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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे May 25, 2017 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

सहारनपुर को लेकर भिड़ीं भाजपा-बसपा, माया और केशव में आरोप प्रत्यारोप

By Nawal MishraEdited By:
Published: Thu, 25 May 2017 08:26 PM (IST)Updated: Fri, 26 May 2017 12:25 AM (IST)

सहारनपुर हिंसा पर बसपा और भाजपा में रार है। बसपा ने भीम आर्मी से ताल्लुक से इन्कार किया तो भाजपा ने मायावती को दंगे का जिम्मेदार ठहराया है।

सहारनपुर को लेकर भिड़ीं भाजपा-बसपा, माया और केशव में आरोप प्रत्यारोप
सहारनपुर को लेकर भिड़ीं भाजपा-बसपा, माया और केशव में आरोप प्रत्यारोप

लखनऊ (जेएनएन)। सहारनपुर के जातीय टकराव पर बसपा और भाजपा में रार छिड़ गई है। बसपा इस बात की सफाई देने में लगी है कि भीम आर्मी से उसका कोई ताल्लुक नहीं और उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने दंगे के लिए सीधे मायावती को जिम्मेदार ठहराया है। बसपा अध्यक्ष मायावती ने कहा कि बसपा के छोटे-बड़े किसी पदाधिकारी का भीम आर्मी से कोई संबंध नहीं। उन्होंने इन्कार किया कि उनके भाई और पार्टी उपाध्यक्ष आनन्द कुमार का भीम आर्मी से संबंध है। मायावती ने कहा कि बसपा इस प्रकार की घिनौनी साजिश का खंडन करते हुए इसकी निंदा करती है।

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माया ने जड़ा भीम आर्मी पर शोषण का आरोप

मायावती के अनुसार सहारनपुर जाने पर उन्हें पता चला कि भीम आर्मी के लोगों ने खुद को बसपा का शुभ चिंतक बताकर बाबा साहब अंबेडकर जयंती पर भोले भाले लोगों का आर्थिक शोषण किया था। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि वास्तव में भीम आर्मी भाजपा के संरक्षण में पलने वाला संगठन है और इसीलिए इसके नेताओं पर अब तक कार्रवाई नहीं की गई। मायावती का कहना है कि भारी खतरे की आशंका के बावजूद उन्होंने सहारनपुर का दौरा किया। भाईचारा और सौहार्द्र को ध्यान में रखते हुए उन्होंने पार्टी के प्रवक्ता पद से उम्मेद सिंह और फैजान को अलग कर दिया है ताकि जातिवादी तत्व उनकी बातों को तोड़ मरोड़कर पेश न कर सकें। 

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दौलत की राजनीति फेल होने पर हिंसा : भाजपा 

भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता डॉ. चंद्रमोहन ने बसपा सुप्रीमों के आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि दौलत की राजनीति फेल होने पर मायावती ने सहारनपुर कांड को प्रायोजित किया। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश की जनता ने 2014 और 2017 में जातिवाद को समाप्त कर भाजपा के पक्ष में प्रचंड बहुमत का जनादेश दिया तो मायावती अपना अस्तित्व समाप्त होने से डर गईं। वह बौखलाहट में जातीय दीवार खड़ी कर राजनीतिक रोटी सेंक रही हैं।

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