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फांसी की सजा के बाद कैदी नंबर 395 और 396 बने साहिल-मुस्कान, जेल पहुंचते ही बिलख पड़े दोनों गुनहगार

Published: Thu, 15 Oct 2026 12:01 AM (IST)Updated: Thu, 15 Oct 2026 12:27 AM (IST)

मेरठ में फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी अब कैदी नंबर 395 और 396 ...और पढ़ें

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

इस फोटो को AI के माध्यम से तैयार किया गया है।

HighLights

  1. साहिल और मुस्कान को मिली फांसी की सजा

  2. अब कैदी नंबर 395 और 396 के नाम से पहचान

  3. निचली अदालत के फैसले को हाईकोर्ट में देंगे चुनौती

जागरण संवाददाता, मेरठ। अदालत से फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद जिला कारागार में साहिल शुक्ला और मुस्कान रस्तोगी की पहचान बदल गई है। अब साहिल को कैदी नंबर 395 और मुस्कान को कैदी नंबर 396 से जाना जाएगा।

अदालत का फैसला जेल पहुंचने के बाद दोनों को उनके कैदी नंबर और कपड़े मुहैया करा दिए गए हैं। उनकी बैरक भी बदल दी गई है। जल्द ही दोनों को सेंट्रल जेल भेजा जाएगा। सजा के मद्देनजर मुस्कान जेल में पहले से ही नवरात्र की पूजा कर रही थीं।

शाम सवा चार बजे अदालत से मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुना दी गई। जेल अधीक्षक वीरेश राज शर्मा ने बताया कि सजा सुनते ही वीडियो कांफ्रेसिंग पर ही दोनों जोर-जोर से रोने लगे थे। वह बोले कि उन्हें उम्मीद थी कि अदालत न्यायपूर्ण कार्रवाई करते हुए उन्हें उम्रकैद की सजा सुना देगी। फांसी की सजा सुनने के बाद दोनों बदहवास हो गए थे।

वहां मौजूद स्टाफ ने मुस्कान की गोद से बेटी को पकड़ा। उसके बाद दोनों की तत्काल काउंसलिंग की गई। बताया गया कि अभी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी अपना पक्ष रख सकते है। जेल प्रशासन की तरफ से उन्हें हाईकोर्ट में पक्ष रखने के लिए अधिवक्ता कराया जाएगा।

उसके बाद साहिल और मुस्कान ने कहा कि वह निचली अदालत के निर्णय को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे। हालांकि मुस्कान और साहिल ने बुधवार की रात जेल में खाना नहीं खाया। उसकी बेटी को भी अन्य महिला बंदियों ने ही दूध पिलाया है।

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165 पेज में छिपे है मुस्कान और साहिल के गुनाह 

पुलिस एक हजार पन्नों की चार्जशीट में मुस्कान और साहिल को आरोपित बनाया था, जबकि अदालत ने 165 पन्नों के निर्णय में दोनों को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा दी है। जिला जज अरविंद कुमार मिश्र ने दोनों को फांसी की सजा सुनाने के बाद पैन को तोड़ दिया। उक्त पैन को भी निर्णय की फाइल में ही सुरक्षित रखा है।