यूपी चुनाव के लिए भाजपा का बड़ा दांव, OBC के छोटे जातीय समूहों के बीच बड़े चेहरे उतारेगी पार्टी
भाजपा आगामी विधानसभा चुनावों में ओबीसी वोटबैंक पर विशेष ध्यान दे रही है, खासकर उत्तर प्रदेश में। पार्टी छोटे जातीय ...और पढ़ें
-1765724516160-1792031798966_m.webp)
तस्वीर- फाइल।
HighLights
भाजपा का पांच राज्यों में ओबीसी वोटबैंक पर फोकस।
छोटे जातीय समूहों में पैठ बनाने को बड़े नेता।
नवंबर से मंत्री, पदाधिकारी मैदान में उतरेंगे।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव में भाजपा सबसे ज्यादा फोकस ओबीसी वोटबैंक पर कर रही है।
ओबीसी मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्य सभा सदस्य अमरपाल मौर्य ने चुनावी राज्यों में दिग्गज नेताओं को विधान सभा क्षेत्रों में उतारकर पांच हजार से कम वोटों वाली यानी छोटे जातीय समूह वाली जातियों में पैठ बढ़ाने की रणनीति बनाया है। पार्टी जल्द ही नेताओं की सूची जारी करेगी, जो पिछड़े समूहों के बीच प्रवास कर एक-एक वोट जोड़ने की कसरत करेंगे।
वर्ष 2014 से 2024 के बीच सभी चुनावों में भाजपा की जीत में ओबीसी वोटबैंक का बड़ा योगदान रहा। हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में सपा के पीडीए की छतरी के नीचे कई ओबीसी जातियां खड़ी हो गईं, जिसका परिणाम ये रहा कि यूपी में भाजपा 62 से घटकर 33 सीटों पर सिमट गई।
इससे सबक लेते हुए भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष कुर्मी समाज से बनाया। मंत्रिमंडल विस्तार से लेकर प्रदेश एवं जिला स्तरीय संगठन तक ओबीसी समीकरण को अतिरिक्त वरीयता दी। ओबीसी समाज के महापुरुषों का कैलेंडर बनाया।
यह भी पढ़ें- भाजपा में बागी विधायकों की एंट्री से उलझे स्थानीय समीकरण, बीजेपी के नाराज चेहरों पर सपा-कांग्रेस की नजर
ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल को बिना देर किए राज्य सभा भेज दिया। लेेकिन दूसरी तरफ सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव भी ओबीसी एवं एससी समाज के बीच पकड़ बढ़ाने में पूरी ताकत से जुटे हैं।
ऐसे में भाजपा नेता अमरपाल मौर्य ने पिछले दिनों लखनऊ में बैठक कर समाज की हर उस जाति-उपजाति तक पहुंचने का टास्क दिया है, जो मुख्यधारा में कहीं पीछे रह गई है। उन्होंने प्रदेश एवं राष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय ओबीसी नेताओं की सूची बनाई है जिन्हें चुनाव से पहले दूर-दराज तक फैली छोटे जातीय समूहों के बीच पैठ बढ़ानी होगी।
नवंबर माह से पिछड़े समाज के मंत्री एवं संगठन के बड़े पदाधिकारी मैदान में उतार दिए जाएंगे। इस बार विस्तारकों में भी पिछड़े समाज की संख्या ज्यादा होगी। ओबीसी की 75 में से 30 से ज्यादा जातियों का हर विधान सभा क्षेत्र में पांच हजार से ज्यादा वोट है।
भाजपा अब तक मौर्य, कुर्मी, कुशवाहा, लोध, कश्यप, निषाद, राजभर, सैनी, पाल एवं प्रजापति के बड़े वोटबैंक पर फोकस करती रही है, लेकिन इनमें से कई जातियों ने बीच-बीच में नाराजगी जताकर पार्टी की धड़कन बढ़ाया है।
यह भी पढ़ें- लखनऊ स्नातक MLC चुनाव: 1.71 लाख वोटरों पर भाजपा की नजर, सांसद से लेकर बूथ प्रमुखों तक को सौंपी कमान
