Allahabad High Court : कोर्ट परिसर में बने चैंबर में अधिवक्ता चला रहे थे विवाह केंद्र, हाई कोर्ट ने कराया खाली
Allahabad High Court Lucknow Bench वजीरगंज थाने की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि चैंबर के दरवाजे पर राघवेन्द्र मिश्रा हिन्दू व विपिन चौरसिया के नाम व मोबाइल नंबर लिखे हुए थे संपर्क करने पर उक्त राघवेन्द्र मिश्रा हिन्दू ने स्वीकार किया कि वे लोग वहां शादियां करवाते हैं।

विधि संवाददाता, लखनऊ : इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ के आदेश के अनुपालन में जिला न्यायालय के प्रशासिनक विभाग ने पुराने हाई कोर्ट परिसर, कैसरबाग की सीएससी बिल्डिंग के चैंबर नंबर 31 से अधिवक्ता राघवेंद्र मिश्रा हिन्दू व विपिन चैरसिया का चेम्बर खाली करा लिया। उक्त चैंबर में विवाह केंद्र चलाया जा रहा था। चैंबर में बाकायदा तोरण द्वार बनाकर उसकी फूलों से सजावट की गई थी।
न्यायमूर्ति संगीता चंद्रा व न्यायमूर्ति बीआर सिंह की पीठ ने शिवानी यादव व अरूण कुमार यादव की ओर से दाखिल एक याचिका पर सुनवाई की। याचिका में कहा गया था कि दोनों ने अपनी मर्जी से विवाह कर लिया है लेकिन शिवानी के पिता इस विवाह से सहमत नहीं हैं अतः उनके इशारे पर पुलिस उन्हें परेशान कर रही है। याचिका में मांग की गयी थी कि याचियों को सुरक्षा प्रदान की जाये।
सुनवाई के दौरान शिवानी और उसके पिता ने कोर्ट को बताया गया कि शिवानी ने अरूण से कोई शादी नहीं की है और जो कोर्ट में जो कागजात पेश किये जा रहे हैं वह फर्जी हैं। इसके बाद कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए याचिका खारिज कर दी और गलत हलफनामा पेश करने के लिए मुकदमा चलाने के लिए संबधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां संदर्भित कर दिया। इस बीच कोर्ट ने विवाह से संबधित कागजात बनाने के लिए चैंबर नंबर 31 का उपयेाग करने के कारण उक्त चेम्बर खाली करा लिया।
कोर्ट ने गुरूवार को कहा कि चैंबर वकीलों को कानून का व्यवसाय करने में सुविधा प्रदान करने के लिए आवंटित हैं और सारे तथ्यों से साफ है कि वहां विवाह केंद्र चलाया जा रहा है। विवाह केंद्र के लिए चैंबर में पूरी व्यवस्था की गयी है और बाहर दीवार पर भी ब्रह्मास्त्र लीलल एसोसियेट व प्रगतिशील हिंदू समाज न्याय लिखा है। यहां से कथित विवाह प्रमाणपत्र बनाये जा रहे हैं।
कोर्ट ने सम्बंधित डीसीपी व वजीरगंज थाने को चैंबर नंबर 31 का निरीक्षण का तत्काल रिपोर्ट देने का आदेश दिया। वजीरगंज थाने की ओर से दी गई रिपोर्ट में बताया गया कि चैंबर के दरवाजे पर राघवेन्द्र मिश्रा हिन्दू व विपिन चौरसिया के नाम व मोबाइल नंबर लिखे हुए थे, संपर्क करने पर उक्त राघवेन्द्र मिश्रा हिन्दू ने स्वीकार किया कि वे लोग वहां शादियां करवाते हैं। हाई कोर्ट के आदेश के बाद चैंबर खाली कराकर वहां की दीवार के बाहर लिखे गए सभी निर्देशों को पेंट से मिटा दिया गया है।
न्यायालय ने यह भी पाया कि वहां होने वाले विवाह की वैधता पर संदेह है, क्योंकि हिंदू विवाह की अनिवार्य रस्म ‘सप्तपदी’ निभाए जाने के प्रमाण नहीं हैं। सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया कि जिस युवती की ओर से अपनी पत्नी बताते हुए याचिका दाखिल की गई थी, उसने कथित पति अरुण यादव के दावे से इंकार कर दिया। इस पर न्यायालय ने अरुण यादव के खिलाफ झूठा हलफनामा दाखिल करने के आरोप में आपराधिक वाद चला जाने का भी आदेश दिया है।
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