लखनऊ, जेएनएन। विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित की लिखी दो पुस्तकों ‘मधु अभिलाषा’ व ‘हिंंदू स्वराज्य का पुनर्पाठ’ का विमोचन रविवार को किया गया। राज्यपाल राम नाईक सहित अन्य अतिथियों ने दोनों पुस्तकों का विमोचन कर ह्रदय नारायण दीक्षित के जीवन पर विस्तार से प्रकाश डालने के साथ उनको शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने कहा कि ह्रदय नारायण दीक्षित की लेखनी से ईष्र्या होती है, क्योंकि उनकी कलम बड़ी विनम्रता और सहजता से चलती है। लोक निर्माण विभाग के विश्वेश्वरैया सभागार में आयोजित समारोह में राजनेता, पत्रकार, साहित्यकार व स्तंभकार ह्रदय नारायण दीक्षित के जीवन संघर्षो पर आधारित एक लघु फिल्म भी दिखाई गई, जिसे देख वह भावुक हो उठे।

राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि मधु अभिलाषा व हंिदू स्वराज्य का पुनर्पाठ वास्तव में समाज को दृष्टि देने वाली सामयिक एवं प्रासंगिक पुस्तक है। उन्होंने कहा कि दीक्षित जी की अब तक 28 पुस्तकें व पांच हजार लेख प्रकाशित हो चुके हैं। जबकि मैंने अब तक केवल अपने संस्मरण पर आधारित पुस्तक चरैवेति! चरैवेति!! का संकलन किया है, इसलिए जानता हूं कि पुस्तक प्रकाशित करने में कितनी पीड़ा होती है, पर ह्रदय नारायण दीक्षित ने एक समय में अपनी जुड़वां पुस्तकों का प्रकाशन किया। ये दोनों पुस्तकें समाज को नई दिशा देने का काम करेंगी। उन्होंने कहा कि उन्नाव जिले में कई क्रांतिकारी, विद्वान व साहित्यकार हुए जिन्होंने उप्र के विकास में अहम भूमिका निभाई।

विधानसभा अध्यक्ष ह्रदय नारायण दीक्षित उसी परंपरा का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। राज्यपाल ने ह्रदय नारायण दीक्षित के साथ अपने पुराने संबंधों की याद ताजा करते हुए कहा कि हम दोनों आरएसएस व भाजपा के सदस्य रहे। शिवसेना के मुखपत्र सामना समाचार पत्र में जब उनका लेख प्रकाशित होता था तब मैं उनको पढ़ता था, फिर उप्र आकर उनको करीब से जानने का मौका मिला। उनको भूत, वर्तमान व भविष्य तीनों की जानकारी है, तीव्र स्मरण शक्ति के लिए उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड में होनना चाहिए। विशिष्ट अतिथि न्यायमूर्ति शबीहुल हसनैन ने कहा कि जब गांधी जी के आदर्शो को एक गांधीवादी लिखता है, तो उसकी सार्थकता कई गुना बढ़ जाती है।

ह्रदय नारायण दीक्षित ने कहा कि ऋगवेद में सबसे पहले मधु शब्द आया। मधु को गुप्त विद्या समझा जाता था, पर वेदों में रहस्य नहीं है। विधानसभा के प्रमुख सचिव प्रदीप दुबे ने ह्रदय नारायण दीक्षित की दोनों पुस्तकों के बारे में बताया। वहीं, समारोह की अध्यक्षता कर रहे राष्ट्रधर्म के संपादक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय ने कहा कि ह्रदय नारायण दीक्षित की लेखनी समाज को दिशा देने का काम करेगी।

 

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Posted By: Anurag Gupta

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