लखनऊ, राज्य ब्यूरो। मेडिकल कालेजों व चिकित्सा संस्थानों में उल्टी गंगा बहाई जा रही है। सुपर स्पेशियलिटी कोर्स डीएम व एमसीएच की पढ़ाई के दौरान जिन सीनियर रेजीडेंट को 1.35 लाख रुपये मासिक वेतन मिल रहा था, जब वह कोर्स की पढ़ाई पूरी करके संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर बने तो उन्हें 1.20 लाख रुपये ही मासिक वेतन दिया जा रहा है।

ऐसे में मेडिकल कालेजों में सीनियर से ज्यादा जूनियर डाक्टर वेतन पा रहे हैं। उप्र असिस्टेंट प्रोफेसर एसोसिएशन ने उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात कर वेतन बढ़ाए जाने की मांग की। उप मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया कि जल्द मामले का निपटारा किया जाएगा। उप्र असिस्टेंट प्रोफसर्स एसोसिएशन के डा. महेश राज, डा. कस्तूरी व डा. आकाश माथुर के मुताबिक सुपर स्पेशियलिटी कोर्स डीएम व एमसीएच की पढ़ाई करने वाले करीब 100 डाक्टरों से बांड भरवाया जाता है कि वह पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी मेडिकल कालेज व चिकित्सा संस्थान में दो वर्ष नौकरी करेंगे।

कोर्स की पढ़ाई के दौरान जब यह सीनियर रेजीडेंट के तौर पर तैनात थे तब इन्हें 1.35 लाख रुपये वेतन मिलता था। अब कोर्स की पढ़ाई पूरी कर डीएम व एमसीएच की डिग्री हासिल करने के बाद संविदा पर असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर तैनाती मिलने पर वेतन घटकर 1.20 लाख रुपये रह गया। वहीं नियमित पद पर तैनात असिस्टेंट प्रोफेसर 2.15 लाख रुपये महीने वेतन मिलता है। ऐसे में वेतन घटाए जाने की बजाए उसे बढ़ाया जाए।

गलत ढंग से स्वास्थ्य कर्मियों का स्थानांतरण किया तो होगा आंदोलन: राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारियों ने सोमवार को महानिदेशक, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य डा. वेद ब्रत स‍िंह के साथ बैठक की। उन्होंने बड़े पैमाने पर स्वास्थ्य कर्मियों के स्थानांतरण की हो रही तैयारी का विरोध किया। प्रदेश महामंत्री अतुल मिश्रा ने कहा कि शासन की स्थानांतरण नीति में समूह ग व समूह घ के नीतिगत स्थानांतरण की कोई व्यवस्था नहीं है। सिर्फ पटल परिवर्तन व क्षेत्र परिवर्तन के ही निर्देश दिए गए हैं। अगर अन्याय हुए तो एक जुलाई से कर्मचारी आंदोलन शुरू करेंगे।

कर्मियों ने एक जुलाई से आंदोलन की दी चेतावनी: कर्मियों ने कहा कि कोविड-19 अस्पतालों में तैनात कर्मियों का स्थानांतरण न किया जाए। कोविड की ड्यूटी में लगे कर्मियों का स्थानांतरण करने से व्यवस्था बिगड़ सकती है। अब दोबारा प्रदेश में कोरोना के रोगी बढ़ रहे हैं। वहीं दिव्यांगों, ऐसे कर्मी जिनके रिटायरमेंट में दो साल का कम समय बचा है और मान्यता प्राप्त संगठनों के अध्यक्ष व महासचिव आदि को स्थानांतरण नीति में छूट दी गई है। फिलहाल डीजी हेल्थ ने आश्वासन दिया कि किसी के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।

मांगों को लेकर फार्मासिस्टों ने निदेशालय का किया घेराव: उप्र राजकीय होम्योपैथिक फार्मासिस्ट सेवा संघ के आवाहन पर सोमवार को राजधानी स्थित निदेशक (होम्योपैथी) के कार्यालय का घेराव किया। बड़ी संख्या में निदेशालय पहुंचे फार्मासिस्टों ने विनियमितिकरण, सुनिश्चित करियर प्रोन्नयन (एसीपी) व प्रोन्नति आदि की मांग उठाई। संघ के अध्यक्ष हरि श्याम मिश्रा व महामंत्री शिव प्रसाद ने कहा कि अभी तक फार्मासिस्टों के लिए कोई उच्च पद सृजित नहीं है। ऐसे में फार्मासिस्ट इसी पद से सेवानिवृत्त हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि फार्मासिस्ट के पद रिक्त होने के कारण एक-एक फार्मासिस्ट को कई अस्पतालों का काम देखना पड़ रहा है।

होम्योपैथिक फार्मासिस्ट सेवा संघ ने छेड़ा आंदोलन: वहीं वर्ष 2019 में फार्मासिस्ट के 420 पदों को भरने के लिए उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा भर्ती प्रक्रिया शुरू की गई लेकिन अभी तक वह पूरी नहीं हो पाई है। यही नहीं फार्मासिस्टों को 10 वर्ष, 16 वर्ष व 26 वर्ष पर एसीपी नहीं मिल पा रही है। चिकित्सकों की अनुपस्थिति में फार्मासिस्ट मरीजों को देख रहे हैं, लेकिन उन्हें प्रभार भत्ता नहीं दिया जा रहा है। उधर फार्मासिस्ट फेडरेशन ने भी फार्मासिस्टों के आंदोलन का समर्थन किया है। फेडरेशन के अध्यक्ष सुनील यादव का कहना है कि फार्मासिस्टों के साथ अन्याय किया जा रहा है। अगर मांगें पूरी न हुईं तो आगे आंदोलन और तेज किया जाएगा।

Edited By: Prabhapunj Mishra