लखनऊ, जागरण संवाददाता। कोरोना महामारी में पूरी दुनिया ने न सिर्फ भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति को पहचान दिलाई, बल्कि विश्व में एक अलग मुकाम हासिल किया। प्रांतीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ ने कोरोना से बचाव में आयुर्वेदिक दवाओं पर डाक्टरों के अनुभव विषय पर वर्चुअल संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन में चिकित्सकों ने कोविड मरीजों पर आयुर्वेदिक औषधियों के सकारात्मक प्रभावों पर चर्चा की।राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय लखनऊ के प्रधानाचार्य डा. प्रकाश चंद्र सक्सेना और मेडिकल अफसर डा. धर्मेंद्र ने कहा कि उत्तर प्रदेश आयुर्वेद विभाग आयु रक्षा किट, आयुष काढ़ा, आयुष 64 जैसी महत्वपूर्ण दवाएं वितरित कर रहा है। यह आगामी चुनाव में ड्यूटी करने वाले फ्रंट लाइन वर्कर को भी दिये जाएंगे।

अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान नई दिल्ली की निदेशक प्रो. तनुजा नेसरी ने बताया कि इस पूरी महामरी के दौरान आयुष विभाग और अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान ने कोरोना वायरस के प्रभाव को कम करने के लिए तमाम प्रयास किए। उस दौरान इलाज के लिए भर्ती हुए किसी भी मरीज की यहां मृत्यु नहीं हुई। यहां भर्ती 94 फीसद कोरोना मरीजों का इलाज आयुर्वेद से ही किया गया, जिसमें आयुर्वेदिक दवाएं, योग और प्राणायाम शामिल है।

Edited By: Vikas Mishra