जेल से रिहा होते ही गिरफ्तार हुए आजम खां, धनशोधन मामले में रिमांड पर लेकर पूछताछ करेगी ईडी की टीम
जेल से रिहा होते ही समाजवादी पार्टी के नेता आजम खां को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े धनशोधन मामले में गिरफ्तार कर लिया।

HighLights
आजम खां को जेल से रिहा होते ही ईडी ने दबोचा।
जौहर विश्वविद्यालय धनशोधन मामले में हुई यह गिरफ्तारी।
ईडी अब रिमांड पर लेकर करेगी गहन पूछताछ।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। रामपुर जेल से करीब 11 महीने बाद रिहा होते ही समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद आजम खां को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार शाम गिरफ्तार कर लिया। जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण में धनशोधन के आरोपों से जुड़े मामले में ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय की 16 सदस्यीय टीम चार वाहनों से रामपुर जेल पहुंची थी।
गिरफ्तारी के बाद आजम खां को गाजियाबाद ले जाया गया, जबकि उनके बेटे अब्दुल्ला आजम रिहा हो गए। ईडी की टीम ने साल वर्ष 2019 दर्ज ईसीआइआर में गाजियाबाद की अदालत से गिरफ्तारी वारंट लेकर पहुंची थी।
आजम खां की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब 28 अक्टूबर को ईडी जौहर विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों से जुड़ी 426.46 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क कर चुकी है।
विश्वविद्यालय परिसर की कुर्क संपत्ति की कीमत 1170 करोड़
ईडी ने विश्वविद्यालय परिसर की जमीन और 59 भवनों की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि वैध स्रोतों से 72.63 करोड़ रुपये के खर्च का ही हिसाब मिल सका। शेष 426.46 करोड़ रुपये के खर्च का स्रोत स्पष्ट नहीं होने पर संपत्तियों को कुर्क किया गया। इनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1,170 करोड़ रुपये बताया गया है।
ईडी की जांच मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट को मिले चंदे, बैंक खातों में हुए लेनदेन और विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई रकम पर केंद्रित है। एजेंसी ने धनशोधन निवारण अधिनियम की धारा 66(2) के तहत जानकारी साझा करते हुए रामपुर के अजीमनगर और कोतवाली थानों में दर्ज प्राथमिकी का संदर्भ दिया है।
लोक निर्माण विभाग के ठेकों से भी जुड़ा दूसरा सिरा
ईडी की शिकायत पर अजीमनगर थाने में 13 अक्टूबर को दर्ज मुकदमे में उपलब्ध दस्तावेजों और बयानों के आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। इस मामले में ईडी की तरफ से साक्ष्य भी पुलिस को उपलब्ध कराए गए है।
जांच का दूसरा सिरा करीब 186 करोड़ रुपये के लोक निर्माण विभाग के ठेकों से भी जुड़ा है। ईडी के अनुसार, संबंधित कंपनी के प्रबंध निदेशक ने बयान में ठेका राशि का 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए सामग्री खरीदने में इस्तेमाल किए जाने की बात कही थी।
इसके अलावा स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से करीब 6.60 करोड़ रुपये के कार्यों और जल निगम के माध्यम से कराए गए निर्माण की भी जांच की जा रही है। इन कार्यों के भुगतान और वित्तीय दस्तावेजों के मिलान से सरकारी धन तथा विश्वविद्यालय के निर्माण के बीच कथित संबंधों की पड़ताल की जाएगी।
रिमांड पर लेकर पूछताछ की तैयारी
ईडी की टीम आजम खां को गाजियाबाद स्थित संबंधित अदालत में पेश कर पुलिस कस्टडी रिमांड मांग करेेगी। रिमांड की अवधि अदालत तय करेगी। रिमांड मिलने पर एजेंसी उनसे ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों, निर्माण पर खर्च हुई रकम और धन के स्रोतों के संबंध में पूछताछ कर सकती है। जरूरत पड़ने पर उन्हें पूछताछ के लिए लखनऊ स्थित ईडी कार्यालय भी लाया जा सकता है।
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