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मतांतरण कराने वाले डॉ. रमीजुद्दीन के संपर्क में था फर्जी डॉ. हस्साम, पांच सालों से KGMU में एक्टिव

Published: Thu, 23 Apr 2026 10:14 AM (IST)

लखनऊ के केजीएमयू से फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद को गिरफ्तार किया गया है, जो 2021 से सक्रिय था और मरीजों ...और पढ़ें

मतांतरण कराने वाले डॉ. रमीजुद्दीन के संपर्क में था फर्जी डॉ. हस्साम।

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जागरण संवाददाता, लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) से पकड़े गए फर्जी डॉक्टर हस्साम अहमद से पुलिस की पूछताछ में कई राजफाश हुए हैं। उसने बताया कि वह 2021 से संस्थान में सक्रिय था। वह इसी बैच का एमबीबीएस पास आउट होने का दावा करता था।

मरीजों को चिकित्सकों से ओपीडी में दिखाने के नाम पर दो हजार रुपये तक वसूल लेता था। 2023 में उसे कुछ लोगों ने पीटा था। उसके पास से पुलिस को एक मोबाइल फोन और एक आइपैड मिला है। पुलिस अब सीडीआर की मदद से जांच कर रही है।

पुलिस सूत्रों का कहना है कि केजीएमयू में दुष्कर्म, मतांतरण के प्रयास समेत अन्य आरोपों में जेल भेजे जा चुके डा. रमीजुद्दीन से भी उसने कई मुलाकातें की थीं।

आशंका है कि डा. रमीजुद्दीन के साथ हस्साम मतांतरण का बड़ा नेटवर्क खड़ा करने की फिराक में था। रमीज के जेल जाने के बाद से वह गुपचुप तरीके से अपना जाल फैला रहा था। दिल्ली में होने वाली कांफ्रेंस में वह जिन छात्राओं को साथ ले जाने वाला था, उसमें भी अधिकांश हिंदू थीं।

सिद्धार्थ नगर के मोहाना स्थित ककरावा निवासी मोहम्मद हस्साम मड़ियांव के अजीज नगर में अपनी चचेरी बहन (अप्पी) के घर में रहता था। 13 अप्रैल 2026 को उसने सर्जरी विभाग के प्रोफेसर व डीन पैरामेडिकल डा. केके सिंह के फर्जी हस्ताक्षर से एक पत्र जारी किया था, जिसमें एमबीबीएस 2023 बैच के विद्यार्थियों को 29 अप्रैल को एम्स दिल्ली में होने वाली एक कांफ्रेंस में शामिल होने का निर्देश दिया गया था।

जांच में पत्र फर्जी पाया गया तो उसकी गतिविधियों पर शक गया। इसके बाद फर्जीवाड़ा सामने आया। बुधवार को चौक पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद आरोपित को जेल भेज दिया। पूछताछ में उसने बताया कि 2021 से वह संस्थान में डॉक्टर बनकर घूमता था।

एप्रन, आला पहनकर वह संस्थान के किसी भी विभाग में पहुंचता फिर उन मरीजों को निशाना बनाता जो गंभीर होते थे। डॉक्टर को दिखाने के नाम पर वह प्रत्येक मरीज से पांच सौ से दो हजार रुपये तक वसूलता। 2023 में ऐसे ही मामले में पकड़े जाने पर केजीएमयू परिसर में उसकी पिटाई हुई थी।

उसे संस्थान से भगा दिया गया था, लेकिन केजीएमयू प्रशासन की तरफ से कोई कार्रवाई नहीं की गई थी। इसका फायदा उठाकर उसने कुछ दिनों बाद दोबारा वही काम शुरू कर दिया।

लंबे समय से संस्थान में गैर कानूनी रूप से घूमने के बावजूद उसके बारे में किसी को कुछ पता नहीं चला, इससे संस्थान की आंतरिक सुरक्षा और चौकसी पर भी सवाल उठ रहे हैं। पुलिस को उसके पास से मिले मोबाइल और आइपैड से कई जानकारियां मिली हैं।

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जांच में कई चिकित्सकों के साथ उसकी चैटिंग मिली है। हस्साम के मोबाइल नंबर की सीडीआर भी निकलवाई जा रही है। पुलिस उपायुक्त पश्चिम कमलेश दीक्षित ने बताया कि आरोपित को जेल भेजा गया है। बैरक में उसने खाना खाने से इन्कार किया।

केजीएमयू प्रशासन पर भी उठ रही उंगली

इस घटना में केजीएमयू के चिकित्सकों की भूमिका के संदिग्ध होने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। सवाल यह खड़ा हो रहा है कि 2023 में फर्जीवाड़ा में पकड़ा गया था तो केजीएमयू प्रशासन ने कोई रिपोर्ट क्यों नहीं लिखाई थी। आखिर कौन उसका संरक्षणदाता था, जो दोबारा उसके सक्रिय होने की भूमिका निभा रहा था।

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