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    पूर्व सांसद हर्षवर्धन को 27 वर्ष पुराने मामले में एक वर्ष की कैद

    By Dharmendra PandeyEdited By:
    Updated: Mon, 08 Jun 2015 07:12 PM (IST)

    अदालतों में 'तारीख पर तारीख' के कारण परिणाम तब आता है, जब उसका कोई मायने नहीं रह जाता है। गोरखपुर मंडल में महराजगंज के पूर्व सांसद हर्षवर्धन को 1988 के एक मामले में आज एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है। मामला नवंबर 1988 में गोरखपुर के तत्कालीन एडीएम

    लखनऊ। अदालतों में 'तारीख पर तारीख' के कारण परिणाम तब आता है, जब उसका कोई मायने नहीं रह जाता है। गोरखपुर मंडल में महराजगंज के पूर्व सांसद हर्षवर्धन को 1988 के एक मामले में आज एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई गई है। मामला नवंबर 1988 में गोरखपुर के तत्कालीन एडीएम खाद्य आपूर्ति रामसजीवन के साथ मारपीट का है।

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    महराजगंज के जिला जज शशिकांत पांडेय ने आज पूर्व सांसद हर्षवर्धन को एक साल कारावास की सजा सुनाई है। तत्कालीन एडीएम ने सात नवंबर 1988 को गोरखपुर के कैंट थाने में फरेंदा के तत्कालीन विधायक हर्षवर्धन के साथ ही परशुराम मिश्र के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया था। पूर्व सांसद को बाद में जमानत पर रिहा किया गया था।

    आनंदनगर नगर पंचायत चुनाव के दौरान तत्कालीन 7 नवम्बर 1988 को एडीएम खाद्य-आपूर्ति रामसजीवन से विवाद हो गया था। इसमें एडीएम ने हर्षवर्धन व परशुराम मिश्र के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कराया था। नगर नगर पंचायत चुनाव संचालन की जिम्मेदारी राम सजीवन के पास थी। इस दौरान मुकदमे के एक अभियुक्त परशुराम मिश्र का निधन हो चुका है।

    हर्षवर्धन पक्ष के लोगों का का आरोप था कि एडीएम नगर पंचायत के एक उम्मीदवार सेठ विभूति राम के यहां बैठे थे जिसके कारण विवाद हुआ। सेठ विभूति राम उस समय कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी थे जो तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के करीबी माने जाते थे। हर्षवर्धन जनता पार्टी के प्रत्याशी जयप्रकाल लाल का समर्थन कर रहे थे। उस समय महराजगंज गोरखपुर जिले का हिस्सा था।