले में अर्जी खारिज।
अभियोजन स्वीकृति वादी का दायित्व, कोर्ट का मत।
लखनऊ अदालत ने याचिकाकर्ता की मांग ठुकराई।
विधि संवाददाता, लखनऊ। एमपी/एमएलए मामलों के विशेष मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा ने राहुल गांधी और पांच अन्य के खिलाफ चल रहे मानहानि के मुकदमे में वादी की अर्जी खारिज कर दी। वादी अधिवक्ता नृपेंद्र पांडे ने अदालत से सक्षम अधिकारी को अभियोजन स्वीकृति के लिए निर्देश देने की मांग की थी।
पांडे ने सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सोनिया गांधी, के सी वेणु गोपालन, प्रियंका वाड्रा और जयराम रमेश के खिलाफ नौ सितंबर 2025 को वाद दाखिल किया था। अदालत में वादी और उनके गवाह अभिषेक मिश्रा तथा अंकित मिश्रा के बयान दर्ज हुए थे। प्रस्तावित आरोपियों के अधिवक्ता प्रांशु अग्रवाल ने आपत्ति जताते हुए कहा था कि अभियोजन स्वीकृति के बिना मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। उन्होंने इसी स्तर पर वाद खारिज करने की मांग की थी। इसके बाद वादी ने दोबारा अर्जी देकर अनुरोध किया कि सक्षम अधिकारी को आरोपियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति देने और अदालत को सूचित करने का निर्देश दिया जाए।
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अदालत ने कहा कि यदि परिवादी को लगता है कि विपक्षी पक्ष के खिलाफ वाद चलाने के लिए सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति जरूरी है, तो स्वीकृति पाने के लिए आवेदन करना उसी का दायित्व है। अदालत ने 5 सितंबर 2026 की अर्जी खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन स्वीकृति मांगने के लिए इस तरह का आदेश देने का अधिकार केवल संवैधानिक न्यायालयों को है।
ऐसा आदेश एक पक्ष को लाभ पहुंचाएगा। वादी की यह मांग भी खारिज कर दी गई कि अदालत पहले तय करे कि प्रस्तावित अभियुक्तों के खिलाफ सम्मन जारी करने का मामला बनता है या नहीं। अदालत ने कहा कि इस पर निर्णय सम्मन या तलबी आदेश पारित करते समय ही किया जा सकता है। मामले में अगली सुनवाई 30 नवंबर को होगी।
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