व्हाइट कोट टेरर की गिरफ्त में प्रख्यात KGMU, मतांतरण व 'लव जिहाद' नेटवर्क पर STF की रिपोर्ट में कई डॉक्टरों के नाम
KGMU in Grip of White Coat Terror: महिला रेजिडेंट डाक्टर डॉ. देवव्रती मित्रा की शिकायत के आधार पर 23 दिसंबर ...और पढ़ें

विश्व विख्यात मेडिकल संस्थान किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी
HighLights
केजीएमयू में अवैध मतांतरण, 'लव जिहाद' और महिला डॉक्टरों का उत्पीड़न
एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में यहां के चिकित्सकों और अन्य कर्मियों के नाम
जांच में संरक्षण और शिकायतें दबाने का भी जिक्र, इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह की पहचान
डिजिटल डेस्क, लखनऊ: विश्व विख्यात मेडिकल संस्थान किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) व्हाइट कोट टेरर की गिरफ्त में है। यहां पर अवैध मतांतरण, 'लव जिहाद' और महिला डॉक्टरों के उत्पीड़न की जांच रिपोर्ट सामने आ गई है।
बेहद पुनीत कार्य वाले क्षेत्र में इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह की पहचान भी हुई है, जिसका काम चिकित्सा के पेशे में आने वाली महिलाओं को अपना शिकार बनाना है। इससे जुड़े संस्थान के दो दर्जन से अधिक चिकित्सकों की पहचान भी हुई है।
इंटीग्रल विश्वविद्यालय से जुड़े कुछ संदर्भ और इस्लामिक मेडिकोज नामक समूह चलाने की जानकारी दी गई है। मुस्लिम डाक्टरों का पैसा एक मेडिकल कालेज में लगाए जाने का जिक्र किया गया है। हिंदू महिलाओं को सुनियोजित ढंग से निशाना बनाया गया।
उत्पीड़न की जांच में संरक्षण और शिकायतें दबाने का भी जिक्र
किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में पैथोलाजी-माइक्रोबायोलाजी की महिला डाक्टरों-कर्मियों को इस्लामिक मेडिकोज के निशाना बनाने की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही यहां पर अवैध मतांतरण, 'लव जिहाद' और महिला डॉक्टरों के उत्पीड़न की जांच में संरक्षण और शिकायतें दबाने का भी जिक्र है।
संस्थान में मतांतरण और महिला डाक्टरों व कर्मचारियों के उत्पीड़न को लेकर एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के बाद खलबली मची है। एसटीएफ की रिपोर्ट आने के बाद चिकित्सा और शैक्षणिक जगत में सनसनी फैल गई है। प्रदेश के अन्य मेडिकल कालेजों और विश्वविद्यालयों में भी केजीएमयू को बदनाम करने वाले इस नेटवर्क के सक्रिय होने की आशंका है।
महिला डॉक्टर- नर्सिंग कर्मचारियों को फंसाने का कुचक्र
एसटीएफ की जांच में विश्वविद्यालय के डॉक्टरों, रेजिडेंट डॉक्टरों और कर्मचारियों की कथित भूमिका सामने आई। जांच के दौरान महिला डॉक्टरों और नर्सिंग कर्मचारियों को प्रेमजाल में फंसाने, शादी का झांसा देने और धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोपों की पड़ताल की गई। एसटीएफ ने अपनी जांच रिपोर्ट में अलग-अलग विभागों से जुड़े लोगों और घटनाओं का उल्लेख किया। रिपोर्ट में गांधी वार्ड, पैथोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और रेडियोलॉजी विभाग से जुड़े मामलों का जिक्र किया गया।
KGMU प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश
एसटीएफ के एडीजी अमिताभ यश की ओर से तैयार रिपोर्ट के आधार पर चिकित्सा शिक्षा के संयुक्त सचिव आनंद कुमार त्रिपाठी ने शुक्रवार को केजीएमयू के कुलसचिव को पत्र भेजकर चिह्नित कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने और उसकी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने को कहा है। एसटीएफ की रिपोर्ट में कुछ महिला रेजिडेंट डॉक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य महिला कर्मचारियों को कथित रूप से प्रेमजाल में फंसाकर मत परिवर्तन के लिए प्रेरित करने, निकाह का दबाव बनाने और विरोध करने पर करियर प्रभावित करने की धमकी देने की बात सामने आई है। कुछ मामलों में कार्रवाई रोकने की कोशिश हुई। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में नफीस, मुस्तफा और रेजिडेंट डॉक्टर आदिल से जुड़े कथित मामलों का भी उल्लेख है। अब एसटीएफ की जांच रिपोर्ट के आधार पर केजीएमयू प्रशासन और चिकित्सा शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर नजर है।
23 दिसंबर को केस, गिरफ्तार किया गया डॉ रमीज
महिला रेजिडेंट डाक्टर डॉ. देवव्रती मित्रा की शिकायत के आधार पर 23 दिसंबर 2025 को लखनऊ के चौक थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में पैथोलाजी विभाग के रेजिडेंट डॉ रमीज पर महिला डाक्टर को प्रेमजाल में फंसाने और मत परिवर्तन के लिए दबाव बनाने के आरोप दर्ज हैं। रमीज की गिरफ्तारी इसी वर्ष नौ जनवरी को हो चुकी है। पैथोलाजी विभाग के रेजिडेंट डाक्टर डॉ आदिल से जुड़े एक अन्य मामले का भी जिक्र है। इसमें महिला कर्मचारी की शिकायत पर 29 दिसंबर 2025 को मुकदमा दर्ज किए जाने का उल्लेख है। दोनों मामलों को रिपोर्ट में जांच के अधीन बताया गया है।
मत परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की शिकायत
गांधी वार्ड के संबंध में रिपोर्ट में नर्सिंग स्टाफ नफीस और पुरकान तथा रेजिडेंट डॉ. आदिल से जुड़े आरोपों का उल्लेख है। महिला नर्सिंग कर्मियों को कथित रूप से प्रभावित करने, उत्पीड़न करने और मत परिवर्तन के लिए प्रेरित करने की शिकायतों का भी जिक्र है। माइक्रोबायोलाजी विभाग में संविदा पर कार्यरत कंप्यूटर आपरेटर ज्योति राव की शिकायत को रिपोर्ट में शामिल किया गया है। इसमें वरिष्ठ कर्मचारी शाकत अली पर उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने तथा शिकायत के बाद समिति गठित होने का उल्लेख है। रिपोर्ट में बताया गया है कि शिकायतों के बावजूद संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
12 लोग आरोपी या संदिग्ध
प्रत्यक्ष शोषण और धर्मांतरण के मुख्य आरोपी
1. डॉ रमीज (डॉ रमीजउद्दीन नायक उर्फ रमीज मलिक) - सीनियर रेजिडेंट, पैथोलाजी: मुख्य आरोपी। जूनियर महिला डॉक्टर देवव्रती मित्रा को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न करना, धर्म परिवर्तन के लिए मारपीट करना और अन्य हिंदू महिला डाक्टरों (जैसे डॉ. कृतिका, डॉ मुस्कान) को निशाना बनाना। (यह गिरफ्तार हो चुका है)।
2. नाफिस - नर्सिंग स्टाफ, गांधी वार्ड: नर्सिंग कर्मी ज्योति सिंह को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक/मानसिक शोषण करना और धर्म परिवर्तन कराकर निकाह करना।
3. फुरकान - नर्सिंग स्टाफ, गांधी वार्ड: नर्सिंग कर्मी जागृति गुप्ता को प्रेमजाल में फंसाकर शारीरिक व मानसिक शोषण करना और निकाह व धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाना।
4. डॉ आदिल - रेजिडेंट डॉक्टर, गांधी वार्ड: नर्सिंग स्टाफ माविया और मीनाक्षी पाण्डेय को शादी का झांसा देकर प्रेमजाल में फंसाना और शारीरिक शोषण करना।
5. शफात अली खान - संविदा कर्मी, माइक्रोबायोलाजी: 25 वर्षीय हिंदू कंप्यूटर ऑपरेटर युवती से छेड़छाड़, पीछा करना और धर्म परिवर्तन कर निकाह के लिए दबाव बनाना।
नेटवर्क को संरक्षण देने और पीड़ितों को प्रताड़ित करने वाले
6. प्रो. सुरेश बाबू - एचओडी, पैथोलाजी: आरोपी डॉ. रमीज को विभागीय मीटिंग में क्लीनचिट देना, पीड़िता पर मानसिक विक्षिप्त होने का झूठा आरोप लगाकर मामले को दबाना और हिंदू विरोधी मानसिकता रखना।
7. डॉ. सुगायरा कयूम - एडिशनल प्रोफेसर, पैथोलाजी: मुस्लिम रेजिडेंट्स को संरक्षण देना और हिंदू डाक्टरों (जैसे डॉ. सबीना, डॉ. हर्षित जैन) को छुट्टियों व त्योहारों पर प्रताड़ित कर भेदभाव करना।
8. डॉ. वाहिद अली - इंचार्ज बायोमीट्री लैब, पैथोलाजी: लैब में मुस्लिम लड़कों के साथ बैठकें करना, कट्टर इस्लामिक विचारधारा को बढ़ावा देना और आरोपी डा. रमीज का पक्ष लेना।
9. प्रो. उस्मान कौसर - नेफ्रोलाजिस्ट, मेडिसिन विभाग: डॉ. अब्बास अली मेंहदी के बाद संस्थान में इस समूह का नेतृत्व करना और धर्मांतरण से जुड़े मामलों को सपोर्ट करना।
10. डॉ. अहमद - असिस्टेंट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री: मुस्लिम स्कालर्स और रेजिडेंट्स को इस नेटवर्क में आगे बढ़ने के लिए मोटिवेशन और बैंक (वित्तीय) सपोर्ट देना।
11. डॉ. कलीम - असिस्टेंट प्रोफेसर, बायोकेमिस्ट्री: डॉ. अहमद के साथ मिलकर मुस्लिम स्कालर्स का मार्गदर्शन करना और संदिग्ध गतिविधियों में सहयोग देना।
12. एस.ए. अब्बास - सेवानिवृत्त क्लर्क: डॉ. अब्बास अली मेंहदी के माध्यम से मुस्लिम डाक्टरों का पैसा अन्य मेडिकल कालेजों में इन्वेस्ट कराना और कन्वर्जन संबंधी कमेटियों में मनचाहे सदस्यों की नियुक्तियां कराना।
इनके अलावा रिपोर्ट में 'इस्लामिक मेडिकोज' ग्रुप से जुड़े डॉ परवेज, डॉ शाहीन और मो. कैफ जैसे चिकित्सकों के नाम भी संदिग्धों और सहयोगियों के रूप में दर्ज हैं, जिनके तार बाहरी संगठनों से जुड़े होने की बात कही गई है।
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