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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 02, 2013 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

आदिवासियों ने बुलंद की हक की आवाज

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Published: Mon, 02 Dec 2013 12:22 AM (IST)Updated: Mon, 02 Dec 2013 12:23 AM (IST)

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पलिया कलां: रविवार को आदिवासियों ने अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन के बैनर तले होने वाले दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन की शुरूआत की। जिसमें शहर में वनाधिकार कानून लागू करने की मांग को लेकर विशाल रैली निकाली गई और अपनी आवाज को बुलंद किया। तत्पश्चात उपजिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। इसके उपरांत सम्मेलन स्थल पर ध्वजारोहण कर सम्मेलन का उद्घाटन किया गया और सास्कृतिक कार्यक्रम हुए।

रविवार को अखिल भारतीय वन जन श्रमजीवी यूनियन की ओर से दुधवा रोड स्थित दो दिवसीय क्षेत्रीय सम्मेलन की शुरूआत की गई। जिसमें पहले दिन वनाधिकार कानून को लागू करने के लिए शहर में विशाल रैली निकाली गई। सम्मेलन स्थल से शुरू हुई रैली दुधवा रोड, दुधवा तिराहा, संपूर्णानगर रोड, पुराना बस अड्डा, बाइपास रोड, कमल चौराहा, भीरा रोड, स्टेशन चौराहा, स्टेशन रोड, संपूर्णानगर रोड और दुधवा रोड होते हुए वापस सम्मेलन स्थल पर आकर समाप्त हुई। रैली में आदिवासी समाज के पुरूष व महिलाएं हाथों में बैनर लेकर चल रहे थे और वनाधिकार कानून से जुड़े नारे लगाते चल रहे थे। रैली के समापन के उपरांत ध्वजारोहण कर सम्मेलन का विधिवत उद्घाटन किया गया। तत्पश्चात सांस्कृतिक कार्यक्रम हुए। जिसमें अलग-अलग प्रदेशों व जनपदों से आए आदिवासी समाज से जुड़े लोगों ने अपनी संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तुत किए। इस मौके पर यूनियन की राष्ट्रीय जनरल काउंसिल के सदस्य रजनीश, रामचंद्र राणा, रूकमा देवी, महासचिव अशोक चौधरी, फूलमती, सपमा वती, गंगावती, सत्यवती राना, साबिरा बेगम, रूपा देवी, पूनम, रमा शंकर, बाना देवी, गोमती देवी, सोमवती, लीलावती सहित हजारों आदिवासी मौजूद थे।

फिजा में गूंजा 'जंगल अपने आपका, नहीं किसी के..'

रविवार को शहर में निकली वनाधिकारी रैली में शामिल आदिवासियों ने नारों से फिजा को गूंजा दिया। पुरूष तो पुरूष आदिवासी जनजाति की महिलाएं भी नारे लगाने में किसी से पीछे नहीं दिख रही थीं। रैली में शामिल थारूओं के मुंह से साडा हक, एत्थे रख और जंगल अपने आपका नहीं किसी के.. सरीखे नारे निकल रहे थे। जिससे फिजा गुंजायमान हो रही थी। जिसे सुनकर लोग घरों से निकलकर सड़क पर आकर रैली का नजारा देख रहे थे।

इन जनपदों के आए आदिवासी

लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, गोंडा, बहराइच, खटीमा, नैनीताल, सोनभद्र, मिर्जापुर, चंदौली सहित बिहार, उत्तराखंड, झारखंड आदि प्रदेशों व जनपदों के वनाधिकार मुद्दों पर काम करने वाले जन संगठनों व मददगार संगठनों का प्रतिनिधि मंडल शामिल रहा।

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