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आगरा से लखनऊ तक… रमीज की शिकार हुईं 20 से अधिक युवतियां, जाल में केवल हिंदुओं को फंसाया

Published: Sat, 31 Oct 2026 07:34 PM (IST)

केजीएमयू मतांतरण मामले में गिरफ्तार डॉ. रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज ने आगरा से लखनऊ तक 20 से अधिक हिंदू युवतियों को अपने जाल में फंसाया था।

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HighLights

  1. रमीज ने 20 से अधिक हिंदू युवतियों को फंसाया।

  2. आगरा से लखनऊ तक फैला था रमीज का जाल।

  3. एसटीएफ कर रही है रमीज के नेटवर्क की जांच।

जागरण संवाददाता, लखनऊ। केजीएमयू में सामने आए मतांतरण और महिला डाक्टरों के उत्पीड़न के मामले में गिरफ्तार रेजिडेंट डाक्टर रमीजुद्दीन नायक उर्फ रमीज को लेकर जांच में एक और गंभीर पहलू सामने आया है।

रमीजुद्दीन ने आगरा से लेकर लखनऊ तक उसके संपर्क में रही 20 से अधिक युवतियों के अपने जाल में फंसाया। जहां भी रहा, वहां उसने हिंदू युवतियों को निशाना बनाया। इनमें छात्राओं के साथ मेडिकल क्षेत्र से जुड़ी युवतियां भी शामिल होने की बात सामने आई है।

आगरा के बाद लखनऊ तक बढ़ाया दायरा

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, रमीज की गतिविधियां सिर्फ केजीएमयू तक सीमित नहीं थीं। आगरा में पढ़ाई और वहां रहने के दौरान भी उसके संपर्क में कई युवतियां आई थीं। इसके बाद लखनऊ आने पर भी उसने अपने संपर्कों का दायरा बढ़ाया।

एसटीएफ अब उसके पुराने ठिकानों, शैक्षणिक संस्थानों और पेशेवर संपर्कों के आधार पर उन युवतियों की पहचान कर रही है, जो अलग-अलग समय पर उसके संपर्क में रही थीं। एसटीएफ ने कुछ युवतियों से संपर्क भी किया है, लेकिन उन्होंने फिलहाल बयान देने से इनकार कर दिया है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इसके पीछे सामाजिक दबाव, बदनामी का डर या अन्य कोई वजह तो नहीं है। सूत्रों के अनुसार, रमीज से भी इस संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन उसने युवतियों से जुड़े सवालों पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। अब उसके मोबाइल, डिजिटल संपर्कों, पुराने रिकार्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने की तैयारी है।

हर युवती से जुड़े संपर्कों की अलग जांच

एसटीएफ यह भी पता लगा रही है कि युवतियों से संपर्क बनाने के लिए रमीज किन तरीकों का इस्तेमाल करता था। क्या पहले दोस्ती और शादी का भरोसा दिलाया जाता था या फिर पेशेवर संबंधों के जरिये नजदीकियां बढ़ाई जाती थीं।

जांच में सामने आने वाले प्रत्येक मामले में संपर्क की अवधि, बातचीत, कथित उत्पीड़न और मतांतरण के दबाव से जुड़े साक्ष्यों को अलग-अलग संकलित किया जाएगा। इसके आधार पर पीड़िताओं के बयान और डिजिटल साक्ष्यों का मिलान कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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