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308 पहियों वाले ट्रक का काम पूरा, कुंभी चीनी मिल पहुंचा बेल्जियम का विशालकाय साइक्लाइजेशन रिएक्टर

Published: Thu, 22 Oct 2026 06:32 PM (IST)

पांच महीने और 1600 किलोमीटर का सफर तय कर 308 पहियों वाला ट्रक 200 टन वजनी साइक्लाइजेशन रिएक्टर वेसल को लखीमपुर खीरी की कुंभी चीनी मिल तक ले आया है।

कुंभी चीनी मिल के गेट पर पहुंच बेल्जियम से आया बेसल। जागरण

कुंभी चीनी मिल के गेट पर पहुंच बेल्जियम से आया बेसल। जागरण

HighLights

  1. 308 पहियों वाले ट्रक ने 1600 किमी का सफर तय किया।

  2. 200 टन वजनी साइक्लाइजेशन रिएक्टर कुंभी चीनी मिल पहुंचा।

  3. यह रिएक्टर बायोप्लास्टिक (पीएलए) उत्पादन में सहायक होगा।

जागरण संवाददाता, लखीमपुर। पूरे देश में चर्चा का विषय बने 308 पहियों वाले ट्रक का काम अंतत: आज गुरुवार को पूरा हो गया। पांच महीने में तीन राज्यों से होकर लगभग 1600 किलोमीटर का सफर तय करने के बाद 200 टन वजनी विशालकाय साइक्लाइजेशन रिएक्टर वेसल कुंभी चीनी मिल पहुंच गया। 308 पहियों वाले हाइड्रोलिक ट्रेलर पर लदे इस विशाल वेसल की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर पिछले कई महीनों से वायरल हो रही थी।

यह रिएक्टर 15 मई को बेल्जियम से समुद्री जहाज के जरिए ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंचा था। यहां से इसे सड़क मार्ग से कुंभी चीनी मिल तक लाया गया। भारी-भरकम मशीन को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए विशेष हाइड्रोलिक ट्रेलर का इस्तेमाल किया गया।

इस दौरान ओडिशा, झारखंड और बिहार से होते हुए यह उत्तर प्रदेश पहुंचा। प्रदेश में चंदौली, वाराणसी, गाजीपुर, बलरामपुर और श्रावस्ती सहित विभिन्न मार्गों से गुजरते हुए वेसल ने कुंभी तक का सफर पूरा किया।

चीनी मिल परिसर में रिएक्टर के पहुंचने पर यूनिट हेड डॉ. सुनील कुमार यादव ने विधिवत पूजन और माल्यार्पण कर उसका स्वागत किया। इस विशाल मशीन के पहुंचने से मिल में प्रस्तावित नई तकनीक आधारित उत्पादन प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

साइक्लाइजेशन रिएक्टर प्लांट की प्रमुख मशीन

डॉ. सुनील कुमार यादव ने बताया कि साइक्लाइजेशन रिएक्टर प्लांट की प्रमुख मशीन है। करीब 110 फीट लंबी और 26 फीट चौड़ी इस मशीन में चीनी से तैयार लैक्टिक एसिड का इस्तेमाल कर पॉलीलैक्टिक एसिड (पीएलए) बनाया जाएगा। इससे पर्यावरण के अनुकूल प्लास्टिक तैयार की जा सकेगी।

उन्होंने बताया कि पीएलए आधारित प्लास्टिक का उपयोग पारंपरिक प्लास्टिक के विकल्प के रूप में किया जा सकता है। उपयुक्त परिस्थितियों में यह सामग्री लगभग छह महीने में जैविक रूप से विघटित हो सकती है। इससे प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के प्रयासों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

चीनी मिल प्रशासन ने मशीन स्थापित कराने की शुरू की तैयारी

बहुप्रतीक्षित मशीन गुरुवार को सकुशल कुंभी में निर्माणाधीन बायो पालिमर प्लांट पहुंचते ही मिल प्रशासन ने उसे स्थापित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस प्लांट में गन्ने से पर्यावरण अनुकूल पालीलैक्टिक एसिड प्लास्टिक का उत्पादन होगा। इस अत्याधुनिक प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता करीब 80 हजार टन बताई जा रही है।

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बायोप्लास्टिक प्लांट के हेड ललित जैन ने बताया कि करीब 200 टन वजन की इस मशीन का पिछले करीब छह माह से आने का इंतजार कर रहे थे,जो आज पूरा हो गया। अब इस मशीन को स्थापित कराने का काम शुरू किया जाएगा, जिससे अगले माह से प्लांट का शुभारंभ किया जा सके।

बायप्रॉडक्ट से बनेंगे डिस्पोजेबल प्लेट्स, कप और कटलरी

पालीलैक्टिक एसिड (पीएलए) पालीलैक्टिक एसिड एक जैव अवक्रमणीय बायोप्लास्टिक है। इसका निर्माण नवीनीकरण जैविक संसाधन गन्ना, मक्का व चीनी उद्योग के उप उत्पादों से डिस्पोजेबल प्लेट्स, कप और कटलरी (चम्मच-कांटे), पानी व अन्य पेय पदार्थों की बोतल, स्टेशनरी उत्पाद, कैरी बैग्स एवं पैकेजिंग मटेरियल निर्माण होगा।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह एक ऐसा बायोप्लास्टिक (जैव-अवक्रमणीय) है जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना पूरी तरह से नष्ट हो जाता है। जबकि पारंपरिक प्लास्टिक साल-दर-साल मिट्टी और पानी में सड़ता नहीं है और जहरीले तत्व छोड़ता है। मगर, पीएलए से बने उत्पाद इस्तेमाल के बाद फेंकने पर तीन से छह माह में विघटित होकर वापस मिट्टी में मिल जाते हैं।

पीएलए प्लांट शुरू करने के लिए जिस मशीन का इंतजार था, वह अब आ चुकी है।जिसे जल्द ही स्थापित कराया जाएगा, जिससे अगले माह प्लांट का शुभारंभ हो सके।

-सुनील कुमार यादव, मुख्य महाप्रबंधक कुंभी चीनी मिल

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