प्रदेशभर में 186 अवैध एंबुलेंस मिलीं, लखनऊ में 10 खराब; परिवहन विभाग की बड़ी कार्रवाई
लखनऊ में एंबुलेंसों की जांच में व्यापक गड़बड़ियां मिलीं, जहां 10 एंबुलेंस खराब पाई गईं और दो सीज की गईं। ...और पढ़ें

तस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
HighLights
लखनऊ में 10 एंबुलेंस जांच में गड़बड़, दो सीज।
प्रदेश में 186 एंबुलेंस बिना अस्पताल अनुबंध के चल रहीं।
4789 एंबुलेंस की जांच, 772 का चालान, 135 बंद।
जागरण संवाददाता, लखनऊ। गंभीर रूप से बीमार मरीजों को घर से अस्पताल या एक से दूसरे हास्पिटल पहुंचाने वाली एंबुलेंस ही बीमार हैं। ये महज आरोप नहीं, बल्कि एंबुलेंस की जांच में व्यापक गड़बड़ियां मिली हैं। लखनऊ में ही केजीएमयू की एंबुलेंस संख्या यूपी 32 एफएन 0847 का नौ साल से फिटनेस, प्रदूषण व बीमा नहीं मिला, ड्राइवर वाहन लाक करके भागा। इससे उसे सीज नहीं किया जा सका।
प्रदेश में 186 एंबुलेंस ऐसी मिली, जो किसी अस्पताल से अनुबंधित नहीं हैं, यानि एंबुलेंस का बोर्ड लगाकर अवैध वाहन भी चल रहे हैं। ये हाल तब है जब वाहनों की जांच छिटपुट हुई, अन्यथा बड़ी संख्या में एंबुलेंस पकड़ी जाती।
सड़क सुरक्षा के तहत परिवहन विभाग को ये सूचनाएं मिल रही थी कि सड़कों पर बड़ी संख्या में अवैध व अनफिट एंबुलेंस चल रही हैं। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई के लिए पांच से सात अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाकर वाहनों की जांच की गई। राजधानी में ही 10 एंबुलेंसों की हालत खराब मिलीं। चरक हास्पिटल व हर्षा हास्पिटल की एंबुलेंस का फिटनेस व बीमा नहीं था। सिर्फ दो वाहनों काे सीज किया गया जबकि आठ एंबुलेंस चालान करके इसलिए छोड़ दी गई क्योंकि उनमें मरीज व तीमारदार थे।
अपर परिवहन आयुक्त प्रवर्तन केडी सिंह ने बताया, विशेष जांच अभियान में 4789 एंबुलेंस की जांच हुई, इनमें नियमों का उल्लंघन व अनफिट होने पर 772 का चालान व 135 को बंद किया गया है। चालान एंबुलेंस में 381 अनफिट थी यानि का उनका फिटनेस, बीमा, प्रदूषण आदि नहीं था, साथ ही मेडिकल सपोर्ट सिस्टम भी दुरुस्त नहीं मिला। वहीं, 186 एंबुलेंस सरकारी या निजी अस्पतालों से अनुबंधित नहीं मिली। उन्होंने बताया, ऐसा अभियान आगे भी जारी रहेगा।
एंबुलेंस में ये जरूरी
- सेंट्रल आक्सीजन पाइपलाइन व आटोमेटिक चेंजओवर के साथ दो सिलेंडर।
- वेंटिलेटर, डीफिब्रिलेटर व मरीज की धड़कन मापने मल्टी पैरा मानीटर।
- केबिन में एंटी बैक्टीरियल व एंटी स्लिप जिसे आसानी से सैनिटाइज किया जा सके।
- ड्राइवर केबिन से अलग मरीज के केबिन के लिए स्वतंत्र एयर कंडीशनिंग व्यवस्था।
- ड्राइवर व मरीज के हिस्से के बीच मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के लिए मजबूत दीवार।
- अचानक ब्रेक या दुर्घटना पर भी मुख्य स्ट्रेचर को न हिलने वाला लाकिंग सिस्टम।
- मेडिकल उपकरणों के लिए अलग इनवर्टर, बैट्री बैकअप, ताकि मुख्य बैट्री पर लोड न हो।
- छत पर तेज चमकने वाली एलईडी लाइट और मल्टीटोन सायरन।
- बोनट पर उल्टे अक्षरों में एंबुलेंस लिखा हो, आगे चल रहा ड्राइवर शीशे में देखकर पढ़ सके।
- रात में दूर से दिखने वाले चमकदार रेडियम स्टीकर गाड़ी के पीछे व साइड में हो।
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