लखनऊ, जेएनएन। डेंगू को लेकर आमजन में खौफ है। वहीं अस्पतालों में प्लेटलेट्स को लेकर मारामारी है, मगर, मरीज में प्लेटलेट्स कम के बजाय हीमोग्लोबिन-हीमेटोक्रिट का बढऩा अधिक घातक है। यह प्लाज्मा लीकेज की वजह से होता है, जोकि व्यक्ति के लिए जानलेवा बन जाता है। दैनिक जागरण कार्यालय में लोहिया संस्थान के निदेशक व हीमेटोलॉजिस्ट डॉ. एके त्रिपाठी मौजूद रहे। उन्होंने 'हेलो डॉक्टर' कार्यक्रम में पाठकों में व्याप्त रक्त संबंधी रोगों के भ्रम को दूर किया। साथ ही बीमारियों से बचाव के उपाय भी बताए।

रक्त संबंधी प्रमुख रोग

एनीमिया, प्लेटलेट्स की कमी होना, थैलेसीमिया, हीमोफीलिया, ए-प्लास्टिक एनीमिया, ल्यूकीमिया, लिंफोमा, मायलोमा, क्रॉनिक मायलॉयड ल्यूकीमिया, स्नोफीलिया, पॉलीसाइथीमिया (हीमोग्लोबिन का बढऩा), प्लेटलेट्स का बढऩा (थ्रांबोसाइटोसिस), थ्रांबोटिक डिसऑर्डर (रक्त का थक्का जमना)।

समझें प्लेटलेट्स की गणित

प्लेटलेट्स बढऩा : सामान्यत: व्यक्ति में 1.5 लाख से 4.5 लाख प्लेटलेट्स होते हैं। इससे अधिक बढऩे को थ्रांबोसाइटोसिस कहते हैं। प्लेटलेट्स बढऩे के कई कारण हैं। इसमें शरीर में स्टे्रस, इंफेक्शन, चोट लगना, ऑपरेशन के बाद प्रतिरोधक स्वरूप (एक्यूट फेज रिएक्शन) होता है। यदि लगातार प्लेटलेट्स बढ़ रहें तो आयरन डिफेसिएंसी व मायलो फ्राइबोसिस आदि की जांच करा लें।

प्लेटलेट्स घटना : डेंगू व अन्य इंफेक्शन से प्लेलेट्स घटता है। ऐसे में ब्लीडिंग न हो तो 20 से 30 हजार तक कोई खतरा नहीं है। 

डेंगू कब होता खतरनाक

डेंगू में खून की नलियों से प्लाज्मा लीक करने लगता है। ऐसे में हीमोग्लोबिन-हीमेटोक्रिट बढ़ जाता है। प्लाज्मा लीक होने से मरीज का ब्लड प्रेशर डाउन हो जाता है और वह शॉक में चला जाता है। ऐसे में रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन-हीमेटोक्रिट बढ़े तो सावधान हो जाएं। 

डेंगू में मरीज की छोटी रक्त धमनियों से रक्तस्राव होने लगता है। यह मरीज के लिए खतरनाक है। इसके अलावा डीआइसी होता है। इसमें टिश्यू फैक्टर रिलीज होते हैं। यह ब्लड में क्लॉट कर देते हैं।

कितना हो हीमोग्लोबिन

पुरुष में 13 से 16 ग्राम हीमोग्लोबिन होना चाहिए। वहीं महिलाओं में 12 से 14 हीमोग्लोबिन जरूरी है। इससे कम हीमोग्लोबिन वाला व्यक्ति एनीमिया की विभिन्न ग्रेड में आता है। वहीं सामान्य से ज्यादा हीमोग्लोबिन को एलेथ्रोसाइटोसिस कहते हैं।

पाठकों ने पूछे सवाल 

सवाल : हाथ-पैर की उंगलियों की स्किन फट जाती हैं। क्या यह रक्त से जुड़ा रोग है।- पूजा, लखीमपुर

जवाब : स्किन के डॉक्टर को दिखाएं। राहत न मिलने पर सीबीसी, आयरन, विटामिन बी-12 व स्नोफिल की जांच करा लें। इसी से बीमारी स्पष्ट हो जाएगी।

सवाल : 2013 में डेंगू हुआ था। तब से प्लेटलेट्स लगातार कम रहता है। बुखार भी नहीं है। क्या करें। - अंकित, अलीगंज

जवाब: डेंगू होने के बाद प्लेटलेट्स सामान्य से कम रहते हैं मगर, घबराने की जरूरत नहीं है। यदि रिपोर्ट में अधिक कम हो तो एक बार दोबारा जांच कराकर डॉक्टर को दिखा लें।

सवाल : चेहरे पर ब्लैक स्पॉट हो रहे हैं। क्या ब्लड इंफेक्शन है। - मधू त्रिपाठी, लखीमपुर

जवाब : खून के रोग या रक्त की कमी से त्वचा का रंग बदलता है। एक बार सीबीसी, स्नोफिल, आयरन व विटामिन बी12 की जांच करा लें। कंफर्म हो जाएगा।

सवाल : टीएलसी काउंट बढ़ा है। चक्कर और घबराहट हो रही है। क्या हो सकता है। - अंबरीश, गोंडा

जवाब : टीएलसी इंफेक्शन से भी बढ़ जाता है। घबराहट का कारण यह नहीं है। एक बार ब्लड प्रेशर चेक करा लें। सप्ताह बाद दोबारा जांच कराकर डॉक्टर को दिखा लें।

सवाल : मेरा वजन नहीं बढ़ रहा है। इलाज भी कराया। कोई फायदा नहीं, क्या करें। - अंकित, हरदोई

जवाब : आपको रक्त संबंधी रोग नहीं है। यदि आपको कोई बीमारी लग रही है तो थायरॉइड व शुगर की एक बार जांच करा लें।

सवाल : 30 वर्ष का पुत्र है। डेंगू हो गया है। एक लाख प्लेटलेट्स रह गई हैं। कोई खतरा है। - एसएन श्रीवास्तव, लखनऊ

जवाब : प्लेटलेट्स गिरने को लेकर चिंता न करें। बस उसकी ब्लीडिंग व ब्लड प्रेशर गिरने को लेकर सतर्क रहें। 20-30 हजार प्लेटलेट्स भी रह जाएं, ब्लीडिंग नहीं हो रही है तो मरीज को खतरा नहीं है।

सवाल : दो बार रक्तदान किया, तब से बीपी लो होने लगा। क्या करें।- प्रदीप, काकोरी

जवाब : रक्तदान से बीपी लो नहीं होता है। इसका अन्य कारण होगा। बीपी की मॉनीटङ्क्षरग करते रहें। डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल : पत्नी का ब्लड प्रेशर बढ़ गया है। नाक से खून आ गया। हृदय रोग नहीं निकला। प्लेटलेट्स साढ़े छह लाख है। - विनोद, रायबरेली

जवाब : ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें। दोबारा जांच कराएं। शारीरिक स्ट्रेस व इनलेस से भी प्लेटलेट काउंट बढ़ जाते हैं। लगातार काउंट बढ़े रहने पर डॉक्टर को दिखाएं।

सवाल : 2017 में बेटे की टीएलसी-डीएलसी बढ़ गई। डॉक्टर ने ब्लड कैंसर बताया। दोबारा जांच में रिपोर्ट सामान्य आई, अब क्या करें। - पप्पू, सुलतानपुर

जवाब : टीएलसी-डीएलसी शरीर में घटता-बढ़ता रहता है। इसके कई कारण हैं। यदि ब'चा स्वस्थ है, तो चिंता की बात नहीं है।

सवाल : शरीर में झनझनाहट रहती है। क्या करें।- सीताराम, हरदोई

जवाब : सीबीसी जांच करा लें। एनीमिया हो सकती है। रिपोर्ट आने पर फिजीशियन को दिखाएं।

वाल : 75 वर्ष के पिता जी हैं। अक्सर बुखार रहता है, दवा से स्थाई राहत नहीं मिल रही है। - पदम जैन, बाराबंकी

जवाब : तीन सप्ताह तक बिना दवा दिए बुखार मापे। पूरा चार्ट बना लें। इसके बाद दोबारा जांच कराकर डॉक्टर को दिखाएं। यदि बीच में 100 से ऊपर बुखार आए तो सिर्फ पैरासीटामॉल दें।

सवाल : पुताई का काम करते हैं। पांच से छह वर्ष में हीमोग्लोबिन का स्तर छह पर आ जाता है। यह क्या है। - विजय कुमार, हरदोई

जवाब : पेंट में तमाम केमिकल व लेड होता है। यह सांस व स्किन के जरिये शरीर में पहुंच जाते हैं, जोकि बोनमैरो पर असर डालते हैं। इससे लाल रक्त कणिकाएं टूटने लगती हैं। हीमोग्लोबिन बनना प्रभावित हो जाता है। एक बार ओपीडी में दिखा लें।

सवाल : आंख के नीचे कालापन है। यह क्या रक्त संबंधी रोग है।- सत्यम, अंबेडकरनगर

जवाब : एक बार सीबीसी, बी12 व आयरन की जांच करा लें। वैसे घबराने की जरूरत नहीं है।

सवाल : मम्मी का बार-बार ब्लड कम हो रहा है। प्लेटलेट्स भी डाउन है। इंजेक्शन लगवाने होते हैं।- निशी, हरदोई

जवाब : बार-बार ब्लड कम होना बीमारी हो सकती है। एक बार शनिवार को ओपीडी में दिखा लें। जांचें कराकर ही बीमारी कंफर्म की जा सकती है।

सवाल : 10 वर्ष की बेटी है। 10.5 ग्राम से हीमोग्लोबिन नहीं बढ़ रहा है। वजन भी कम है।- अजय सिंह, अयोध्या

जवाब : एचपीएलसी और आयरन प्रोफाइल जांच करा लें। उसमें माइनर थैलेसीमिया की आशंका है।

सवाल : हीमोग्लोबिन-ल्यूकोसाइट कम है। बोनमेरो जांच में कैंसर नहीं निकला। अब क्या करें। - एसएसएफ रिजवी, लखनऊ

जवाब : आप केजीएमयू में दिखा रहे हैं। इलाज सही चल रहा है। चाहें तो रिपोर्ट लेकर शनिवार को मुझे ओपीडी में दिखा लें। पूरी बात समझने में आसानी होगी।

सवाल : शरीर में लाल चकत्ते हैं। प्लेटलेट्स 60 से 70 हजार है। शुगर भी है। क्या करें।- एआर बोस, राजाजीपुरम

जवाब : प्लेटलेट्स की कमी बिना रोग के भी हो जाती है। बढ़ती उम्र में स्किन पर लाल धब्बे भी पड़ जाते हैं। विटामिन-सी की पूर्ति करें। आहार सही से लें।

सवाल : पत्नी को डेंगू हो गया था। प्लेटलेट्स कम होने पर बकरी और पपीते के पत्ते का रस दे रहे हैं। अब 94 हजार काउंट है। कोई खतरा तो नहीं है।- मनिक चंद, सुलतानपुर

जवाब : बुखार आए आठ दिन हो गए हैं। ऐसे में अब घबराएं नहीं, एक माह बाद दोबारा जांच करा लें।

सवाल : 11 वर्ष की बेटी है। चेहरे पर पीलापन व सांस लेने में तकलीफ हो रही है।- राघवेंद्र, अंबेडकरनगर

जवाब : ब्लड की जांच करा लें। उसे बीमारी है। शनिवार को ओपीडी में दिखा लें।

सवाल : ए-प्लास्टिक एनीमिया क्या होता है।- हरेंद्र, बहराइच

जवाब : रक्त हड्डियों के अंदर मौजूद मज्जा से बनता है। यह सूख जाती है, तो हीमोग्लोबिन कम हो जाता है। यह ए-प्लास्टिक एनीमिया कहलाता है।

 

Posted By: Anurag Gupta

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