लखनऊ, जेएनएन। राजधानी में ऑक्सीजन की किल्लत किस कदर बढ़ गई है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि गुरुवार को रात के वक्त सिविल अस्पताल में कुछ लोग ऑक्सीजन सिलिंडर लूटने की फिराक में प्लांट की रेकी करते देखे गए। वह अस्पताल के कुछ लोगों से ऑक्सीजन प्लांट और उसके अंदर रखे गए सिलिंडरों के बारे में जानकारी जुटा रहे थे। इस दौरान जब कर्मचारियों को शक हुआ तो उन्होंने इसकी जानकारी निदेशक को दी। सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ सुभाष चंद्र सुंदरियाल ने मामले की गंभीरता को भांपते हुए तत्काल पुलिस बुला ली। संदिग्ध लोग इस बीच पुलिस आने की आहट पाकर मौके से भाग निकले। इस घटना की चर्चा अस्पताल में आग की तरह फैली। उसके बाद से ही पूरे परिसर में अफरा-तफरी मची हुई है। ऑक्सीजन प्लांट पर फिलहाल 24 घंटे के लिए पुलिस तैनात कर दी गई है।

दरअसल राजधानी में कोरोना संक्रमण के चलते मरीजों की हालत लगातार गंभीर हो रही है। उन्हें अस्पतालों में भर्ती नहीं मिल पा रही है। ज्यादातर मरीजों में ऑक्सीजन लेवल 90 से नीचे जा रहा है, जिससे उनकी जान को खतरा पैदा हो रहा है। अभी तक वह बाजारों से व ऑक्सीजन प्लांट से किसी तरीके से सिलिंडर का जुगाड़ कर ले रहे थे, लेकिन दो दिन से सरकार ने ऑक्सीजन प्लांट पर अर्धसैनिक बलों की तैनाती कर दी है। ऐसे में अब आमजनों को ऑक्सीजन सिलिंडर नहीं मिल पा रहा है। बृहस्पतिवार को ऑक्सीजन नहीं मिलने से लखनऊ में आधा दर्जन से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। ऐसे में लोग अपनों के प्राण बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को तैयार हैं। यह भी घटना उसी का एक परिणाम मानी जा रही है।

निदेशक डॉ सुभाष चंद्र सुंदरियाल ने बताया कि घटना करीब 8:00 से 9:00 बजे की है। उनके कर्मचारी अखिलेश श्रीवास्तव ने बताया कि पांच से छह लोग परिसर में ऑक्सीजन सिलिंडर होने के लोकेशन व प्लांट के बारे में जानकारी जुटा रहे थे। इसके बाद वह वहीं इधर-उधर घूम कर रेकी करने लगे। उन्होंने बताया कि हमारे यहां छोटा ऑक्सीजन प्लांट लगा है, लेकिन बैकअप के लिए ऑक्सीजन सिलिंडर भी रखे गए हैं। ऐसे में यदि रात के वक्त ऐसी घटना हो जाती है तो मरीजों की जान को खतरा हो सकता था। इसलिए एहतियात के तौर पर पुलिस बुलाई गई। उल्लेखनीय है कि अभी एक दिन पहले बालागंज क्षेत्र में एक मरीज को लेने जा रहे एंबुलेंस कर्मियों को दूसरे मरीज के परिवारजनों ने हाईजैक कर लिया था। मगर दोनों ही मरीजों की जान नहीं बच सकी थी। 

Edited By: Anurag Gupta