यूपी के प्रााथमिक विद्यालयों में होगा जल संरक्षण, आइसीआइसीआइ फाउंडेशन लगाने जा रहा रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
आइसीआइसीआइ फाउंडेशन अब पांच जिले बांदा चित्रकूट बाराबंकी सीतापुर और वाराणसी के 100 प्राथमिक विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने जा रहा है। इसके लिए निर्देश है कि डार्क एरिया में स्थित विद्यालयों को ही चयनित करें।

लखनऊ, राज्य ब्यूरो। वर्षा के जल का संरक्षण अब शहरों के बड़े भवनों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि गांवों के प्राथमिक विद्यालयों में भी अब रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाने की तैयारी है। यह पहल आइसीआइसीआइ फाउंडेशन ने की है। इसके लिए पांच जिले बांदा, चित्रकूट, बाराबंकी, सीतापुर और वाराणसी भी चिन्हित कर लिए गए हैं, वहां के 100 प्राथमिक विद्यालयों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया जाना है, निर्देश है कि डार्क एरिया में स्थित विद्यालयों को ही चयनित करें।
शहर से लेकर गांवों में बने प्राथमिक विद्यालय अभी तक पर्यावरण संरक्षण में पौधारोपण करके योगदान देते रहे हैं। इसके साथ ही स्वच्छता का भी परिसर में ध्यान रखा जाता है। अब वर्षा जल संरक्षण में प्राथमिक स्कूलों के भवनों का प्रयोग किया जाएगा। देश का आइसीआइसीआइ समूह सामाजिक दायित्व निर्वहन के लिए आइसीआइसीआइ फाउंडेशन के जरिए योगदान दे रहा है। कृषि उत्पादन बढ़ाने और अस्पतालों को बेहतर बनाने में अपनी जिम्मेदारी निभाने के साथ ही समूह अब जल संरक्षण भी करेगा। फाउंडेशन के अफसरों की पिछले दिनों बेसिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार के साथ बैठक हुई।
फाउंडेशन ने प्रमुख सचिव को बताया कि कारपोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी यानी सीएसआर के तहत पांच जिलों के 20-20 प्राथमिक स्कूलों के माध्यम से ग्राउंड वाटर रिचार्ज कराना चाहते हैं। प्रमुख सचिव ने निदेशक बेसिक शिक्षा डा. सर्वेंद्र विक्रम बहादुर सिंह को इस संबंध में निर्देश दिए। उन्होंने बांदा, चित्रकूट, बाराबंकी, सीतापुर व वाराणसी के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे ग्राउंड वाटर के हिसाब से उन ब्लाकों के विद्यालयों को चयनित करें जो डार्क एरिया में आते हों। चयन किए जाने वाले विद्यालय में पर्याप्त स्थान होना चाहिए। इस कार्यवाही से निदेशालय बेसिक शिक्षा को भी अवगत कराएं।
स्कूलों में बागवानी का भी होगा विकास : आइसीआइसीआइ फाउंडेशन चयनित जिलों के विद्यालयों में वर्षा जल का संरक्षण करने के साथ ही बागवानी का भी विकास कराएगा। इससे पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। ज्ञात हो कि सरकार स्कूलों का कायाकल्प कर रही है और अब तक सवा लाख से अधिक विद्यालयों को चमकाया जा चुका है।
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