लखनऊ, जेएनएन। जब देश सुरक्षित रहेगा तो हम भी सुरक्षित रह पाएंगे। सकारात्मक सोच वाले लोक कल्याण का जरिया बनते हैं, जबकि नकारात्मक सोच वाले अराजकता का माहौल पैदा करते हैं। इससे सावधान रहने की समय आ गया है। आज कुछ शक्तियां अपनी नकारात्मक सोच से देश के लिए खतरा बन रही हैं। ये बातें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जीर्णोद्धार के बाद चौक के श्री कोनेश्वर महादेव मंदिर का उद्घाटन करते हुए कहीं। 

वह शाम साढ़े चार बजे कोनेश्वर मंदिर पहुंचे और पूजा अर्चना की। फिर भारत माता के जयकारे से संबोधन की शुरु किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सात हजार साल पुराने इस मंदिर का महात्म्य बताया। कहा कि भगवान शिव मंगल के देवता हैं, हमेशा प्रसन्न रहते हैं। शिव शक्ति से ही अमरनाथ यात्री आतंकी खतरों को दरकिनार कर दर्शन कर आते हैं। साल भर पहले तक अमरनाथ यात्रा के दौरान आतंकी खतरा बना रहता था। कहा, धर्म का मतलब किसी संप्रदाय व जाति से नहीं जुड़ा है, बल्कि धर्म का असल में कर्तव्य होता है। 

इससे पहले भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह ने नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों को देश विरोधी बताया। इस अवसर पर भूमा पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी, महापौर संयुक्ता भाटिया, विधायक सुरेश श्रीवास्तव, डा. नीरज बोरा, सुरेश तिवारी भी मौजूद थे। 

लक्ष्मण नगरी का खंडन नहीं कर पाए 

लखनऊ को भगवान लक्ष्मण की नगरी बताते हुए मध्य प्रदेश के राज्यपाल लालजी टंडन ने कहा कि आज तक इस बात का कोई खंडन नहीं कर पाया है। 

जनसहयोग से मंदिर तैयार हुआ 

श्रीकोनेश्वर महादेव मंदिर के निर्माण में अहम रोल अदा करने वाले नगर विकास मंत्री आशुतोष टंडन 'गोपाल' ने कहा कि भूमा पीठाधीश्वर अनंत श्री विभूषित स्वामी अच्युतानंद तीर्थ जी के सानिध्य में 12 फरवरी 2013 को जीर्णोद्धार का संकल्प हुआ और आज मंदिर तैयार हो गया है। उन्होंने मंदिर निर्माण में सहयोग करने वालों की तारीफ की। इन लोगों को मुख्यमंत्री नें सम्मानित भी किया। 

मंदिर ने दिया कूड़ा प्रबंधन का संदेश

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री कोनेश्वर महादेव मंदिर ने कूड़ा प्रबंधन की दिशा में एक अच्छा काम करके हर किसी को संदेश दिया है। यहां शिव अभिषेक के जल को फिर से शुद्ध कर धरती में भेजा जाएगा। फूल और पत्ती का उपयोग इत्र से लेकर अगरबत्ती बनाने में होगा। कूड़े की समस्या तभी खत्म हो सकती है, जब मुहल्ले-मुहल्ले से इसका प्रबंधन होगा। 

आकर्षित करेंगी 18 भगवानों की प्रतिमाएं 

सिद्धपीठ के रूप में ख्याति प्राप्त मंदिर को सामाजिक सरोकारों से जोडऩे की पहल के चलते वर्ष 2013 से मंदिर का नवीनीकरण शुरू हुआ था। मंदिर में एक ओर जहां भोलेनाथ के अभिषेक के जल को प्यूरीफाई कर उससे भूमिगत जल को बढ़ाए जाने के लिए सोख्ता बनाया गया है तो दूसरी ओर ऊर्जा संरक्षण के लिए मंदिर परिसर में सौर ऊर्जा का प्लांट स्थापित किया गया है। मंदिर में जहां महादेव के 12 स्वरूप के दर्शन की अनुभूति होगी तो वहीं 18 भगवान की प्रतिमाएं श्रद्धालुओं को बरबस अपनी ओर खीचेंगी। 

संतों के ठहरने की भी व्यवस्था 

सोमनाथ मंदिर से लेकर अयोध्या के श्रीराम मंदिर समेत देश के धार्मिक स्थानों को बनाने वाले अहमदाबाद के सौमपुरा परिवार के निर्देशन में मंदिर को नए स्वरूप में ढाला गया है। मंदिर के ऊपर सत्संग हॉल बनाया गया है यहां आने वाले संतों को ठहरने और सेवा के लिए दो कमरे भी तैयार किए गए हैं। यही नहीं मंदिर में चढऩे वाले फूलों से अगरबत्ती बनाकर आने वाले श्रद्धालुओं को समृद्धि का पाठ भी पढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। अगरबत्ती बनाने वाली मशीन भी लगाई जाएगी। 

 

Posted By: Anurag Gupta

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