Lucknow: एनबीआरआई की बड़ी उपलब्धि, फुलवारी में खिला वाटर लिली का फूल; देखें खासियत
Lucknow News गुयाना का राष्ट्रीय पुष्प को अब लखनऊवासी भी देख सकेंगे। एनबीआरआइ में वैज्ञानिकों ने विशालकाय विक्टोरिया अमेजनिका वाटर लिली को खिलाने में सफलता प्राप्त कर ली है। उत्तर भारत में NBRI पहला संस्थान है जहां यह पुष्प खिला है।

लखनऊ, जागरण संवाददाता। राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) के फुलवारी (गार्डन) में लगे विशालकाय विक्टोरिया अमेजनिका वाटर लिली के पत्तों पर जल्द ही बच्चे बैठ कर अठखेलियां करते नजर आ सकते हैं। जून में लगाए गए इस पौधे फूल निकल आए हैं और पत्तियों ने भी बढ़ना शुरू कर दिया है। संस्थान की यह एक अनूठी उपलब्धि है।
गुयाना का राष्ट्रीय पुष्प
ऊष्ण कटिबंधीय देशों जैसे दक्षिणी अमेरिका और गुयाना में पाए जाने वाला विक्टोरिया अमेजनिका वाटर लिली नामक यह पौधा अपनी प्रजाति में वृहद स्तर पर उगने वाला दूसरा पौधा है। यह गुयाना का राष्ट्रीय पुष्प भी है। भारत में कोलकाता में बोटेनिकल सर्वे आफ इंडिया में उगाया जा चुका है। उत्तर भारत में एनबीआरआइ पहला संस्थान होगा, जहां यह फूल खिला है।
फूल को पूरा खिलने में लगते हैं 48 घंटे
संस्थान के मुख्य वैज्ञानिक डा. एस के तिवारी के अनुसार इस पौधे के बीज एनबीआरआइ में जून में रोपित किए गए थे। इसके बाद वैज्ञानिकों की टीम की कड़ी मेहनत से यह अब फल-फूल रहा है। बुधवार की शाम को यह फूल खिला है। पत्तियों को बड़ा होने में भी कुछ समय और लगेगा। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. केजे सिंह ने बताया कि विशालकाय विक्टोरिया एमाजोनिका का फूल खिलने में 48 घंटों का समय लेता है और दो से तीन दिन तक खिला रहता है।
दो दिन में सफेद से गुलाबी हो जाता है फूल
बड़ा फूल दो दिन में सफेद से गुलाबी हो जाएगा। यह बेहद खुशबूदार फूल है जो खिलने के पहले दिन मीठे अनानास जैसी सुगंध देता है। बोटेनिक गार्डन में इकलौते पौधे को बीज से विकसित किया गया है। इस विशालकाय वाटर लिली की पत्तियां गोल होती हैं और यह तीन मीटर के व्यास तक बड़ी हो सकती हैं, जो एक 25 से 35 किलोग्राम तक के वजन के बच्चे को उठाने में सक्षम है।
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