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वोटर लिस्ट में गड़बड़ी या देरी होने पर अब DEO पर गिरेगी गाज, DM की भी जवाबदेही होगी तय

Published: Sat, 31 Oct 2026 12:45 AM (IST)

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची में गड़बड़ी या आवेदनों के निस्तारण में देरी के लिए जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को जवाबदेह ठहराया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. मतदाता सूची की अंतिम जिम्मेदारी अब डीईओ की।

  2. ईसीआई नेट पर दैनिक समीक्षा और आवेदन निस्तारण अनिवार्य।

  3. बीएलओ को 48 घंटे में नागरिकों से संपर्क करना होगा।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। मतदाता सूची में गड़बड़ी, आवेदनों के निस्तारण में देरी या शिकायतों के समाधान में लापरवाही अब जिला निर्वाचन अधिकारियों (डीईओ) को भी भारी पड़ सकती है। मतदाता सूची दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी अब केवल निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और अधीनस्थ कर्मचारियों के भरोसे नहीं छोड़ी जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया है कि इसकी अंतिम जिम्मेदारी जिला निर्वाचन अधिकारी की होगी। लापरवाही या अनावश्यक विलंब मिलने पर उनकी जवाबदेही तय कर कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने शुक्रवार को सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों को ईसीआई नेट पर प्रतिदिन अपना लागिन करके मतदाता सूची से जुड़े कार्यों की समीक्षा करने के निर्देश दिए। कहा कि फार्म-6, 6ए, 7 और फार्म-8 के आवेदन अनावश्यक रूप से लंबित न रहें और उनका समयबद्ध निस्तारण हो। किसी आवेदन के ईआरओ, एईआरओ या अन्य स्तर पर अटके रहने पर तत्काल कारण पता कर कार्रवाई करनी होगी।

करनी होगी प्रोफाइल की भी जांच 

अधिकारियों को अपनी आइडी, पासर्वर्ड और ओटीपी किसी दूसरे व्यक्ति से साझा नहीं करने की हिदायत भी दी गई है। दूसरे जिले से संबंधित आवेदन तत्काल वहां के डीएम को भेजने के निर्देश भी दिए हैं।निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची को शुद्ध, त्रुटिरहित बनाए रखने के लिए निगरानी व्यवस्था सख्त किया है। डीईओ को अपने अधीनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों के ईसीआई नेट प्रोफाइल की भी जांच करनी होगी।

इसमें नाम, मोबाइल नंबर, पदनाम और फोटो की शुद्धता के साथ उनके अंतिम लागिन की स्थिति भी रोज देखनी होगी। मतदाता सूची और मतदाता फोटो पहचान पत्र (ईपीआइसी) से जुड़ी शिकायतों के निस्तारण में भी अब केवल औपचारिकता नहीं चलेगी। राष्ट्रीय शिकायत सेवा पोर्टल (एनजीएसपी) समेत अन्य माध्यमों से मिली शिकायतों की डीएम को रोज समीक्षा करनी होगी।

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शिकायतों के जवाब की गुणवत्ता परखने के लिए वे स्वयं या किसी वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से नियमित सैंपल परीक्षण भी कराएंगे। हर लंबित शिकायत के पीछे की वजह की पड़ताल कर संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय की जाएगी। इसके लिए साप्ताहिक समीक्षा बैठकें भी अनिवार्य की गई हैं।

बीएलओ को 48 घंटे में करना होगा संपर्क

मतदाताओं की सुविधा के लिए ईसीआइ नेट एप और नागरिक सेवा पोर्टल पर उपलब्ध 'बुक ए काल विद बीएलओ' सुविधा को लेकर भी सख्ती की गई है। इसके तहत नागरिकों की कोई भी काल रिक्वेस्ट 48 घंटे से अधिक लंबित नहीं रहनी चाहिए। यदि बीएलओ बिना संपर्क किए ही काल रिक्वेस्ट पर 'संपर्क किया गया' या 'संपर्क नहीं हो पा रहा' विकल्प चुनता है तो उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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