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    Akash Anand: मायावती ने आकाश आनंद से क्यों वापस लिया राजनीतिक उत्तराधिकार, क्या शब्दों के चयन पर नाराज थीं बसपा सुप्रीमो?

    बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटाने के साथ ही उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय भी वापस ले लिया है। माना जा रहा है कि जिस तरह से वह पार्टी प्रत्याशियों की चुनावी जनसभाओं में आक्रामकता दिखाते हुए मोदी-योगी सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे उनके शब्दों के चयन पर बसपा प्रमुख नाराज थी।

    By Jagran News Edited By: Shivam Yadav Updated: Wed, 08 May 2024 04:03 PM (IST)
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    Akash Anand: मायावती ने आकाश से क्यों वापस लिया राजनीतिक उत्तराधिकार?

    राज्य ब्यूरो, लखनऊ। बसपा प्रमुख मायावती ने भतीजे आकाश आनंद को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर के पद से हटाने के साथ ही उन्हें अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय भी वापस ले लिया है।

    मायावती का कहना है कि पार्टी व मूवमेंट के व्यापक हित में पूर्ण परिपक्वता आने तक आकाश को दोनों अहम जिम्मेदारियों से अलग किया जा रहा है। आकाश के पिता आनंद कुमार पहले की तरह पार्टी में अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे। आनन्द पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं।

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    उत्तराधिकारी घोषित होने के बाद बढ़ी थी सक्रियता

    बसपा प्रमुख ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद पहली बार आकाश को पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर (राष्ट्रीय समन्वयक) का दायित्व सौंपा था। लंदन से एमबीए किए आकाश वैसे तो नेशनल कोऑर्डिनेटर बनाए जाने के बाद से ही दूसरे राज्यों में सक्रिय थे, लेकिन बसपा प्रमुख के राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित होने के बाद से उनकी सक्रियता कुछ ज्यादा ही बढ़ गई थी। 

    उत्तराधिकारी बनाए जाने के साथ ही मायावती ने उन्हें उत्तराखंड व उत्तर प्रदेश के बाहर पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन 18वीं लोकसभा चुनाव में आकाश की उत्तर प्रदेश में भी बहुत सक्रियता दिखी।

    मंगलवार रात 9.37 बजे मायावती ने इंटरनेट मीडिया एक्स पर एक के बाद एक तीन ट्वीट कर आकाश आनंद को नेशनल कोऑर्डिनेटर और अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाने की संबंधी पांच माह पुरानी घोषणा को वापस लेने की जानकारी दी। 

    जनसभाओं में आकाश की आक्रामकता

    आकाश आनंद को अचानक दोनों जिम्मेदारियों से हटाने के पीछे तमाम तरह की चर्चा है लेकिन माना जा रहा है कि जिस तरह से वह पार्टी प्रत्याशियों की चुनावी जनसभाओं में आक्रामकता दिखाते हुए मोदी-योगी सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे, उनके शब्दों के चयन पर बसपा प्रमुख नाराज थी। 

    पार्टी के नेताओं का कहना है कि बहन जी विपक्ष पर भी हमला बोलते वक्त भी राजनीतिक शुचिता का पूरा ध्यान रखती हैं, लेकिन छह अप्रैल से प्रदेश में चुनावी जनसभाएं कर रहे आकाश अपने भाषण में जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे थे, उससे मायावती असहज महसूस कर रही थी।

    रैलियां रद्द कर आकाश को दिल्ली भेजा

    बताया जाता है कि आकाश को भाषा में संयम बरतने के लिए कहा भी गया, लेकिन वह नहीं रुके। ऐसे में मायावती की नाराजगी तब बढ़ गई जब उन्होंने आकाश को सीतापुर की रैली में प्रदेश सरकार को गद्दारों और आतंकवादियों की सरकार बताने से लेकर जूता मारने जैसी भाषा सुनी।

    आकाश के दिए गए भाषण को आचार संहिता का उल्लंघन मानते हुए उनके साथ ही पार्टी के चार लोकसभा प्रत्याशियों पर भी एफआईआर दर्ज होने के बाद तो मायावती ने उनकी सभी रैलियां ही रद्द कर दी। आकाश को प्रदेश से बाहर नई दिल्ली भेज दिया।

    पिछले साल की गई थी घोषणा

    उल्लेखनीय है कि बहुजन समाज को लेकर डॉ. आंबेडकर के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए कांशीराम की राजनीतिक विरासत संभालने वाली मायावती ने पिछले वर्ष 10 दिसंबर को अपने छोटे भाई आनंद कुमार के 29 वर्षीय बेटे आकाश को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी बनाए जाने की घोषणा की थी।

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