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    Lucknow News: "ब्रह्मोस्त्र की वैश्विक मांग बढ़ी...", रक्षा मंत्री ने बताया- 17 से 18 देश कर रहे भारत से मांग

    Updated: Sun, 13 Jul 2025 09:19 PM (IST)

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लखनऊ में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल ब्रह्मोस्त्र की मांग 17-18 देशों से आ रही है। उन्होंने चंद्रभानु गुप्त को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि वे राष्ट्र के प्रति समर्पित थे राजनीति उनके लिए साधना थी। उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने उन्हें राजनीति में शुचिता का प्रतीक बताया। कार्यक्रम में गुप्त के जीवन और कार्यों पर प्रकाश डाला गया।

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    ब्रह्मोस्त्र की वैश्विक मांग बढ़ी रक्षा मंत्री ने बताया 17 से 18 देश कर रहे भारत से मांग।

    जागरण संवाददाता, लखनऊ। भारत अब रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता जा रहा है और इसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई देने लगी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार को लखनऊ में कहा कि हाल ही में आपरेशन सिंदूर के दौरान इस्तेमाल हुए भारत के ब्रह्मोस्त्र की मांग दुनिया के 17 से 18 देशों से आ रही है।

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    उन्होंने बताया कि लखनऊ में ब्रह्मोस्त्र का उद्घाटन हुआ और अब उसकी तकनीक व क्षमता देखकर दूसरे देश इसे खरीदने को इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि भारत के पास जब ऐसे आविष्कार होंगे तो न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत का सपना साकार होगा बल्कि रोजगार के भी व्यापक अवसर पैदा होंगे। इससे प्रदेश और देश दोनों तेजी से विकास करेंगे।

    रक्षा मंत्री ने यह बातें उस अवसर पर कहीं जब भारत सरकार के डाक विभाग की ओर से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वतंत्रता सेनानी और जननेता चंद्रभानु गुप्त की स्मृति में स्मारक डाक टिकट का विमोचन समारोह चल रहा था। आयोजन नेशनल पीजी कालेज आडिटोरियम में भारत सेवा संस्थान और मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।

    रविवार को रक्षा मंत्री ने कहा कि चंद्रभानु गुप्त केवल राजनेता नहीं थे वे राष्ट्र के प्रति समर्पित एक ऐसे सेवक थे, जिन्होंने राजनीति को साधन नहीं साधना माना। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक डाक टिकट नहीं बल्कि एक आदर्श पुरुष को राष्ट्रीय श्रद्धांजलि है।

    उन्होंने गुप्त से जुड़ा एक संस्मरण भी सुनाया जिसमें बताया कि एक चुनाव के दौरान गुप्त ने उन्हें गाड़ी में दाहिनी तरफ बिठाया और बिना कुछ कहे पांच हजार रुपये थमा दिए। राजनाथ बोले मैं उन्हें देखता रह गया कुछ ऐसे थे हमारे सीबी गुप्त।

    उन्होंने कहा कि जब देश आजाद हुआ संविधान लागू हुआ तब चुनौतियां बहुत थीं। लेकिन चंद्रभानु गुप्त जैसे नेताओं ने नीतियां बनाईं और उन्हें शांति से लागू किया। अंग्रेजों की हुकूमत को तोड़ते हुए उन्होंने कई आंदोलनों में हिस्सा लिया।

    1925 में लखनऊ में हुई काकोरी घटना के समय वे राम प्रसाद बिस्मिल और लाला लाजपत राय जैसे क्रांतिकारियों के साथ खड़े रहे। उन्होंने कहा कि इस घटना की 100वीं वर्षगांठ पर हर किसी को अपने स्तर पर कुछ करना चाहिए।

    ब्रजेश पाठक बोले गुप्त राजनीति में शुचिता के प्रतीक थे

    कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि चंद्रभानु गुप्त उत्तर प्रदेश की राजनीति में शुचिता के प्रतीक रहे। वे ऐसे जननायक थे जिन्होंने प्रदेश को स्थिर नेतृत्व दिया और सामाजिक सरोकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी।

    डा अशोक बाजपेयी ने बताया राष्ट्रभक्ति की मिसाल

    पूर्व राज्यसभा सदस्य और भारत सेवा संस्थान के अध्यक्ष अशोक कुमार बाजपेयी ने कहा कि गुप्त का जीवन राष्ट्रभक्ति का ज्वलंत उदाहरण है। वे न सिर्फ एक स्वतंत्रता सेनानी थे बल्कि उन्होंने प्रशासकीय कुशलता से प्रदेश को मजबूत आधार दिया।

    उज्ज्वल रमण सिंह बोले उनका दृष्टिकोण समावेशी था

    मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के अध्यक्ष और सांसद उज्ज्वल रमण सिंह ने कहा कि गुप्त का दृष्टिकोण समावेशी था। वे सभी वर्गों को साथ लेकर चलते थे और उनकी राजनीति का आधार सामाजिक न्याय और जनसेवा थी।

    सरल जीवन और शिक्षा प्रेम के प्रतीक रहे गुप्त

    राजनाथ सिंह ने बताया कि गुप्त ने कभी व्यक्तिगत स्वार्थ नहीं देखा। एक बार दस हजार प्रदर्शनकारियों को भूखा देखा तो भोजन की व्यवस्था करवा दी। वे शिक्षा प्रेमी थे। लखनऊ को रविंद्रालय और संग्रहालय जैसी धरोहरें उन्होंने दीं। वे मानते थे कि शिक्षा ही समाज को दिशा देती है।

    कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद वृजलाल, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, भारत सेवा संस्थान के महासचिव जेएन मित्र उत्तर प्रदेश सर्किल के चीफ पोस्ट मास्टर जनरल प्रणव कुमार डाक सेवाएं निदेशक आनंद कुमार सिंह और मोतीलाल मेमोरियल सोसाइटी के महामंत्री राजेश सिंह समेत कई विशिष्टजन मौजूद रहे।