यूपी में गेहूं खरीद पर ब्रेक! किसानों को करना होगा और इंतजार, सरकार ने बढ़ाई तारीख
उत्तर प्रदेश में गेहूं की सरकारी खरीद की शुरुआत अब तय समय से देर से होगी। पहले यह एक मार्च से शुरू होनी थी लेकिन मौसम के प्रभाव और कटाई में देरी के कारण इसे आगे बढ़ा दिया गया है। इस बार 2425 रुपये प्रति क्विंटल एमएसपी तय की गई है। राज्य में 6500 क्रय केंद्र बनाए जा रहे हैं जिनकी नई समय सारिणी जल्द जारी होगी।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। राज्य में गेंहू की सरकारी खरीद को अभी और इंतजार करना होगा। मौसम के प्रभाव से फसल के प्रभावित होने और कटाई शुरू न होने के चलते इसे आगे बढ़ा दिया गया है। पहले एक मार्च से सरकारी क्रय केंद्रों की शुरुआत होनी थी, परंतु अब इनके संचालन की समय सारिणी नये सिरे से जारी की जाएगी। तब तक खरीद की तैयारियों को पूर्ण कर लेने के निर्देश दिए गए हैं।
इस बार 2425 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर गेहूं खरीद की जानी है। वर्ष 2024 में 2275 रुपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं खरीदा गया था। पूर्व में एक मार्च से 15 जून तक गेहूं खरीद किए जाने के निर्देश दिए गए थे।
तापमान ने किसानों की बढ़ाई चिंता
बीते साल भी इसी अवधि में खरीद की गई थी, परंतु तब मार्च के पहले दो सप्ताह तक गेहूं की आवक शून्य रही थी। खरीद को आगे बढ़ाने के लिए इसको ही आधार बनाया गया है। वहीं इस बार बढ़े तापमान ने किसानों को चिंता में डाल रखा है। गेहूं की कटाई भी अभी शुरू नहीं हुई है।
यह काम इस माह के अंत में या अप्रैल में शुरू होने की संभावना जताई जा रही है। अपर आयुक्त खाद्य एवं रसद कामता प्रसाद सिंह ने गेहूं की खरीद को लेकर निर्देश जारी किए हैं कि सत्र 2025-26 में शासन द्वारा आगे जो तिथि निर्धारित की जाएगी, उसके अनुसार क्रय केंद्रों का संचालन किया जाएगा। राज्य में खरीद के लिए 6500 सरकारी क्रय केंद्र बनाए जा रहे हैं।
मौसम में बदलाव, गेहूं की सिंचाई से बचें किसान
वहीं, मौसम में आए बदलाव का असर फसलों पर भी पड़ेगा। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सलाह दी है कि किसान यदि गेहूं की सिंचाई करने जा रहे हैं तो अभी रुक जाएं। पूर्व संयुक्त कृषि निदेशक डा.सीपी श्रीवास्तव ने बताया कि एक दो दिनों में हल्की बारिश का अनुमान लगाया गया है।
ऐसे में सिंचाई से अधिक नमी होगी और गेहूं के गिरने की संभावना बढ़ जाएगी। किसान सरसों की कटाई जरूर कर लें। विशेषज्ञ डा. सत्येंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मौसम बदल रहा है। आम में पुष्पन बहुत अच्छा है। मौसम परिवर्तन से आम की फसल प्रभावित होगी।
आम की फसल पर लीफहापर कीट का प्रकोप बढ़ेगा। इससे बचाव के लिए पांच ग्राम सल्फर 80 प्रतिशत डब्ल्यूडीजी और इमिडाक्लोप्रिड 0.5 एमएल 17.8 प्रतिशत एसएल को एक लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिड़काव करें।
जिंक की कमी को दूर करने के लिए जिंक सल्फेट का तीन ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पूरे वर्ष दो से तीन बार छिड़काव करें। बदली और रुक-रुक कर हवा चलने से मौसम में काफी परिवर्तन है, जिससे तरोई, लौकी, कद्दू एवं खरबूजा की फसल पर कीट एवं रोग बढ़ने का खतरा बढ़ेगा।
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