लखनऊ, जेएनएन। उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की मतगणना रविवार को सुबह शुरू होने के बाद से जारी है। कोविड प्रोटोकॉल के तहत इस बार शारीरिक दूरी का पालन तथा मतगणना केंद्र में कम कर्मियों की मौजूदगी के कारण काफी विलंब हो रहा है। सोमवार शाम तक 38,317 ग्राम प्रधान, 23,2612 ग्राम पंचायत सदस्य तथा 55,926 क्षेत्र पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। साथ ही 181 जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित हुए हैं। मतगणना मंगलवार तक जारी रहने की संभावना है।

त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में रविवार से शुरू हुई मतों की गिनती में सोमवार देर शाम तक जारी रही। प्रदेश के 829 केंद्रों पर मतगणना हो रही है। जिला पंचायत सदस्य के 3050 पदों के लिए 44307 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनके साथ ही क्षेत्र पंचायत सदस्य के 75,852 पदों पर 3,42,439 प्रत्याशी मैदान में हैं। प्रधान के 58,176 पदों के लिए 4,64,717 तथा ग्राम पंचायत सदस्य के 7,32,485 पदों के लिए 4,38,277 उम्मीदवार चुनाव में हैं। चुनाव में सात जिला पंचायत सदस्य, 2005 क्षेत्र पंचायत सदस्य, 178 ग्राम प्रधान व 3,17,127 ग्राम पंचायत सदस्य निर्विरोध निर्वाचित पहले ही हो चुके हैं।

प्रयागराज में मतगणना के दौरान बवाल, तोड़फोड़-पथराव और फायरिंग : प्रयागराज में पंचायत चुनाव के लिए रविवार से चल रही मतगणना के दौरान सोमवार को हंडिया में मामला बिगड़ गया। धांधली को लेकर दो पक्ष भिड़ गए। बवाल शुरू कर दिया। लोगोंं ने पहले एक दूसरे पर और फिर पुलिस टीम पर पथराव करने लगे। पुलिस वालों की गाड़ियों में तोड़फोड़ शुरू कर दी। पुलिस ने मौके पर मौजूद एसडीएम के आदेश पर फायरिंग की। हालांकि इसके बाद भी बवाल शांत नहीं हुआ तो आला अधिकारियों के साथ ही बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स मौके पर रवाना की गई है। जिला पंचायत के पांच नंबर वार्ड की प्रत्याशी अंजलि यादव के समर्थकों ने परिणाम आने से पूर्व ही धांधली करने का आरोप लगाते हुए बवाल शुरू कर दिया था। आरोप लगाया कि पूर्व मंत्री राकेश धर त्रिपाठी के भतीजे बुलबुल की पत्नी नंदनी को जिताने की साजिश रची जा रही है। आसेपुर और जमदेशपुर गांव के लोग सड़क पर आ गए। शाम साढ़े छह बजे लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। प्रयागराज वाराणसी मार्ग पर गाड़ियों में तोड़फोड़ की जाने लगी। पुलिस ने हवाई फायरिंग करके स्थिति को कंट्रोल करने की कोशिश की। पुलिस अफसर स्थिति को नियंत्रित करने में लगे हैं।

पूर्व एमएलसी की पत्नी शकुन सिंह 27 सौ मतों से विजयी : उन्नाव में 51 जिला पंचायत सीट के परिणाम घोषित हो गए हैं। यहां भाजपा समर्थित 9 प्रत्याशी जीते, जबकि सपा समर्थित 16 की जीती हुई है। निर्दलीय 10 जीते है। उन्नाव में जिला पंचायत सदस्य के प्रतिष्ठापूर्ण चुनाव में जिले की चर्चित सीटों में एक फतेहपुर चौरासी तृतीय का चुनाव परिणाम आ गया। इसमें पूर्व एमएलसी स्व. अजीत सिंह की पत्नी शकुन सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी पुष्पा वर्मा को करीब 27 सौ मतों से हरा दिया है। यह सीट इसलिए भी काफी चर्चा में थी क्योंकि भाजपा ने पहले यहां से सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की पत्नी निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर को उम्मीदवार घोषित किया था। बाद में उनका टिकट पार्टी प्रदेश अध्यक्ष ने रद कर दिया था। इसके बाद ही पूर्व एमएलसी की पत्नी ने नामांकन कराया, जिन्हें नाम वापसी के दिन पार्टी ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी घोषित किया था। निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष संगीता सेंगर पार्टी के इस फैसले के बाद चुनाव से ही बाहर हो गई थी।  शकुन सिंह की जीत के साथ ही उनके जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव की दौड़ में शामिल होने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

कुलदीप सेंगर के हाथ से गया माखी, चिरप्रतिद्वंद्वी शिशुपाल का कब्जा: उन्नाव जिले में माखी दुष्कर्म कांड के कारण चर्चा में आई माखी ग्राम सभा सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के हाथ से फिसल गई। इस बार पंचायत चुनाव में उनके चिरप्रतिद्वंदी शिशुपाल सिंह ने ग्राम प्रधान की सीट पर कब्जा कर लिया है। इससे पहले उनके अनुज अतुल सिंह की पत्नी प्रधान थी। काफी समय से इस सीट पर उनके परिवार का ही कब्जा रहा है। इस बार उनके परिवार से कोई भी चुनाव मैदान में नहीं था। कुलदीप के चिरप्रतिद्वंदी शिशुपाल सिंह ने अपने निकटतम प्रतिद्वंदी राम मिलन यादव को 2213 मतों से हरा दिया। 2015 के पंचायत चुनाव में भी कुलदीप के अनुज अतुल सिंह की पत्नी अर्चना सिंह ने शिशुपाल की पुत्रवधू को चुनाव हराकर प्रधान बनी थी। उससे पहले उनकी मां चुन्नी देवी प्रधान रही। इस बार यहां के चुनाव में दुष्कर्म मामले में सजायाफ्ता पूर्व विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के परिवार से कोई भी नहीं था। यह माना जाता था कि माखी गांव कुलदीप सिंह सेंगर का गढ़ है। ऐसे में उस सीट से उनके चिरप्रतिद्वंदी का निर्वाचित होना नई चर्चा शुरू कर गया है। 

रामपुर में लाल जोड़े में ही जीत का सर्टिफिकेट लेने पहुंची नवविवाहिता: रजा लाइब्रेरी के लिए विख्यात रामपुर में उस समय हलचल मच गई जब लाल जोड़े में एक दुल्हन मतगणना स्थल पर पहुंच गई। ग्राम पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने की सूचना पर वह विवाह के मंडप से सीधा मतगणना स्थल पहुंची। लाल जोड़े में  आभूषणों से सजी-धजी दुल्हन मतगणना केंद्र पर पहुंच गई जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया लेकिन जब वहां पर लोगों को यह पता चला कि दुल्हन बीडीसी सदस्य के लिए चुनाव में खड़ी हुई थी और उसकी जीत हुई तब हर कोई उसकी किस्मत की दाद देने लगा। रामपुर के मिलक में पूनम की शादी की रस्में चल रही थी, इसी बीच चुनाव में जीत की खबर भी आ गई तो अपने को रोक न सकी और मतगणना स्थल पहुंच गई। 

इसके बाद अपनी जीत का सॢटफिकेट लेकर ही लौटी। रामपुर के मिलक तहसील के गांव मोहम्मदपुर जदीद की पूनम पुत्री गंगासरन की शादी ग्राम बफरी थाना शाही, बरेली से थी। पूनम ने पंचायत चुनाव में बीडीसी पद पर मैदान में थी। उनको 601 मत मिले। उन्होंने प्रतिद्वंद्वी शंकुन्तला को 31 मत से पराजित किया। 

हाथरस में देवरानी पर भारी पड़ गई जेठानी, सीमा उपाध्याय ने दर्ज की जीत: हाथरस में पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय ने अपना जलवा बिखेरा है। जिला पंचायत सदस्य पद के लिए मतदान में बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे रामवीर उपाध्याय की पत्नी सीमा उपाध्याय ने अपनी सगी देवरानी और भाजपा समर्थित ऋतु उपाध्याय को वार्ड नम्बर 12 से पराजित किया। यहां पर सीमा उपाध्याय को 12022 वोट मिले तो दूसरे नम्बर पर निर्दलीय प्रत्याशी क्षमा शर्मा 5394 वोट मिले। बसपा प्रत्याशी मधु चौधरी 4532 वोट के साथ तीसरे और भाजपा समर्थित ऋतु उपाध्याय 2309 मत के साथ चौथे स्थान पर रहीं। हाथरस में रामवीर के छोटे भाई पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय और उनकी पत्नी चुनाव हार गईं हैं।

वार्ड नंबर 14 पर पूर्व भाजपा नेता डॉ. अविन शर्मा अपनी पत्नी क्षमा शर्मा को चुनाव लड़ाना चाहते थे। उनकी टिकट पक्की मानी जा रही थी, लेकिन रामवीर के छोटे भाई पूर्व एमएलसी मुकुल उपाध्याय ने ऐन वक्त पर एंट्री मारकर उनके अरमानों पर पानी फेर दिया और अपनी पत्नी ऋतु उपाध्याय को टिकट दिलाने में कामयाब रहे। उधर पूर्व मंत्री रामवीर उपाध्याय चौथे नंबर के भाई रामेश्वर उपाध्याय की पत्नी कल्पना उपाध्याय को यहां प्रत्याशी बनाना चाहते थे, लेकिन मुकुल के पैतरे ने उनकी रणनीति को झटका दे दिया।

उधर डॉ. अविन शर्मा ने अपनी पत्नी को निर्दलीय इसी वार्ड से मैदान में उतार दिया। रामवीर ने भी अपनी पत्नी फतेहपुर सीकरी की पूर्व सांसद सीमा उपाध्याय को वार्ड 14 से निर्दलीय लड़ाने का ऐलान कर दिया। इसके बाद से देवरानी-जेठानी के बीच मुकाबले पर सभी की निगाहें बनी रहीं। 

विनोद और सरोज चुनाव हारे: रामवीर उपाध्याय के छोटे भाई निवर्तमान जिला पंचायत अध्यक्ष विनोद उपाध्याय वार्ड 16 से चुनाव लड़े थे। वहीं उनकी पत्नी सरोज उपाध्याय चुनाव वार्ड 20 से मैदान में थीं। दोनों ही प्रत्याशियों को हार का मुंह देखना पड़ा है। रामवीर परिवार से इस बार केवल सीमा उपाध्याय जीत हासिल कर सकीं।

मैनपुरी में सपा विधायक राजकुमार यादव की पत्नी को बागी ने हराया: मैनपुरी में समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव के बेहद करीबी सदर विधायक राजकुमार यादव राजू की पत्नी वंदना यादव जिला पंचायत सदस्य पद के लिए चुनाव हार गई हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य वंदना यादव वार्ड 28 से समाजवादी पार्टी से समर्थित प्रत्याशी थीं। उनको समाजवादी पार्टी के बागी प्रत्याशी जर्मन यादव ने पराजित किया है। सदर विधायक राजकुमार यादव राजू यादव ने इस चुनाव में काफी मेहनत की थी और वह पत्नी का नामांकन कराने के बाद से ही लगातार सक्रिय थे। इससे पहले मैनपुरी से समाजवादी पार्टी के विधायक राजकुमार यादव पर सपा की महिला मोर्चा की क्षेत्रीय मंत्री सीमा चौहान ने छेडख़ानी, गाली- गलौज और धमकी देने जैसे कई गंभीर आरोप लगाने के बाद सीमा चौहान ने विधायक राजकुमार यादव के खिलाफ थाने में शिकायत भी दी थी। राजू यादव ने मीडिया से कहा कि यह सस्ती लोकप्रियता पाने का तरीका है।

 

उन्नाव में मत कम निकलने पर प्रत्याशियों का हंगामा: उन्नाव के अचलगंज के मतगणना केंद्र में मत पत्र की गिनती के दौरान सिंकदरपुर कर्ण की बंथर ग्राम पंचायत में प्रधान प्रत्याशी के 104 मत कम निकले। इस पर प्रत्याशियों ने हंगामा शुरू कर दिया। सूचना पर एडीओ पंचायत शैलेन्द्र त्रिपाठी, नयाब तहसीलदार रजनीश बाजपेयी ने मौके पर पहुंचकर जांच करने की बात कही। अवधेश तिवारी निवासी बंथर ने बताया कि बंथर के वार्ड 2 में 244 में से 140 मत पड़े थे। बॉक्स खुलने के बाद उसमें 104 मत निकलने से प्रत्याशियों ने हंगामा शुरू कर दिया। बंथर में प्रधान पद के 6 प्रत्याशी ने अपना नामांकन कराया था।

मैनपुरी में भाजपा को झटका, चुनाव हारी संध्या यादव : मैनपुरी में भाजपा के टिकट पर मैदान में उतरीं सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव की भतीजी संध्या यादव जिला पंचायत सदस्य का चुनाव हार गई हैं। वह सैफई के परिवार से विद्रोह कर भाजपा में शामिल हुई थीं। संध्या यादव बदायूं से समाजवादी पार्टी के सांसद रहे सांसद धर्मेंद्र यादव की बहन हैं। भाजपा ने सैफई परिवार में सियासी सेंध लगाने में तो सफलता प्राप्त कर ली, लेकिन उनकी प्रत्याशी चुनावी मैदान में टिक नहीं सकीं। संध्या यादव ने भाजपा समर्थित प्रत्याशी के तौर पर मैनपुरी जिला पंचायत के वार्ड 18 से चुनाव लड़ा था। सपा ने भी उनके सामने अपना प्रत्याशी मैदान में उतारा था। सपा के इस दांव ने भाजपा की रणनीति को ढेर कर दिया।

सपा प्रत्याशी प्रमोद कुमार ने संध्या यादव को 1907 वोटों के अंतर से पराजित किया है। जिला पंचायत चुनाव में संध्या यादव के चुनाव पर सबकी निगाह थी। बीते लोकसभा चुनाव से पहले संध्या यादव के पति अनुजेश यादव ने भाजपा का दामन थाम लिया था। परंतु मुलायम की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की सगी बहन संध्या यादव ने पिछले दिनों तक कभी खुद भाजपा में जाने की पुष्टि नहीं की थी। जिला पंचायत चुनाव से पहले भाजपा ने उनको वार्ड 18 से समर्थित प्रत्याशी घोषित कर सबको चौंका दिया था। संध्या यादव पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में चुनाव जीतने की सूरत में उनको भाजपा में जिला पंचायत अध्यक्ष पद का भी मजबूत दावेदार माना जा रहा  था। परंतु सपा ने इस बगावत का जवाब देने के लिए पूरी ताकत झोंकी। सपा ने संध्या यादव के सामने प्रमोद कुमार को मैदान में उतारा था। प्रमाेद यादव ने क्षेत्र में सपा की प्रतिष्ठा की दुहाई दे प्रचार किया था। जिसके बाद लोगों का समर्थन उनको हासिल हुआ। रविवार रात को मतगणना हुई तो प्रमोद यादव को 7905 वोट हासिल हुए। जबकि संध्या यादव 5998 वोट प्राप्त कर दूसरे स्थान तक ही पहुंच सकीं। मैनपुरी में जिला पंचायत के चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपना परचम लहराया है। मैनपुरी की 30 जिला पंचायत सदस्य की सीट में समाजवादी पार्टी पांच जीत चुकी है, जबकि 11 पर आगे चल रही है। भाजपा ने यहां पर दो सीट जीती है और चार पर आगे है। बसपा का खता भी नहीं खुला है। 

जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में भाजपा को बढ़त: जिला पंचायत सदस्य की 3050 सीटों पर मतगणना जारी है। इसमें भाजपा को काफी बढ़त मिली है। भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी 172, समाजवादी पार्टी के 139, बहुजन समाज पार्टी व कांग्रेस के 40-40 और निर्दलीय प्रत्याशी 87 सीटों पर आगे चल रहे हैं।

डकैत राधे उर्फ सूबेदार सिंह का बेटा अरिमर्दन सिंह बना प्रधान: चित्रकूट तथा पास के क्षेत्र में पहले मतदान नहीं होता था और बाहुबली के फरमान पर ही प्रधान तय होते थे। इस बार ऐसा नहीं है। इस बार सभी पद के लिए मतदान हुआ है। चित्रकूट में डकैत शिवकुमार पटेल उर्फ ददुआ के दाहिने हाथ रहे और वर्तमान में जेल में बंद डकैत राधे उर्फ सूबेदार सिंह के बेटे अरिमर्दन सिंह ने शीतलपुर तरौंहा ग्राम पंचायत में प्रधान पद का चुनाव जीत लिया। प्रतिद्वंद्वी अरविंद  सिंह को 22 मतों से हराया।

उसे 192 वोट मिले, जबकि अरविंद ने 170 वोट पाए। मानिकपुर और मऊ तहसील क्षेत्र की करीब 110 पंचायतों में चुनाव अबकी बार डकैतों से मुक्त हो गया है। यहां लोकतंत्र की जीत हुई। पहली बार डकैतों के फरमान के बिना जनता ने अपने जनप्रतिनिधियों को चुना।  

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में चार चरण में 14, 19, 26 व 29 अप्रैल को मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश में कल से इनकी मतगणना जारी है। जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य, ग्राम प्रधान तथा ग्राम पंचायत सदस्य के पद के लिए हुए चुनाव में मतपत्रों से पोलिंग हुई है। इन चुनावों के नतीजे आ रहे हैं और पूरे नतीजे आने में आज यानी सोमवार का पूरा समय लग सकता है। पंचायत चुनाव में जिला पंचायत सदस्य के साथ ही अन्य पदों पर भाजपा, सपा, कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन जैसी राजनीतिक पार्टियों ने भी अपने प्रत्याशी उतारे हैं। इन पार्टियों के उम्मीदवार पार्टी के चुनाव निशान पर नहीं, बल्कि आयोग से मिले चुनाव चिह्नों पर मैदान में उतरे है। प्रदेश में 58,194 ग्राम प्रधान, 7,31,813 ग्राम पंचायत सदस्य, 75,808 क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा 3050 जिला पंचायत सदस्य चुने जा रहे हैं। 

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