KGMU में धर्मांतरण के नेटवर्क पर एसटीएफ की रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम, शासन ने दिए लीगल एक्शन के आदेश
एसटीएफ की रिपोर्ट में केजीएमयू, लखनऊ में धर्मांतरण और महिला डॉक्टरों-कर्मियों के उत्पीड़न के गंभीर आरोपों का खुलासा हुआ है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।
HighLights
केजीएमयू में धर्मांतरण और उत्पीड़न के गंभीर आरोप।
एसटीएफ रिपोर्ट में कई डॉक्टरों, विभागों का जिक्र।
शासन ने चिह्नित कर्मियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू), लखनऊ में धर्मांतरण और महिला डाक्टरों व कर्मचारियों के उत्पीड़न को लेकर विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच रिपोर्ट में कई गंभीर आरोपों का उल्लेख किया है।
रिपोर्ट में पैथोलाजी, गांधी वार्ड, माइक्रोबायोलाजी और रेडियोलाजी विभागों के प्रकरणों के साथ कई डाक्टरों और कर्मचारियों के बीच नेटवर्क, शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने तथा आरोपितों को संरक्षण दिए जाने की आशंकाएं भी दर्ज हैं। रिपोर्ट में इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ संदर्भ और इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह का भी उल्लेख किया गया है। यही नहीं डा. जाकिर नाईक की विचाराधार के कारण डा. नसीम पर देखने को मिला है।
एसटीएफ की रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा अनुभाग-दो के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने इसी वर्ष 30 अक्टूबर को केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजकर चिह्नित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी आख्या शासन को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। शासन ने केजीएमयू अधिनियम, 2002 और परिनियमावली, 2011 के तहत आवश्यक कार्रवाई करने को कहा है।
आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई रोकने की हुई कोशिश
एसटीएफ की रिपोर्ट में कुछ महिला रेजिडेंट डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों को कथित रूप से प्रेमजाल में फंसाकर धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने, निकाह का दबाव बनाने और विरोध करने पर करियर प्रभावित करने की धमकी देने के आरोप सामने आए। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि कुछ मामलों में शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई रोकने की कोशिश हुई।
रिपोर्ट में पैथोलॉजी विभाग के रेजिडेंट डाक्टर डा. रमीज से जुड़े मामले का उल्लेख है। महिला रेजिडेंट डाक्टर डा. देवव्रती मिश्रा की शिकायत के आधार पर 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज किए जाने की बात कही गई है। रिपोर्ट में डा. रमीज पर महिला डाक्टर को कथित रूप से प्रेमजाल में फंसाने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप दर्ज हैं। दस्तावेज के अनुसार इसी वर्ष नौ जनवरी को उनकी गिरफ्तारी हुई थी। इस मामले में विवेचना का भी उल्लेख है।
रिपोर्ट में पैथोलाजी विभाग के रेजिडेंट डाक्टर ड. आदिल से जुड़े एक अन्य मामले का भी जिक्र है। इसमें महिला कर्मचारी की शिकायत पर 29 दिसंबर 2025 को मुकदमा दर्ज किए जाने का उल्लेख है। दोनों मामलों को रिपोर्ट में जांच के अधीन बताया गया है।
गांधी वार्ड के संबंध में रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ नफीस और पुरकान तथा रेजिडेंट डाक्टर आदिल से जुड़े आरोपों का उल्लेख है। महिला नर्सिंग कर्मियों को कथित रूप से प्रभावित करने, उत्पीड़न करने और धर्म परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की शिकायतों का भी जिक्र है।
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माइक्रोबायोलाजी विभाग में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटर ज्योति राव की शिकायत को रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इसमें वरिष्ठ कर्मचारी शाकत अली पर उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने तथा शिकायत के बाद समिति गठित होने का उल्लेख है। रिपोर्ट में आरोप है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
एसटीएफ की रिपोर्ट में डा. वाहिद अली समेत कुछ अन्य चिकित्सकों और कर्मचारियों के संपर्कों का भी उल्लेख है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि कुछ लोग महिला डाक्टरों और कर्मचारियों को प्रभावित करने तथा कथित धर्मांतरण के प्रयासों में सहयोग करते थे। हालांकि, प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और आरोपों की सत्यता अलग-अलग जांच का विषय है।
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रिपोर्ट में इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह और उससे संबंधित सामग्री का उल्लेख करते हुए कुछ डाक्टरों के बीच संपर्कों की भी चर्चा की गई है। इसके अलावा इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़े डा. नसीम खान के संदर्भ में भी कुछ आरोप दर्ज हैं। इन उल्लेखों के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध दोष सिद्ध नहीं माना जा सकता।
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