विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भाजपा में बागी विधायकों की एंट्री से उलझे स्थानीय समीकरण, बीजेपी के नाराज चेहरों पर सपा-कांग्रेस की नजर

Published: Thu, 15 Oct 2026 05:30 AM (GMT+05:30)

सपा के तीन बागी विधायकों के भाजपा में शामिल होने से पार्टी के स्थानीय समीकरण उलझ गए हैं, जिससे पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ गया है।

News Article Hero Image

HighLights

  1. सपा के तीन बागी विधायक भाजपा में शामिल हुए।

  2. भाजपा के स्थानीय समीकरण उलझे, कार्यकर्ताओं में असंतोष।

  3. सपा-कांग्रेस नाराज भाजपा नेताओं को लुभाने की फिराक में।

राज्य ब्यूरो, लखनऊ। विधान सभा चुनाव से पहले सपा के तीन बागी विधायकों (गौरीगंज के राकेश प्रताप सिंह, गोसाईगंज के अभय सिंह एवं कालपी के विनोद चतुर्वेदी) को भगवा पटका पहनाने से पार्टी के स्थानीय समीकरण उलझ सकते हैं।

तीनों सीटों पर भाजपा से टिकट पाने की अभिलाषा में वर्षों से पसीना बहा रहे कार्यकर्ताओं की डगर कठिन होगी, वहीं वक्त की नजाकत भांपते हुए भाजपा के नाराज चेहरों पर सपा और कांग्रेस डोरे डाल सकती है। तीनों विधायकों के पाला बदलने से अंबेडकरनगर, अयोध्या, कानपुर, जालौन, उरई एवं अमेठी के आसपास कई विधान सभा सीटों के समीकरणों पर असर पड़ेगा।

अयोध्या की गोसाईगंज सीट से अभय सिंह ने 2022 में सपा के टिकट पर चुनाव लड़कर इंद्रप्रताप तिवारी उर्फ खब्बू की पत्नी आरती तिवारी को हराकर 2017 का बदला लिया था। 2017 के चुनाव में भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर खब्बू ने सपा के अभय सिंह को हराया था। अब अभय ने भाजपा का दामन थाम लिया है। दोनों के बीच लंबे समय से राजनीतिक ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत अदावत भी रही है। ऐसे में दोनों को एक पाले में संभालना भाजपा के लिए कठिन होगा।

संतुलन साधना होगा कड़ी परीक्षा

खब्बू तिवारी का दो जिलों की कई सीटों पर असर माना जाता है। वो सपा और बसपा के टिकट पर भी चुनाव लड़ चुके हैं। ऐसे में अन्य दल उनमें संभावनाएं तलाश सकते हैं। गौरीगंज सीट से तीन बार सपा के टिकट पर विधायक चुने गए राकेश प्रताप सिंह ने 2022 में भाजपा के चंद्रप्रकाश मिश्र उर्फ मटियारी को हराया था। अब राकेश भी भाजपाई बन गए हैं, ऐसे में पार्टी के सामने दोनों के बीच संतुलन साधने की कड़ी परीक्षा है।

यहां से मटियारी 2007 में बसपा के टिकट पर विधायक रह चुके हैं। सपा नाराज चेहरों को टिकट का तोहफा देने की गुंजाइश तलाशेगी। यह सीट अमेठी संसदीय क्षेत्र में होने की वजह से विशेष राजनीतिक अहमियत रखती है। कालपी से सपा के टिकट पर विधायक बने विनोद चतुर्वेदी के भाजपाई बनने के बाद अब जालौन की कालपी और उरई विधानसभा क्षेत्रों के समीकरण बदलेंगे।

यह भी पढ़ें- फांसी की सजा के बाद कैदी नंबर 395 और 396 बने साहिल-मुस्कान, जेल पहुंचते ही बिलख पड़े दोनों गुनहगार

यहां से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ने की मंशा पाले कार्यकर्ताओं का मलाल छलकने लगा है। चतुर्वेदी 2007 में कांग्रेस के टिकट पर उरई सदर सीट से विधायक रह चुके हैं। वहीं, सपा के लिए भी इन क्षेत्रों में नए सिरे से प्रत्याशी की तलाश के साथ संगठन को मजबूत रखने की भी चुनौती होगी।