आतंकी परवेज की शह पर 2012 से अनैतिक काम में जुट गया था डॉ रमीजुद्दीन, शुरू किया इस्लामिक मेडिकोज ग्रुप
KGMU White Coat Terror: आगरा में पढ़ने वाले रमीजुद्दीन ने सीनियर साथी आतंकी परवेज (शाहीन का सगा भाई) के साथ मिलकर इस्लामिक मेडिकोज नाम से ग्रुप बनाया था।

रमीजुद्दीन ने सीनियर साथी आतंकी परवेज (शाहीन का सगा भाई) के साथ मिलकर इस्लामिक मेडिकोज नाम से ग्रुप बनाया
HighLights
वाट्सएप ग्रुप से देशभर में जोड़े गए डॉक्टर
ग्रुप से जुड़कर विचारधारा को बढ़ाने पर कर रहे काम
खंगाली जा रही 15 वर्ष पुरानी कड़ियां
आतंकी शाहीन के भाई परवेज के साथ मिलकर बनाई थी योजना
आयुष्मान पांडेय, लखनऊ। सफेद कोट यानी डॉक्टर की पहचान की आड़ में युवाओं तक पहुंच बनाने के बाद उनको मतांतरण के लिए प्रेरित करने वाले नेटवर्क की जड़ें देशभर में फैली होने की आशंका है।
किंग जार्ज मेडिकल कालेज (केजीएमयू) में मतांतरण से जुड़े मामलों की जांच कर रही उत्तर प्रदेश एसटीएफ की पड़ताल में डॉक्टरों, शिक्षकों और कर्मचारियों की भूमिका से जुड़े कई तथ्य सामने आए हैं। इस जांच में वर्ष 2012 में आगरा से शुरू हुए ‘इस्लामिक मेडिकोज’ नाम के ग्रुप का भी जिक्र है।
आरोप है कि इस ग्रुप के जरिये वर्ष 2016 से देश के अलग-अलग राज्यों में सक्रिय लोगों को जोड़कर एक विचारधारा के प्रसार का काम किया जा रहा था। रमीजुद्दीन ने यह ग्रुप आतंकी शाहीन के भाई परवेज के साथ मिलकर बनाया था।
सूत्रों के मुताबिक, वर्ष 2012 में आगरा में पढ़ने वाले रमीजुद्दीन ने सीनियर साथी आतंकी परवेज (शाहीन का सगा भाई) के साथ मिलकर इस्लामिक मेडिकोज नाम से ग्रुप बनाया था। इसके बाद मेडिकल शिक्षा और पेशेवर गतिविधियों से जुड़े लोगों को इससे जोड़ने का सिलसिला शुरू हुआ।
हर वर्ष नए सदस्यों को शामिल किया जाता था। पढ़ाई पूरी करने के बाद ग्रुप से जुड़े लोग देश के अलग-अलग राज्यों में डाक्टर, शिक्षक और कर्मचारी के रूप में तैनात हो गए। आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यस्थल और पेशेवर संपर्कों का इस्तेमाल कर नेटवर्क की विचारधारा को आगे बढ़ाया।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस नेटवर्क के निशाने पर छात्राएं, कर्मचारी और युवा रहते थे। पहले उनसे पेशेवर और व्यक्तिगत संपर्क स्थापित किया जाता था। इसके बाद जिन लोगों पर अधिक भरोसा बन जाता था, उन्हें मतांतरण के लिए प्रेरित करने और कथित तौर पर विचारधारा के प्रचार में भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाता था। वाट्सएप ग्रुप के जरिये संपर्क और विचारों के आदान-प्रदान की बात भी जांच में सामने आई है।
रमीजुद्दीन के संपर्कों की भी पड़ताल
डॉ रमीजुद्दीन की भूमिका और उसके संपर्कों की भी जांच की जा रही है। परवेज रमीजुद्दीन का वरिष्ठ था। वहीं, आतंकी गतिविधियों से जुड़े मामलों में चर्चा में आई डॉ. शाहीन और उसके नेटवर्क से संभावित संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। शाहीन ने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू मेडिकल कालेज से एमबीबीएस और एमडी की पढ़ाई की थी। हालांकि, किसी आतंकी संगठन से इस मतांतरण माड्यूल के सीधे संबंध की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
डिजिटल साक्ष्यों से खुलेगा नेटवर्क का राज
एसटीएफ अब वाट्सएप चैट, डिजिटल संपर्क, वित्तीय लेनदेन और पेशेवर संबंधों की कड़ियां जोड़ रही है। मेडिकल शिक्षा, प्रशिक्षण और कार्यस्थलों के दौरान बने संपर्कों की भी जांच की जा रही है। इससे नेटवर्क में शामिल लोगों की पहचान करने के साथ उनकी अलग-अलग भूमिकाओं और जिम्मेदारियों का निर्धारण करना है।
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