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    मां ने बेंची बकरियां, बाप ने लगाई फेरी... अब बिटिया बनेगी डॉक्टर; लखीमपुर की महव‍िश ने NEET परीक्षा में हास‍िल क‍िए 527 अंक

    लखीमपुर खीरी की महविश ने आर्थिक तंगी के बावजूद नीट परीक्षा में सफलता प्राप्त की है। पिता फेरी लगाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं और बेटी ने घर पर रहकर तैयारी की। तीसरे प्रयास में 529 अंक प्राप्त कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में दाखिला सुनिश्चित किया। परिवार में ख़ुशी का माहौल है।

    By Dharmesh Kumar Shukla Edited By: Vinay Saxena Updated: Fri, 20 Jun 2025 02:15 PM (IST)
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    लखीमपुर की महव‍िश ने नीट परीक्षा में हास‍िल क‍िए 529 अंक।

    मो. सईद खान, खीरीटाउन (लखीमपुर)। कस्बा खीरी के शेखसराय निवासी महविश ने वो कर दिखाया जो महंगी कोंचिंग करके भी करना मुश्किल है। तीन दिन पहले घोषित हुए मेडिकल की सबसे बड़ी परीक्षा नीट के परिणामाें में महविश ने 529 अंक हांसिल किए। अब उसका सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस में प्रवेश हो पाना तय हो गया है। अब आपको महविश की इस लगन के पीछे उसके परिवार का समर्पण भी बताते हैं।

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    महविश के पिता मो. रईस पिछले दो दशकों से कपड़े की फेरी कर लगाकर छह लोगों के परिवार का भरण पोषण करते हैं। उनके परिवार में एक पुत्री व तीन पुत्र है। सबसे बड़ी बेटी महविश ने हाई स्कूल की परीक्षा हिंदी मीडियम से अमीरुल मोमिनीन कॉलेज खीरी व इंटर की परीक्षा अबुल कलाम इंटर कॉलेज लखीमपुर से लगभग 83 प्रतिशत अंकों से उत्तीर्ण की।

    महविश ने इंटर की परीक्षा पास करने के बाद डॉक्टर बनने का सपना संजोया, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति की कमजोरी के चलते नीट की परीक्षा की तैयारी के लिए कोटा या किसी बड़े शहर में रहकर तैयारी करना उसके लिए मात्र सपना था।

    पिता फेरी लगाकर पांच लोगों के परिवार की गाड़ी खींच रहे हैं और मां बकरियां पाल उनको बेंचकर बेटी की फीस भरने के लिए हाडतोड़ मेहनत करती हैं।

    बेटी के सपने को पूरी करने में मां-बाप ने हर मुमकिन मदद की। आखिरकार महविश ने साबित किया कि हर वो इंसान जो मुश्किलों से जंग जीतता है मंजिल उसको ही मिलती है। घर में ही रहकर नीट की तैयारी की और तीसरे प्रयास में अपने सपने को पूरा कर लिया। तीन दिन पूर्व नीट का परिणाम आने पर महविश के 529 अंक आए।

    डॉक्टर बनने का सपना पूरा होने पर परिवार में खुशी का माहौल है। लोग घर जाकर महविश को सफलता की मुबारकबाद दे रहे हैं।